निर्मल बाबा के चक्‍कर में एक करोड़ का नुकसान

निर्मल बाबा के चक्‍कर में एक करोड़ का नुकसान

By: | Updated: 13 Apr 2012 11:47 PM


लुधियाना:
लुधियाना के एक कारोबारी ने
आरोप लगाया है कि निर्मल बाबा
के दस्तखत किए हुए चेक के
चक्कर में उन्हें एक करोड़
रुपये का नुकसान हुआ है.

कारोबारी
का दावा है कि उन्हें यह चेक
एक दोस्त से मिला था, जिसे
अपने खाते से कैश कराने पर
उन्हें पांच लाख रुपये कमीशन
मिलना था. चेक जमा होने पर
कारोबारी ने वादे के मुताबिक
एक करोड़ रुपये निकालकर
दोस्त को दे भी दिए.

बाद
में बैंक ने कहा कि चेक में
कुछ गड़बड़ी थी, जिसके चलते
पैसे वापस करने होंगे. लेकिन
अब वो दोस्त पैसे वापस करने
को तैयार नहीं है, जबकि बैंक
उनसे एक करोड़ रुपये मांग रहा
है. उधर, निर्मल बाबा चेक को
फर्जी बता रहे हैं. इन हालात
में यह पता नहीं चल रहा है कि
एक करोड़ का ये घोटाला किसने
किया.

लुधियाना के
कारोबारी दंपति इंद्रजीत
आनंद और पूनम आनंद का दावा है
कि कुछ दिन पहले तक दोनों
निर्मल बाबा के पक्के भक्त
थे, लेकिन अब उनका नाम सुनकर
ही कांप जाते हैं.

आरोप है
कि निर्मल नरूला के ट्रस्ट ने
इन्हें ऐसा चूना लगाया कि अब
उससे उबरना मुश्किल है.
इंद्रजीत आनंद जापान में कई
साल गुजारने के बाद भारत लौटे
और अपने शहर लुधियाना में
कपड़े का कारोबार शुरू किया.

उनकी
पत्नी पूनम आनंद ने भी
आर्टीफिशियल ज्वैलरी का काम
शुरू किया. लेकिन कारोबार में
घाटा होने से उन्हें आर्थिक
मुश्किलों का सामना करना
पड़ा. परेशानियों के इसी दौर
में पति-पत्नी का रुझान
निर्मल बाबा की तरफ हुआ.

दोनों
हर रोज उनका कार्यक्रम देखने
लगे. इसी बीच जब उनके बिजनेस
में कुछ सुधार आया, तो दोनों
को लगा कि यह बाबा की कृपा का
करिश्मा है. इससे दोनों का
निर्मल बाबा पर विश्वास और
गहरा हो गया.
 
पूनम आनंद ने
निर्मल बाबा के कथित कृपा का
जिक्र अपनी 35 साल पुरानी
पारिवारिक मित्र श्रीमती
गुप्ता से किया और उनसे भी
बाबा के कार्यक्रम देखने को
कहा.

इसके कुछ ही दिनों
बाद श्रीमती गुप्ता के पति ने
इंद्रजीत आनंद को अपने पास
बुलाया और एक लुभावना ऑफर
दिया. ऑफर यह था कि इंद्रजीत
आनंद के खाते में करीब एक
करोड़ रुपये का एक चेक जमा
होगा. खाते में रकम आने के बाद
इंद्रजीत आनंद को यह रकम
निकालकर कैश देनी होगी. इसके
बदले उन्हें करीब पांच लाख
रुपये कमीशन मिलेगा.

अपने
पुराने दोस्त की बातों में
आकर आनंद दंपति ने चेक लेने
के लिए हामी भर दी और एक दिन
दिल्ली से फोन के जरिए
इंद्रजीत आनंद के बैंक खाते
की पूरी जानकारी ली गई.

इसी
साल फरवरी में गुप्ता ने एक
करोड़ सात लाख रुपये का चेक
इंद्रजीत आनंद को सौंपा. चेक
पर निर्मल बाबा के हस्ताक्षर
थे. 22 फरवरी को इंद्रजीत ने
लुधियाना के एचडीएफसी बैंक
के अपने खाते में चेक जमा भी
कर दिया.

आनंद दंपति का
कहना है कि एक करोड़ सात लाख
रुपये की यह रकम उसी दिन उनके
एकाउंट में जमा भी हो गई.
चूंकि बैंक की शाखा में एक
करोड़ रुपये कैश नहीं थे,
इसलिए इंद्रजीत ने पहले दिन 65
लाख रुपये और फिर अगले दिन 35
लाख रुपये निकालकर अपने
दोस्त गुप्ता को सौंप दिए.

चेक
की बची हुई रकम को कमीशन के
तौर पर पाकर आनंद दंपति गदगद
थे. दोनों समझ रहे थे कि
निर्मल बाबा की कृपा से ये
रकम उन्हें मिली है. लेकिन
दोनों की खुशी उस वक्त गम में
बदल गई, जब बैंक मैनेजर ने फोन
करके बताया कि जो चेक उनके
खाते में जमा किया गया था,
उसमें कुछ गड़बड़ी है.

पूनम
आनंद का सवाल है कि अगर चेक
में कोई गड़बड़ी थी, तो उसे
भुनाए जाने से पहले इसकी
जानकारी क्यों नहीं दी गई?
उनके मुताबिक उन्होंने बैंक
मैनेजर के सामने ही सीधे
निर्मल बाबा को फोन लगाया,
लेकिन बाबा की बातें सुनकर तो
उनके होश ही उड़ गए.

पूनम
का कहना है कि बिजनेस में
थोड़ा फायदा होने पर उन्हें
लगा था कि यह सब निर्मल बाबा
की कृपा है. उसी दौरान
उन्होंने दो बार निर्मल
ट्रस्ट के एकाउंट में पैसे भी
जमा कराए थे. लेकिन अब वो
मानती हैं कि बाबा के चक्कर
में पड़ना उनकी सबसे बड़ी
गलती थी.

अब सवाल उठ रहे
हैं कि क्या निर्मल ट्रस्ट की
ओर से जारी चेक फर्जी है? आखिर
बाबा का पैसा अलग-अलग खातों
में क्यों घूम रहा है? क्या
बाबा के खास लोग ट्रस्ट के
पैसे उनके निजी खाते में
पहुंचा रहे हैं? अगर निर्मल
दरबार ट्रस्ट से धोखाधड़ी
हुई तो बाबा भांप क्यों नहीं
पाए? और एक करोड़ का चेक
भुनाने के लिए कोई निर्मल
ट्रस्ट का सहारा क्यों लेगा?

लुधियाना
पुलिस कछुए की चाल से
फर्जीवाड़े के इस केस की
तफ्तीश तो कर रही है. सवाल यह
है कि आखिर पुलिस अब तक इस
फर्जीवाड़े की तह तक क्यों
नहीं पहुंच पाई?
यह पता
क्यों नहीं लगाया गया कि
इंद्रजीत आनंद तक चेक
पहुंचाने की कड़ी में कौन-कौन
से लोग शामिल हैं? सवाल यह भी
है कि अगर चेक फर्जी था तो उस
पर दस्तखत किसने किए?

इंद्रजीत
के दोस्त गुप्ता ने एक करोड़
रुपये किसको दिए? क्या निर्मल
बाबा का कोई भेदिया परदे के
पीछे से हेराफेरी का खेल खेल
रहा था?

गौरतलब है कि
निर्मल बाबा भी 1976 से पहले
लुधियाना की गलियों में रहा
करते थे लेकिन आज उनका
टर्नओवर करोड़ों में है.





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