पढें: सिब्बल ने क्या कहा न्यायपालिका के बारे में

पढें: सिब्बल ने क्या कहा न्यायपालिका के बारे में

By: | Updated: 05 Sep 2013 07:48 AM


नई दिल्ली:
केंद्रीय विधि एवं न्याय
मंत्री कपिल सिब्बल गुरुवार
को न्यायपालिका में उच्च
स्तर पर न्यायाधीशों की
नियुक्ति को कारगर बनाने और
उच्च न्यायालयों की
स्वतंत्रता के संतुलन को
बहाल करने की जरूरत को
रेखांकित किया.





उच्च
न्यायपालिकाओं में
न्यायाधीशों की नियुक्ति
में कार्यकारी की व्यवस्था
मुहैया कराने के लिए लाए गए
120वें संविधान संशोधन विधेयक
2013 को पेश करते हुए सिब्बल ने
राज्यसभा में कहा कि
'न्यायाधीशों की नियुक्ति
में संतुलन बहाल करने की
जरूरत है और न्यायाधीशों की
नियुक्ति में कार्यकारी की
व्यवस्था होनी ही चाहिए.'





उन्होंने
कहा कि सदन में संविधान
संशोधन विधेयक इसलिए पेश
किया जा रहा है क्योंकि
'मौजूदा प्रणाली काम नहीं कर
रही है.'





सिब्बल
ने कहा कि उच्च न्यायालयों की
न्यायपालिका का 'नाजुक
स्वतंत्रता संतुलन'
सर्वोच्च न्यायालय के
कॉलेजियम से विक्षुब्ध है.
देश के प्रधान न्यायाधीश की
अध्यक्षता वाली कॉलेजियम
में शीर्ष अदालत के वरिष्ठ
न्यायाधीश शामिल होते हैं.





उन्होंने
कहा, "उच्च न्यायालयों को
सर्वोच्च न्यायालय से
स्वतंत्र माना जाता है,
सहयोगी नहीं. अब उच्च
न्यायालयों के न्यायाधीश
अपनी नियुक्ति के लिए
सर्वोच्च न्यायालय के
न्यायाधीशों की तरफ देखते
हैं. इससे देश में उच्च
न्यायालयों की नाजुक
स्वतंत्रता बाधित होती है."





सिब्बल
ने कहा कि सरकार 1993 से पूर्व की
उस स्थिति को वापस नहीं लाना
चाहती जब न्यायाधीशों की
नियुक्ति में कार्यकारी
अकेले फैसला लेता था. सरकार
इस दिशा में सम्मिलित प्रयास
चाहती है.





उन्होंने
कहा, "न्यायपालिका कहती है कि
सरकार पारदर्शी और जवाबदेह
बने. यह सही है और
न्यायपालिका ने कई अवसरों पर
उचित तरीके से हमारी त्रुटि
को पकड़ा भी है."





सिब्बल
ने कहा, लेकिन न्यायधीशों की
नियुक्ति जिस तरीके से होती
है उसकी जानकारी लोगों को
नहीं है.





उन्होंने
कहा, "जज किस तरह चुने जाते हैं
उस फैसले की जानकारी या
पारदर्शिता नहीं है क्योंकि
सूचना का अधिकार उस पर लागू
नहीं होता. न्यायपालिका का जो
कथन कार्यकारी पर अनिवार्य
रूप से लागू होता है वह
न्यायपालिका पर भी अनिवार्य
रूप से लागू हो."





सिब्बल
ने कहा कि न्यायाधीशों की
नियुक्ति को कारगर बनाने का
समय आ गया है और नियुक्ति की
अर्हता विस्तार में तय की
जाएगी.




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