'धर्म के नाम पर हमने कोई कत्लेआम तो नहीं कराया'

By: | Last Updated: Monday, 14 April 2014 8:38 AM
‘धर्म के नाम पर हमने कोई कत्लेआम तो नहीं कराया’

लखनऊ: मुल्क की सियासत की तस्वीर और ताबीर तय करने में अहम किरदार निभाने वाले शहर-ए-लखनऊ से आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे मशहूर अभिनेता जावेद जाफरी का कहना है कि पार्टी संयोजक अरविन्द केजरीवाल देश के कलुषित चुनावी फलक पर उम्मीद की एक किरण की तरह उभरे हैं और उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़कर जनता के साथ कोई छल नहीं किया.

 

जाफरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से खास बातचीत में कहा कि केजरीवाल पर दिल्ली की जनता को बेसहारा छोड़ देने का इल्जाम लगाया जाता है लेकिन सचाई यह है कि दिल्ली की जनता तो ना जाने कब से अनाथ थी. केजरीवाल ने आकर उसे उठाया, सहारा दिया. केजरीवाल जनलोकपाल पारित कराने का वादा करके दिल्ली राज्य की गद्दी पर बैठे थे, उन्होंने विधानसभा में कोशिश भी की लेकिन संसद से मंजूरी की मजबूरी के कारण वह उसे पारित नहीं करा सके और जनता से किया वादा पूरा ना कर पाने पर मजबूरी में गद्दी त्याग दी.

 

उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली में अपने डेढ़ महीने से ज्यादा के शासनकाल में बिजली और पानी समेत कई मुद्दों से जुड़े अपने वादों को अमली जामा पहनाया लेकिन जब विधानसभा में जनलोकपाल विधेयक नहीं पारित करा पाये तो उन्होंने इस लड़ाई को पूरे देश की जनता तक ले जाने के लिये मुख्यमंत्री पद छोड़ा और संसद में मजबूत स्थिति में आकर जनलोकपाल पारित कराने के मकसद से लोकसभा चुनाव में कूदे.

 

जाफरी ने कहा, ‘‘मैं नहीं समझता कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के साथ कोई छल किया है, बल्कि वह तो उसकी लड़ाई को एक अंत तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. मेरी नजर में केजरीवाल देश के कलुषित हो चुके चुनावी फलक पर उम्मीद की उजली किरण हैं. हम सभी को उनका साथ देना चाहिए.’’

 

इस सवाल पर कि आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में उतरकर जल्दबाजी की, जाफरी ने कांग्रेस और भाजपा पर तंज कसते हुए कहा ‘‘चलिये मान भी लेते हैं कि हमने गलती कर दी लेकिन हमसे भ्रष्टाचार की गलती तो नहीं हुई, जाति और धर्म के नाम पर हमने कोई कत्लेआम तो नहीं कराया.’’

 

जाफरी ने कहा कि वह किसी पार्टी या शख्स से लड़ने नहीं बल्कि एक सोच से लड़ने आये हैं जो हमारे मुल्क के आम आदमी की बेबसी का कारण बनकर अब तक उसका काफी नुकसान कर चुकी है.

 

यह पूछे जाने पर कि वह सेलेब्रिटी होने के कारण खास आदमी माने जाते हैं, ऐसे में खुद को आम आदमी के रप में पेश करने में कितनी दिक्कत हो रही है, उन्होंने कहा, ‘‘इंसान जहनियत से ही खास या आम बनता है और इस लिहाज से मैं विशुद्ध आम आदमी हूं. मेरा बचपन बहुत ऐश से नहीं बीता. बाद में अल्लाह ने धन-दौलत दी तो गाड़ी और घर खरीद लिया लेकिन खुदा कसम सीने में अब भी एक आम आदमी का ही दिल धड़कता है.’’ जाफरी ने कहा ‘‘आज देश के युवा लगभग सड़ चुकी व्यवस्था में बदलाव तो चाहते हैं लेकिन इसके लिये उन्हें व्यवस्था में उतरना होगा. मैं भी यह बदलाव चाहता हूं, इसीलिये एक आम आदमी की शक्ति को समझकर उसी रूप में जनता के सामने एक प्रत्याशी के तौर पर खड़ा हूं.’’

चुनाव लड़ने के लिये लखनउ को ही चुने जाने की खास वजह के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहले वह मुंबई की बांद्रा सीट से चुनाव लड़ने जा रहे थे. वहां से संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त भी चुनाव लड़ रही हैं, चूंकि उनके दत्त परिवार से बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं इसलिये प्रिया के खिलाफ चुनाव लड़ने के बजाय उन्होंने अपने दिल के करीब शहर यानी लखनउ को चुना.

 

जाफरी ने कहा कि आम-आदमी की जो समस्याएं मुम्बई में हैं, लगभग वही लखनउ में भी हैं. भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता सर्वव्यापी समस्याएं हैं. ऐसे में जो काम मुम्बई में किया जा सकता है, वही लखनउ में भी किया जा सकता है.

 

उन्होंने कहा कि उनका वादा है कि अगर लखनउ की जनता ने उन्हें चुना तो वह एक साल के अन्दर अच्छे नतीजे देंगे .

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