नोट वापसी का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं: आरबीआई

By: | Last Updated: Friday, 24 January 2014 2:47 AM

नई दिल्ली: आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि 2005 से जारी नोटों को वापस लिया जाना विमुद्रीकरण नहीं है और इसका संबंध आगामी आम चुनाव से नहीं है. उन्होंने यहां आर.एन. काओ स्मारक व्याख्यान देने के बाद कहा कि यह कदम जाली नोटों को हटाने की एक कोशिश है.

 

उन्होंने कहा कि 2005 के बाद जारी नोटों में सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था है. कैबिनेट सचिवालय के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग द्वारा आयोजित सालाना व्याख्यान के बाद आयोजित परिचर्चा सत्र में सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने इस पर सवाल पूछा था.

 

सिन्हा ने इस कदम के लिए चुने गए समय को लेकर यह सवाल उठाया था कि क्या इसका संबंध चुनाव से है. राजन ने कहा कि 2005 से पहले जारी हुए नोटों की वैधता बनी हुई रहेगी. इसके कारण आम लोगों को कोई कठिनाई नहीं होगी.

 

उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद नोटों को प्रचलन से हटाना नहीं है. यह सिर्फ आसानी से नकल किए जाने वाले नोट को हटाकर अधिक प्रभावी नोट को प्रचलन में लाने के लिए किया गया है. उन्होंने कहा कि 2005 के बाद जारी नोटों की नकल आसानी से नहीं की जा सकती है.

 

उन्होंने कहा कि यह कदम जाली नोटों को प्रचलन से हटाना के लिए है. राजन ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने काफी पहले इसके लिए सिफारिश की थी. इसे बस लागू अब किया गया है. इसका संबंध चुनाव से नहीं है.

 

आरबीआई ने बुधवार को जारी अपने एक बयान में कहा था, “31 मार्च 2014 के बाद आरबीआई 2005 के पहले जारी सभी बैंक नोटों को वापस ले लेगा. एक अप्रैल 2014 के बाद से लोगों को उन नोटों को बदलने के लिए बैंक जाना होगा.”

 

आरबीआई ने आम लोगों से अनुरोध किया कि परेशान न हों और वापसी प्रक्रिया में मदद करें.

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Web Title: नोट वापसी का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं: आरबीआई
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