पहली बार शहजादा बोलने पर राहुल ने दिया मोदी को करारा जवाब

पहली बार शहजादा बोलने पर राहुल ने दिया मोदी को करारा जवाब

By: | Updated: 24 Apr 2014 01:18 PM
नई दिल्ली. खुद को शहजादा कहे जाने पर राहुल गांधी ने कहा है कि उन्हें बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के गुस्से का गिफ्ट नहीं चाहिए. द हिंदू को दिए इंटरव्यू राहुल गांधी ने बुद्ध की कहानी सुनाई और कहा कि वह भी बुद्ध की तरह मोदी का गिफ्ट लौटा रहे हैं. अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में राहुल ने कारोबारियों से मोदी के रिश्तों पर हमला भी बोला.

 

राहुल गांधी ने पहली बार खुद को शहजादा कहे जाने पर अपनी चुप्पी तोड़ी है . अंग्रेजी अखबार द हिंदू को दिए इंटरव्यू में राहुल ने कहा है कि वो नरेंद्र मोदी की गालियां और गुस्से का गिफ्ट लेने को तैयार नहीं हैं.

 

द हिंदू में छपे राहुल के इंटरव्यू के मुताबिक राहुल से पूछा गया कि शहजादा कहे जाने पर आपको कैसा लगता है?

राहुल गांधी -  जैसा मोदी जी चाहें मुझे वैसा संबोधन दे सकते हैं, जो गालियां वो मुझे देना चाहते हैं दे सकते हैं. इससे मुझसे कुछ लेना देना नहीं है बल्कि इसका नाता खुद उनसे है.

 

इसी सवाल के जवाब राहुल ने भगवान बुद्ध की कहानी भी सुनाई. राहुल गांधी – एक बार भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे थे तभी एक शख्स ने आकर गालियां देनी शुरू कर दीं. काफी देर बाद एक शिष्य ने पूछा ‘उस शख्स ने आपको गालियां दीं, अपमानित किया तो आपने कुछ क्यों नहीं किया?’ भगवान बुद्ध ने कहा ‘वो अपने गुस्से का गिफ्ट लेकर आया था और गिफ्ट देने के लिए कुछ देर खड़ा रहा. फिर वो थक गया और अपना गिफ्ट लेकर लौट गया.‘  इसलिए मोदी जी मुझे जो गिफ्ट दे रहे हैं वो मुझे भी लेने की जरूरत नहीं हैं. वो अपना गिफ्ट अपने पास रखें.

 

द हिंदू को दिए इंटरव्यू ने राहुल ने एक सवाल के जवाब में नरेंद्र मोदी की कुछ कारोबारियों से करीबी पर निशाना भी साधा. राहुल गांधी से सवाल पूछा गया था कि क्या आपको लगता है कि इस चुनाव में बड़े कारोबारी घराने कांग्रेस के खिलाफ हैं?

 

तो राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस कारोबारी समुदाय और गरीब दोनों को आर्थिक विकास में सहयोगी मानती हैं. लेकिन विपक्षी नेता का एक दो बिजनेस घरानों के लिए झुकाव और कुछ नहीं बल्कि पूंजीपतियों के साथ सांठगांठ है जिसका विरोध होना चाहिए. इससे दुनिया में भारत की छवि ऐसी बनती है कि भारत कारोबार के समान अवसर नहीं हैं.

 

हालांकि जब गरीबों के लिए चलाई जा रही यूपीए सरकार की योजना मनरेगा को लेकर राहुल से पूछा गया कि क्या ये आपकी पहल थी या फिर प्रधानमंत्री की?

 

राहुल ने इस सवाल का साफ जवाब नहीं दिया.

 

राहुल गांधी – मनरेगा का आइडिया पहले महाराष्ट्र में लागू हुआ था. यूपीए ने नया ये किया कि इसे इतने बड़े देश में एक अधिकार बना दिया गया. इससे कांग्रेस की सोच झलकती है ना कि किसी एक शख्सियत की.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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