धारावी की तंग गलियों में आवारा कुत्तों का 'हाई टेक' पीछा

By: | Last Updated: Wednesday, 8 January 2014 12:42 PM

मुंबई: एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी की तंग और पेंचदार गलियों में मंगलवार दोपहर को आवारा कुत्तों के पीछे भागती-दौड़ती एक टीम की आपाधापी ने लोगों को भौचक्का कर दिया. आवारा कुत्तों का पीछा कर रही ये टीम हाई-टेक उपकरणों से लैस थी. ये टीम थी एक संस्था ह्युमन सोसाइटी इंटरनेशनल की और इस टीम में रिसर्चर्स और जानवरों के डॉक्टरों के साथ वैज्ञानिक भी शामिल थे. दरअसल अपनी महत्वाकांक्षी योजना के तहत बीएमसी ने इस संस्था को शहर में आवारा कुत्तों की गणना का काम सौंपा है.

 

मोटरसाइकिलों पर सवार इस टीम में मशहूर कुत्ता संरक्षक डॉ. सुनील चावला और ब्रिटेन से आए पशुसंख्या जीव विज्ञानी लेक्स हिबी भी शामिल थे. ये टीम एक खास स्मार्टफोन एप्प और ट्रैकिंग डिवाइसेस से लैस थी. लेकिन आवारा कुत्तों की तलाश में धारावी में घुसते ही इस टीम के हाई टेक उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया. सेटेलाइट की मदद से इस टीम को  स्मार्टफोन एप्प के जरिए इलाके की भौगोलिक संरचना और रास्तों की जानकारी लेनी थी. लेकिन धारावी की कई गलियों में आसमान ही नजर नहीं आ रहा था, जिससे सेटेलाइट की मदद नहीं मिल सकी.

 

काफी देर तक कुत्तों का पीछा करने के बाद इस टीम ने बताया कि धारावी के कुत्ते काफी दोस्ताना हैं. डॉ. सुनील चावला ने कहा, ” मॉरीशस के कुत्तों की तुलना में यहां के कुत्ते काफी दोस्ताना हैं. नर-मादा की पहचान और नसबंदी हुई है या नहीं ये पता करने के दौरान कुत्तों का बर्ताव काफी सहज रहा है.”

 

मुंबई के भारी ट्रैफिक से बचने के लिए इस टीम ने सुबह 6 बजे से ही कुत्तों का पीछा शुरू कर दिया था. खुली सड़कों और हाईवे में इस टीम के सदस्यों ने गूगल मैप और अपने ट्रैकिंग डिवाइस की मदद से आधुनिक तकनीक से आवारा कुत्तों की गणना की. कोई आवारा कुत्ता नजर आते ही इस टीम के सदस्य उसका हुलिया और पहचान के खास चिन्ह अपने खास स्मार्टफोन एप्प में दर्ज करते और फिर कुत्ते के करीब जाकर उसे पुचकार कर ये पता लगाते कि वो नर है या मादा? और उसकी नसबंदी हुई है या नहीं?

 

दरअसल जिस कुत्ते की नसबंदी की जाती है, उसके कान में पहचान के लिए एक छोटा सा चीरा लगा दिया जाता है. इस हाईटेक टीम ने धारावी में कई ऐसे कुत्तों की पहचान भी की जिनकी नसबंदी हो चुकी थी, लेकिन उनके कान सही-सलामत थे.

 

मुंबई के कुत्तों को गिनने के लिए ब्रिटेन से आए लेक्स हिबी ने बताया, ” मुंबई के आवारा कुत्तों की बिल्कुल सटीक गणना करना हमारा मकसद नहीं है. हम बस एक आधारभूत जानकारी जुटा रहे हैं. ताकि 5 साल बाद हम वापस आकर ये पता लगा सकें कि मुंबई में आवारा कुत्तों की तादाद कितनी बढ़ गई है?”

 

बीएमसी की ओर से 2007 और 2008 में कुत्तों की गिनती की गई थी. तब मुंबई में कुत्तों का आंकड़ा 76,000 था. इनमें से 26,900 पालतू और चार हजार से अधिक लाइसेंस वाले थे. आंकड़ों के अनुसार, 2001 से अब तक कुत्तों के काटने की सात लाख से अधिक मामले सामने आए हैं.

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Web Title: धारावी की तंग गलियों में आवारा कुत्तों का ‘हाई टेक’ पीछा
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