नक्सलियों से लड़ने वाले शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को ‘गोल्ड’ बताकर 'प्लास्टिक के मैडल' थमाए गए !

नक्सलियों से लड़ने वाले शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को ‘गोल्ड’ बताकर 'प्लास्टिक के मैडल' थमाए गए !

By: | Updated: 22 Mar 2014 01:37 PM
दांतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुकाबले के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों को मरणोपरांत प्लास्टिक के मैडल दिए जाने की चौंकानेवाली खबर सामने आई है. शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार प्लास्टिक के मैडल दिए जाने से बेहद नाराज हैं और खबर के खुलासे के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.

 

नक्सल प्रभावित दांतेवाड़ा से करीब 10 किलोमीटर दूर मौजूद गांव बिंजाम के लोग सरकार के हाथों शहीदों के अपमान पर भड़के हुए हैं. बीबीसी के मुताबिक, नक्सलियों का मुकाबला करते हुए शहीद हुए योगेश मडियामी के पिता रूपाराम मडियामी के लिए सम्मान का पदक दरअसल अब अपमान का पदक बन गया है. गांव में बनी उनकी झोपड़ी की दीवार से टंगे-टंगे जैसे अब यह पदक उन्हें चिढ़ा रहा है. क्योंकि इनकी पॉलिश उतरने से इनकी असलियत भी सामने आ गई है, सोना बताकर दिए गए ये पदक प्लास्टिक से बने हैं.

 

रूपाराम मडियामी ने बताया, "मंत्री लता उसेंडी ने पदक देते वक़्त हमसे कहा था कि यह सोने का है और इसे संभाल कर रखना. सोना क्या रहेगा, यह तो लोहे का भी नहीं है. अब पता चल रहा है कि यह तो प्लास्टिक का है. यह हमारे परिवार का सम्मान नहीं, बल्कि अपमान है."

 

9 जून 2011 को नक्सियों से मुकाबले के दौरान एक बारूदी सुरंग में विस्फोट से 10 जवान मारे गए थे. मारे गए इन 10 जवानों में से 3 विशेष पुलिस अधिकारी, योगेश मडियामी, बख्शु ओयामी और चमनलाल बिंजाम के ही थे जबकि बाकी के छत्तीसगढ़ के दूसरे इलाकों से थे.

 

अगले साल, 26 जनवरी के दिन दंतेवाड़ा की कारली पुलिस लाइन में एक समारोह आयोजित कर मारे गए विशेष पुलिस अधिकारियों को मरणोपरांत सम्मान दिया गया. बस्तर की तत्कालीन प्रभारी मंत्री ने मारे गए जवानों के परिजनों को बहादुरी के गोल्ड मैडल से सम्मानित किया था. लेकिन अब यही तथाकथित गोल्ड मैडल सरकार और प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है.

 

वक्त बीतने के साथ इन मैडल्स की पॉलिश भी उतर गई और भीतर से मामूली प्लास्टिक झलकने लगा. इंसानी जान की कीमत मामूली प्लास्टिक के टुकड़े जितनी समझे जाने से शहीदों के परिजन भड़के हुए हैं.

 

सबसे अहम सवाल ये कि जब शहीदों के परिजनों को गोल्ड मैडल देने का फैसला हुआ था, तो फिर वो मैडल प्लास्टिक के कैसे बन गए ? और इन मैडल्स का सोना कहां गायब हो गया ? शहीदों के परिजन मैडल बंटवारे में किसी बड़े भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं. बिंजाम गांव के लोगों का कहना है कि अफसरों ने सोंचा कि बराबर वजन के प्लास्टिक के मैडल सौने की पॉलिश करके थमा दो, ये गंवार आदिवासी भला असली-नकली का फर्क क्या समझें.

 

बस्तर के प्रभारी छत्तीसगढ़ के मंत्री केदार कश्यप ने बीबीसी से बात करते हुए घटना पर हैरानी जताई और कहा कि वह पूरे मामले की जांच करवाएंगे. वो कहते हैं, "ये एक गंभीर मामला है. हम सुनिश्चित करेंगे कि जिन पुलिस के जवानों ने अपनी जान देकर इलाक़े में शांति स्थापित करने के लिए क़ुर्बानी दी है, उन्हें पूरा सम्मान मिले."

 

एक मंत्री के दिए ज़ख्मों और दूसरे मंत्री के मरहम के बीच अब छत्तीसगढ़ में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि नक्सल विरोधी अभियान में इतनी राशि के आवंटन के बावजूद मारे गए जवानों के परिजनों को रुसवाई क्यों उठानी पड़ रही है.

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest India News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story पीएम मोदी आज करेंगे बीजेपी के नए हाईटेक हेडक्वार्टर का उद्घाटन, आधुनिक तकनीकों से है लैस