देश में 3 करोड़ लोग दमा से पीड़ित!

By: | Last Updated: Tuesday, 6 May 2014 10:50 AM
देश में 3 करोड़ लोग दमा से पीड़ित!

लखनऊ: देश में लगभग तीन करोड़ लोग दमा के रोगी हैं. यह बच्चों और वयस्कों दोनों में ही कुछ महीने में उभर कर आ जाता है. दमा का सही उपचार नहीं होने पर यह जानलेवा भी साबित होता है. इनहेलशन थेरेपी सबसे कारगर इलाज है, जो भारत में 4 से 6 रुपये प्रतिदिन की कीमत में उपलब्ध है. विश्व दमा दिवस (6 मई) की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश की राजधानी के चिकित्सक एक साथ एकत्रित होकर दमा के नियंत्रणकारी उपाचार के विषय में जागरूक करने के लिए आगे आए.

 

एक निजी होटल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सूर्या चेस्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. बी.पी. सिंह ने कहा, “दमा एक असाध्य रोग है जिसमें लंबे समय तक उचार की आवश्यकता पड़ती है. अधिकांश रोगी जब दवा के सेवन से बेहतर महसूस करने लगते हैं, तब वे कुछ सप्ताह के बाद ही उपचार बंद कर देते हैं. इससे रोग की पुनरावृत्ति का खतरा बढ़ जाता है और रोगी दमा के अटैक से ग्रस्त हो सकता है.”

 

उन्होंने कहा कि दमा से पीड़ित बच्चे मंे इनहेलेशन थेरेपी की शुरुआत जल्द से जल्द करनी चाहिए. इससे बीमारी को नियंत्रित करने और उसे अटैक से बचाने तथा फेफड़ों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है.

 

केजीएमयू के एचओडी डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि ज्यादातर लोग बार-बार होनी वाली कफिंग, सांस लेने में तकलीफ, छींक आने जैसे लक्ष्णों का उपचार कफ दवाइयों या बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेकर करते हैं. दमा और इनहेलर्स को लेकर डर भी व्याप्त है. वहीं, डाक्टर भी ऐसे समय मंे दमा के लिये ‘ब्रोंकियल स्पाज्म’ और ‘व्हीजिंग कफ’ आदि वैकल्पिक नामों का इस्तेमाल करते हैं.

 

उन्होंने कहा कि दमा और इनहेलर्स को लेकर व्याप्त मिथकों के कारण भारत में लगभग 80 प्रतिशत दमा रोगी ओरल टैब्लेट पर निर्भर है, जबकि इनहेलर ही सटीक और सुरक्षित इलाज है.

 

दमा एक असाध्य श्वसन रोग है, जो फेफड़ों मंे फैलता है. इस रोग की स्थिति में फेफड़ों के वायु छिद्रों में सूजन आ जाती है. इससे वायु छिद्र सिकुड़ जाते हैं. इस कारण फेफड़े विभिन्न संक्रमणों की चपेट मंे आ जाते हैं और दमा के आघात का खतरा मंडराने लगता है.

 

दमा आघात के कारण :

 

धूल, सर्दी-जुकाम, परागकण, पालतू जानवरों के बाल, विषाणु एवं वायु प्रदूषक साथ ही भवानात्मक आवेश भी दमा के आघात का कारण बन जाता है. जब एक व्यक्ति इसके संक्रमण से ग्रस्त हो जाता है. तब सूजे हुए वायुछिद्र विचलित हो उठते हैं, जिससे वहां की मांसपेशियों में जकड़न उत्पन्न हो जाती है. इससे फेफड़ों की नलिकाएं अपना कार्य स्वाभाविक रूप से नहीं कर पाती हैं और व्यक्ति को सामान्य तरीके से सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. यह स्थिति कभी-कभी घातक भी हो जाती है.

 

दमा के सामान्य लक्षण :

 

सीने में बार-बार जकड़न, सांस लेने में परेशानी, कफ का लगातार आना. हालांकि दमा के लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग प्रकार के होते हैं और बेहद जरूरी है कि इनकी निगरानी उचित चिकित्सक द्वारा की जाए.

 

आज दुनियाभर में दमा क उपचार का सबसे सुरक्षित तरीका इनहेलेशन थेरेपी को माना जाता है, क्योंकि यह सीधे रोगी के फेफड़ों में पहुंचकर अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है. टैबलेट व सीरप पेट में जाने के बाद रक्त के माध्यम से फेफड़ों में पहुंचता है. इसके अनेक साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. वहीं, इनहेलेशन थेरेपी टैबलेट्स एवं सीरप की अपेक्षा कहीं अधिक प्रभावी है.

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