पीएम के सड़कें बनवाने के वायदे निकले 'हवाई किले'

पीएम के सड़कें बनवाने के वायदे निकले 'हवाई किले'

By: | Updated: 14 Aug 2012 09:32 AM


ई दिल्ली: प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने देश को सपना
दिखाया कि उनकी सरकार
वाजपेयी सरकार से भी ज्यादा
हाइवे देश को देगी. लक्ष्य
दिया गया कि रोज औसतन बीस
किलोमीटर सड़क बनाने का.

लेकिन
सच्चाई ये है कि देश को
तरक्की देने के ये सपने
स्पीडब्रेकर पर अटक गए.
लेटलतीफी के हाइवे ऐसी
सुस्तचाल चले कि दावे हवाई
किले साबित हुए. इस वित्तीय
साल के पहले 90 दिनों में सिर्फ
सौ किमी हाइवे बने हैं. सवाल
ये है कि रोज के बाकी 19
किलमीटर हाइवे कहां अटक गए.

लाल
किले की प्राचीर से
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
ने देश से वायदा किया था तब
लगा था कि देश में जल्द ही
सड़कों का जाल बिछ जाएगा. शहर
पास आ जाएंगे, सफर आसान और
आरामदायक होगा लेकिन तीन साल
बाद भी हालात जस के तस हैं.
सड़कें अब भी हिचकोले खा रही
हैं, सड़क और पुल बनाने का काम
बेहद मंद गति से चल रहा है और
रोज बीस किलोमीटर सड़क बनाने
का वायदा लाल बत्ती पर अटक
गया है.

काम कहां अटका है
?

साल 2011-12 में 8000 किमी
सड़क बनाने के ठेके देने का
लक्ष्य था लेकिन 6491 किमी के ही
ठेके दिये जा सके. इसमें से भी
सिर्फ 2248 किमी सड़क ही पूरी हो
सकीं.

पीएम के वायदे पर
जाएं तो रोज बीस किमी के
हिसाब से 7300 किमी सड़क बननी थी
लेकिन सिर्फ 2248 किमी सड़क ही
बन सकी. यानि रोज के बीस किमी
के मुकाबले महज छह किमी सड़क
रोज.

इसी तरह साल 2012-13 की
पहली तिमाही यानि अप्रैल से
जून तक सरकार ने 1500 किमी सड़क
बनाने का लक्ष्य रखा था.
लेकिन सड़क बनी महज सौ किमी.
यानि रोज महज 1.1 किमी.

रोज
बीस किमी सड़क बनाने के अपने
वायदे को सरकार ने खुद कितनी
गंभीरता से लिया इसका उदाहरण
ये है कि नेशनल हाई वे
अथारिटी आफ इंडिया के प्रमुख
का पद करीब डेढ़ साल तक खाली
रहा. जनवरी 2011 में एनएचएआई के
प्रमुख का पद खाली हुआ था
जिसे इस साल जून में भरा गया.

सड़क
निर्माण से जुड़ी कंपनियों
का कहना है कि उनके कुल
मिलाकर 12 से 13 हजार करोड़
रुपये पिछले 12 सालों से सरकार
के पास अटके हुए हैं. इस कारण
पैसों की कमी के चलते विभिन्न
प्रोजेक्ट पूरे होने में देर
हो रही है. नेशनल हाई वे
बिल्डर संघ ने सिंगल विंडो
सिस्टम की मांग की है ताकि
पर्यावरण से लेकर अन्य
विभागों से मंजूरी एक साथ ली
जा सके.

बीस किमी रोज सड़क
बनाने का वायदा पूरा करने के
लिए अब सरकार ने हर साल अपनी
जेब से 15 से 20 हजार करोड़ रुपये
खर्च कर तीन से चार हजार किमी
सड़क बनाने की योजना बनाई है.
वैसे ऐसा होने पर भी लक्ष्य
का पचास फीसदी ही पूरा हो
सकेगा लेकिन सवाल ये है कि
क्या ये योजना भी पूरी हो
पाएगी क्योंकि हाईवे की
रफ्तार पर ब्रेक लगने की सारी
वजह अब तक मौजूद हैं.




फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest India News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story कुलभूषण जाधव मामला: भारत-पाकिस्तान को लिखित दलीलें जमा करने की समयसीमा तय