नियमित कप्तान बनने की राह पर कोहली

By: | Last Updated: Tuesday, 25 February 2014 5:19 AM

नई दिल्ली: विश्व कप 2007 भारतीय क्रिकेट में परिवर्तन का नया दौर लाया था. विश्व कप से पहले ही राउंड से बाहर हुई टीम इंडिया बदलाव चाहती थी और तबके कप्तान राहुल द्रविड़ पर इसकी जिम्मेदारी थी. हालांकि द्रविड़ ने इससे पहले अपनी कप्तानी में जीत की नई दास्तां लिखी थी. लेकिन उस वक्त भारत और क्रिकेट नए युग में जाने को तैयार थी. टी20 विश्व कप में नई टीम इंडिया की कमान टीम में आक्रामक बल्लेबाज रहे महेन्द्र सिंह धोनी को दी गई. भारत ने इतिहास रचते हुए पहला टी20 विश्व कप अपने नाम किया था. धीरे-धीरे धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया जीत का स्वाद चखने लगी और अंत में वो समय भी आ गया जब क्रिकेट के तीनों प्रारूपों का जिम्मा धोनी के हाथों में दे दिया गया.

 

2011 और इसके एक साल तक सबकुछ धोनी के अनुरूप चल रहा था. लेकिन इसके बाद भारत का इंग्लैंड दौरा और इंग्लैंड के भारत दौरे ने धोनी की कप्तानी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. धोनी के बचाव में कई दिग्गज उतरे तो कईयों ने धोनी के रणनीति पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.  धोनी पर सवाल अब फिर उठने लगे हैं जब पिछले दो विदेशी दौरे में हुए दर्जन भर मुकाबले में टीम इंडिया बिना जीते भारत लौटी. टीम इंडिया पर एक बार फिर बदलाव की बयार चलने लगी है. समय एक बार फिर 2007 का हो गया है. ऐसे में एशिया कप के लिए भारत की कमान विराट कोहली को सौंपी गई है. इतने बड़े टूर्नामेंट में कमान सौंपना अपने आप में एक बदलाव की कहानी कह रही है. वैसे सब जानते हैं कि कप्तान धोनी चोटिल हैं और इसीलिए कमान कोहली के हाथों में है. लेकिन अगर भारत के क्रिकेट के भविष्य को देखें तो सामने 2015 का विश्व कप है. ऐसे में हो सकता है कि टीम इंडिया के थिंक टैंक उस ओर देखते हुए कुछ नए फैसले ले.

 

अपनी और धोनी की कप्तानी पर कोहली ने खुद कहा है कि पिछले कुछ सालों में उन्होंने(धोनी) जो कुछ हासिल किया है, उसकी इससे कोई तुलना ही नहीं हो सकती.’’

 

अपनी कप्तानी के बारे में उन्होंने कहा ,‘‘मैं सिर्फ एक टूर्नामेंट के लिये कप्तान हूं. यह नियमित कप्तानी से एकदम अलग है. जीतने पर आपकी तारीफ होती है और हारने पर आलोचना.  यह सब खेल का हिस्सा है.’’

 

लेकिन कोहली कि सिर्फ अपनी कप्तानी के बारे में जो राय थी वो धोनी से तुलनात्मक बातों से अलग थी. कोहली ने कहा ,‘‘ मैं फिलहाल वह सब अनुभव करने की स्थिति में नहीं हूं. मुझे एक टूर्नामेंट मिला है जैसा कि पहले भी मिल चुका है. यह काफी कठिन चुनौती है. आपको हर तरह की प्रशंसा और आलोचना के लिये तैयार रहना चाहिये.’’ ”मैंने अभी तक सिर्फ आठ मैचों में कप्तानी की है. अनुभव अच्छा रहा पर यह बड़ा टूर्नामेंट है. मुझे इस चुनौती का इंतजार है. हमारे पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी हैं.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ सबसे ज्यादा रोमांचक बात यह है कि हमारे पास ऐसे खिलाड़ियों का समूह है जिनसे मैं खुलकर बात कर सकता हूं. आपसी तालमेल बहुत जरूरी है. हमारा रिकार्ड पहले ही से अच्छा है और मैं इसे और बेहतर करना चाहता हूं.’’ इस हिसाब से देखें तो केहली भी जानते हैं कि ताज अब ज्यादा दूर नहीं है बस बेहतर खेल से ताज उनके सिर आ सकता है. 

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Web Title: नियमित कप्तान बनने की राह पर कोहली
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