नितिन गडकरी की कंपनी में पत्‍नी, बेटे और भांजा निवेशक

नितिन गडकरी की कंपनी में पत्‍नी, बेटे और भांजा निवेशक

By: | Updated: 24 Nov 2012 11:10 PM


नई
दिल्‍ली:
बीजेपी अध्यक्ष
नितिन गडकरी की मुसीबतें कम
होने के बजाए दिन ब दिन बढ़ती
जा रही हैं.




अब खुलासा हुआ है कि गडकरी की
कंपनी पूर्ति पावर एंड शुगर
में पैसा लगाने वाली 18
कंपनियों में न सिर्फ उनकी
पत्नी कंचन, उनके बेटे निखिल
व सारंग, भांजे संदीप, पूर्ति
के वाइस चेयरमैन जय कुमार
वर्मा और ड्राइवर मनोहर पंसे
शेयरहोल्डर थे, बल्कि वे
डायरेक्टर भी थे.

अंग्रजी
अख्‍़ाबार 'टाइम्‍स ऑफ
इंडिया' की खबर के मुताबिक इन
18 कंपनियों ने पूर्ति पावर
एंड शुगर के अलावा पूर्ति एंड
महात्मा शुगर एंड पावर में भी
पैसा लगाया है.
 
नितिन
गडकरी की पत्नी कंचन, उनके
बेटे निखिल व सारंग और भांजे
संदीप ने तीन कंपनियों
जेसिका मर्केंटाइल, निलय
मर्केंटाइल और जैनम
मर्केंटाइल में पैसा लगाया
था. इन्होंने पूर्ति में पैसा
लगाने वाली कंपनियों में 2009-10
के दौरान निवेश किया था.

गडकरी
खुद 10 अप्रैल 2000 से 27 अगस्त 2011 के
बीच पूर्ति के चेयरमैन थे.
हालांकि अभी गडकरी के पास
पूर्ति के सिर्फ 370 शेयर हैं.

 
गडकरी के भांजे संदीप ने
अपना निवास बुल्ढाणा शुगर
एंड पावर बताया है. ये वही
कंपनी है जिसमें गडकरी के
ड्राइवर मनोहर पंसे
डायरेक्टर हैं.

इन तीनों
कंपनियों में एक चीज समान
दिखाई देती है. वो ये कि कंपनी
खड़ी करने वाले अमित पांडे और
राहुल दुबे ने इनमें अपने
शेयर कंचन, निखिल, सारंग और
संदीप के नाम कर दिए थे.
ये
सब कंपनी शुरू होने के सिर्फ
एक से तीन महीने के अंदर-अंदर
हुआ. इसी दौरान पूर्ति के दो
कर्मचारी इन कंपनियों में
डायरेक्टर भी बने.

कुछ
दिन पहले आरएसएस से जुड़े एस
गुरुमूर्ति ने बीजेपी
नेताओं को बताया था कि इन 18
कंपनियों के पैसा लगाने के
पीछे मनीष मेहता थे. मेहता
पूर्ति में जुलाई 2000 से
दिसंबर 2002 और 29 दिसंबर 2010 से 28
सितंबर 2011 के बीच डायरेक्टर
थे.

नागपुर के मनीष मेहता
पर गुरुमूर्ति ने पूरा दोष
मढ़ दिया था और कहा था कि
मेहता ने पूर्ति छोड़ने से
पहले कंपनी में 47 करोड़ रुपये
लगाए थे. हालांकि अभी इन 18
कंपनियों में गडकरी के
परिवार का कोई हिस्सा नहीं
है.

लेकिन गडकरी के
परिवार वालों के अपने शेयर
ट्रांसफर करने के बाद ही इन
कंपनियों के डायरेक्टर और
उनके पते बदले गए.

एक और
गड़बड़ी जो पूर्ति में शेयर
पैटर्न में नजर आती है वो ये
कि महात्मा शुगर एंड पावर में
पैसा लगाने वाली इन तीनों
कंपनियों का निवेश
दस्तावेजों में गड़बड़
दिखाई देता है. महात्मा शुगर
एंड पावर पूर्ति ग्रुप की ही
कंपनी है.

लेकिन निलय
मर्केंटाइल की 2010-11 की
बैलेंसशीट के मुताबिक इस
कंपनी ने पूर्ति में 1.50 लाख और
महात्मा शुगर एंड पावर में 55
लाख रुपये लगाए हैं.

लेकिन
पूर्ति की बैलेंसशीट में
निलय मर्केंटाइल का निवेश 15
लाख रुपये दिखाया गया है.
जबकि महात्मा शुगर एंड पावर
की बैलेंसशीट में 1 करोड़ 72
लाख रुपये दिखाया गया है.




यानी ये साफ नहीं है कि
पूर्ति और महात्मा शुगर एंड
पावर में ये बाकी का पैसा
कहां से आया.

जाहिर है
गडकरी भले ही ये कहें कि वो
जांच के लिए तैयार हैं, उन के
लिए ताजा आरोपों का जवाब देना
काफी मुश्किल भरा हो सकता है.




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