देश के दूरसंचार बाजार पर कब्जे के बाद एयरटेल और वोडाफोन की निगाहें अब उपभोक्ता की जेब पर

By: | Last Updated: Friday, 14 February 2014 12:05 PM
देश के दूरसंचार बाजार पर कब्जे के बाद एयरटेल और वोडाफोन की निगाहें अब उपभोक्ता की जेब पर

नई दिल्ली: दूरसंचार सेवाओं के लिए जरूरी स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया इस बार सहजता के साथ पूरी हो गई. इस बार स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को 61,162 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई है. लेकिन उपभोक्ता के लिए ये खबर थोड़ी परेशान करने वाली है. स्पेक्ट्रम नीलामी के बाद अब इस बात के संकेत साफ हैं कि उपभोक्ता की जेब कटने वाली है. मोबाइल से कॉल करना अब महंगा हो सकता है.

 

इस बार स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया में भारती एयरटेल और वोडाफोन का बोलबाला रहा. स्पेक्ट्रम नीलामी से सरकार को जो 61,162 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हासिल हुई है, उसमें सबसे बड़ा योगदान इन दोनों कंपनियों का ही है. वोडाफोन ने तीन महानगरों में 900 मेगाहर्टज बैंड तथा 11 सर्किलों में 2जी 1800 मेगाहर्टज में स्पेक्ट्रम के लिए 19,600 करोड़ रुपये की बोली लगाई. जबकि भारती एयरटेल ने 900 और 1800 मेगाहर्टज बैंड में कुल 115 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम के लिए 18,530 करोड़ रुपये की बोली लगायी. भारत के दूरसंचार बाजार में अब भारती और वोडाफोन का कब्जा सा हो गया है और चिंता की बात भी यही है. क्योंकि ये दोनों प्रमुख कंपनियां अब उपभोक्ता की जेब से ही अपनी भरपाई करेंगी.

 

वोडाफोन ने तीन महानगरों में 900 मेगाहर्टज बैंड तथा 11 सर्किलों में 2जी 1800 मेगाहर्टज में स्पेक्ट्रम के लिए 19,600 करोड़ रुपये की बोली लगाई. कंपनी का दिल्ली, मुंबई और कोलकाता का लाइसेंस इस साल नवंबर में समाप्त हो रहा है और उसे परिचालन जारी रखने के लिये स्पेक्ट्रम की जरूरत थी. एयरटेल ने 900 मेगाहर्टज में दिल्ली और कोलकाता के लिये 900 मेगाहर्टज में स्पेक्ट्रम फिर से हासिल किया और मुंबई के लिए इसी बैंड में स्पेक्ट्रम प्राप्त किया. इसके अलावा, 15 सर्किलों में 1,800 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम हासिल किया. कंपनी ने 900 और 1800 मेगाहर्टज बैंड में कुल 115 मेगाहर्टज स्पेक्ट्रम के लिए 18,530 करोड़ रुपये की बोली लगायी. कंपनी को दिल्ली और कोलकाता में स्पेक्ट्रम की जरूरत थी क्योंकि उसका मौजूदा लाइसेंस नवंबर में समाप्त हो रहा है.

 

वोडाफोन और भारती एयरटेल ने 10 दिन चली नीलामी के दौरान दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों और कई अन्य शहरों में महत्वपूर्ण स्पेक्ट्रम हासिल करने में सफलता पायी. इससे सरकार को 61,162 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई है. मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इंफोकाम ने दोनों बैंड (प्रमुख 900 मेगाहट्र्ज तथा कम दक्ष 1,800 मेगाहट्र्ज) की नीलामी में आक्रमक रूप से शामिल हुई. हालांकि कंपनी ने 1,800 मेगाहर्टज में 22 सर्किलों में से 14 में स्पेक्ट्रम लिया. कंपनी के पास देश भर के लिये 4जी स्पेक्ट्रम होने के बावजूद कंपनी ने इस नीलामी में हिस्सा लिया.

 

यूनिनॉर 1800 मेगाहर्टज बैंड में पांच सर्किलों के लिए जबकि आइडिया इसी बैंड में 11 सर्किलों के लिए स्पेक्ट्रम हासिल किए. रिलायंस कम्यूनिकेशंस केवल एक सर्किल मुंबई में 1800 मेगाहर्टज में स्पेक्ट्रम हासिल किया. टाटा कम्यूनिकेशंस को कोई स्पेक्ट्रम नहीं मिला जबकि एयरसेल को पांच सर्किलों के लिए स्पेक्ट्रम मिले.

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