पांच महीने से मोदी-गडकरी में दुआ सलाम तक नहीं

पांच महीने से मोदी-गडकरी में दुआ सलाम तक नहीं

By: | Updated: 19 Apr 2012 10:26 AM


नई दिल्ली: पिछले पांच
महीने के दौरान गुजरात के
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी
और बीजेपी अध्यक्ष नितिन
गडकरी के बीच किसी तरह की
बातचीत नहीं हुई है.




इंडियन एक्सप्रेस अखबार के
मुताबिक खुद बीजेपी अध्यक्ष
नीतिन गड़करी ने ये स्वीकार
किया है. यह तथ्य ये बता देने
के लिए काफी है कि मोदी और
गड़करी के बीच रिश्ते कैसे
हैं.




गुजरात को छोड़ दीजिए तो
नितिन गडकरी और नरेंद्र मोदी
में मतभेद की स्थिति ये है कि
दोनों में पांच महीने में
मुलाकात तो जाने ही दीजिए,
बात की गुंजाइश भी नहीं बनी
है. कही सुनी बात नहीं है ये.
इंडियन एक्सप्रेस अखबार के
मुताबिक खुद गडकरी ने
कड़वाहट की ये कहानी बयान की
है.




गडकरी के मुताबिक उनकी आखिरी
मुलाकात शादी के एक रिसेप्शन
में हुई थी.




ये शादी थी जी समूह के मालिक
के परिवार में. और तारीख थी 22
नवंबर. गुड़गांव में ये
समारोह हुआ था और इसी में
दोनों का आखिरी बार आमना
सामना हुआ था. वो भी बस दुआ
सलाम की तरह.




30 जनवरी 2010 को आखिरी बार गडकरी
और मोदी ने मंच साझा किया था.
बापू के बलिदान दिवस पर.
पोरबंदर में. इसके चार महीने
बाद 21 अप्रैल 2010 को दिल्ली में
बीजेपी ने महंगाई पर रैली की
थी तो नरेंद्र मोदी नदारद थे.




अब ये तो नहीं पता कि गडकरी ने
मोदी को दिल्ली की रैली में
बुलाया नहीं था या मोदी ने
न्योता कबूल नहीं किया लेकिन
ये तो सच है कि लोकायुक्त की
नियुक्ति के मुद्दे पर
राज्यपाल पर हमला बोलने के
लिए मोदी ने अहमदाबाद में
महारैली की तो गड़करी को दूर
ही रखा.




मोदी और गडकरी के रिश्तों में
खटास की कहानी और आगे गई. 30
सिंतंबर 2011 को वो राष्ट्रीय
कार्यकारिणी की बैठक तक में
शामिल नहीं हुए. बहाना था
नवरात्रि का उपवास.




आखिरकार क्या वजह है कि
बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी के
अध्यक्ष और उसी पार्टी के
मुख्यमंत्री के बीच इतनी
ऊंची दीवार खड़ी हो गई कि
दोनों मंथन छोड़िए
बात-मुलाकात तक से परहेज करने
लगे.




इसकी एक बड़ी वजह ये बताई
जाती है कि बीजेपी के पूर्व
संगठन महामंत्री संजय जोशी
के साथ गड़करी की दोस्ती.
गड़करी ने जोशी को संगठन में
बिना कोई बड़ा पद दिये हुए एक
तरह से यूपी चुनाव की कमान ही
सौंप दी थी. बची खुची असर
चुनाव के दौरान मोदी की यूपी
में नो एंट्री ने पूरी कर दी.




लेकिन इससे भी बड़ी वजह ये है
कि गडकरी ने कभी मोदी की
नाराजगी की परवाह नहीं की.
अध्यक्ष होने के बावजूद
उन्होंने ना तो मोदी को कभी
मनाया और ना ही अपनाया. ये अलग
बात है कि मंचों और मुलाकातों
से दूर-दूर रहने के बावजूद
गडकरी अपने बेटे की शादी में
नरेंद्र मोदी को बुलाने का मन
बना चुके हैं.




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