पीड़ित के दोस्त के दावों को पुलिस ने किया खारिज

By: | Last Updated: Tuesday, 8 January 2013 8:13 AM
पीड़ित के दोस्त के दावों को पुलिस ने किया खारिज

नई दिल्ली:
दिल्ली गैंगरेप पीड़ित के
दोस्त के दावों को दिल्ली
पुलिस ने खारिज कर दिया है.
दिल्ली पुलिस के स्टाफ और उस
रात पीड़ित लड़की के पास सबसे
पहले पहुंचने वाले राजकुमार
ने दावा किया है कि पीड़ित
लड़की और उसके दोस्त को
अस्पताल लेने जाने में किसी
प्रकार की देरी नहीं हुई.

याद रहे कि गैंगरेप पीड़ित के
दोस्त ने एक निजी टेलीविजन
चैनल पर दावा किया कि जब वह 16
दिसंबर की रात अपनी दोस्त के
साथ बेहोशी की हालत में पड़े
थे तो उसकी मदद के लिए कोई
नहीं आया.

पीड़ित के दोस्त का दावा है
कि पुलिस की वैन भी काफी देर
में उसके पास पहुंची और बहुत
देर तक यह बहस करती रह गई है यह
उसके थाना क्षेत्र में या
नहीं.

लेकिन दिल्ली पुलिस के
पेट्रोलिंग स्टाफ राजकुमार
के मुताबिक जब वह 16 दिसंबर की
रात 10.05 बजे महिपालपुर के करीब
एनएच-8 पर पेट्रोलिंग कर रहे
थे तो उन्होंने देखा कि
पीड़ित का दोस्त मदद की पुकार
लगा रहा था.

राजकुमार ने कहा कि पीड़ित के
दोस्त ने उस समय बताया, “उसके
और उसकी दोस्त के कीमती सामान
लूट लिए गए हैं और बस में सवार
लुटेरों ने उन्हें यहां फेंक
दिया है.”

राजकुमार के मुताबिक उस
वक़्त तक यह मामला चोरी का था.
उन्होंने अपने कंट्रोल रुम
(हाइवे ऑथोरिटी) को फोन किया
ताकि वह पुलिस कंट्रोल रुम को
फोन करे और मौके पर पीसीआर
भेजे.

राजकुमार के मुताबिक इसी बीच
सात-आठ मिनट में हाइवे
ऑथोरिटी पेट्रोलिंग के दो
स्टाफ अपनी बुलेरो गाड़ी के
साथ वहां पहुंच गए.

इसके बाद राजकुमार ने अपनी
कमीज़ पीड़ित के दोस्त को
पहनने के लिए दी. फिर वो
महिपालपुर फ्लाइओवर के
सामने एक होटल (होटल दिल्ली 37)
में गए और एक बेडशीट लाए, जिसे
लड़की को दिया. इसके साथ ही
पेट्रोलिंग स्टाफ जीत सिंह
ने अपना स्वेटर पीड़ित लड़की
को दिया.

राजकुमार का कहना है कि तब तक
वह नहीं जान पाए थे कि पीड़ित
लड़की बुरी तरह से जख्मी है
और उसके साथ गैंगरेप हुआ है.
वह लड़की से दूर थे क्योंकि
अंधेरा था और लड़की नंगी थी.
वह लड़की के करीब तभी गए जब
उन्होंने उसे ढकने के लिए
बेडशीट दिया.

राजकुमार के मुताबिक उसके 15
मिनट के बाद मौके पर पुलिस
वैन पहुंची.  हालांकि, लड़की
की खराब हालत को देखते हुए
इसी बीच पुलिस कंट्रोल रुम को
एक और कॉल की जा चुकी थी.

पेट्रोलिंग स्टाफ का कहना है
कि लड़की को अस्पताल लेने
जाने में थोड़ी भी देरी नहीं
हुई. हालांकि, उन्होंने
स्वीकार किया कि दूसरी वैन
पीड़ित लड़की को अस्पताल
लेकर गई, क्योंकि पहली पीसीआर
(साउथ-वेस्ट जिले) दूसरे जिले
की थी. महिपालपुर का इलाका
साउथ जिले में आता है. दूसरी
पीसीआर के पहुंचने के बाद सात
से आठ मिनट में पीड़ित को
अस्पताल पहुंचाया गया.

राजकुमार पीड़ित के दोस्त के
उसे दावे को खारिज करते हैं
कि उसने अकेले लड़की को गाड़ी
में रखा. स्टाफ के मुताबिक
उन्होंने लड़की को पीसीआर
वैन में रखा. बल्कि सच यह है कि
एक स्टाफ पीड़ित के दोस्त की
मदद की और उसे गाड़ी में
चढ़ाया.

पुलिस का दावा है कि अगर
पुलिस ने उन्हें कपड़े नहीं
दिए होते तो सफदरजंग अस्पताल
में उन्हें नंगा होना चाहिए
था?

पीड़ित के दोस्त ने आरोप
लगाया है कि किसी राहगीर ने
उसकी मदद नहीं की और उसे
अस्पताल लाने में देरी की गई.

ग़ौरतलब है कि एनएच-8 की
पेट्रोलिंग एक निजी कंपनी के
जरिए की जाती है. इसका
कॉन्ट्रैक्ट नेशनल हाइवे
ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के पास है.
इस मार्ग पर किसी तरह के
हादसे और दूसरी घटनाओं की
ज़िम्मेदारी इसकी होती है.

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Web Title: पीड़ित के दोस्त के दावों को पुलिस ने किया खारिज
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