पुलिस कस्टडी में फफक-फफक कर रो पड़े आसाराम

By: | Last Updated: Friday, 18 October 2013 8:37 AM
पुलिस कस्टडी में फफक-फफक कर रो पड़े आसाराम

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<b>अहमदाबाद: </b>आसाराम को कभी
हंसते, कभी दौड़ते, कभी कूदते,
कभी गालियां देते या फिर कभी
गुस्से में भड़कते हुए तो
लाखों लोगों ने देखा होगा,
लेकिन क्या कभी किसी ने
आसाराम को रोते हुए देखा है. न
तो ऐसा टीवी के पर्दे पर
पिछले कुछ वर्षों में देखा
गया, न ही कभी चालीस दिन पहले
तक के उनके सत्संगों में कभी
दिखा. लेकिन ये खास वाकया हुआ
इस गुरुवार की रात.
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अहमदाबाद पुलिस के अधिकारी
आसाराम से गुजरात एटीएस के
दफ्तर में पूछताछ कर रहे थे.
रात के ग्यारह बजे का वक्त था.
आसाराम से बलात्कार मामले
में पुलिस सुबह के ग्यारह बजे
से ही पूछताछ कर रही थी. बारह
घंटे तक पूछताछ और वो भी
पीड़ित युवती की मौजूदगी में,
जिसने लगाया है आसाराम पर
बलात्कार का आरोप.
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आसाराम के लिए ये सब कुछ इतना
भारी गुजरा कि वो फफक-फफक कर
रोने लगे. वहां मौजूद पुलिस
अधिकारी भी हक्के-बक्के रह
गये. आसाराम का ये रुप कभी
किसी ने देखा नहीं था.
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कहां तो सत्संग के अपने मंच
से दो महीने पहले तक आसाराम
जेम्स बौंड जैसे उछाल मारते
हुए कभी अट्टहास करते थे, तो
कभी किसी को भस्म कर देने की
धमकी देते थे और कहां आसाराम
यहां रोते नजर आ रहे थे.
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पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ
बंद कर दी और आसाराम को जाने
दिया एटीएस के ही दूसरी मंजिल
पर बने हवालात में, जहां चौदह
अक्टूबर की रात से ही उन्हें
रखा गया है.
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चौदह अक्टूबर को अहमदाबाद
पुलिस आसाराम को जोधपुर से
लेकर आई थी और अगले दिन उसने
गांधीनगर की अदालत से चार दिन
का रिमांड हासिल कर लिया. ऐसे
में आसाराम की चार रातें
गुजरात एंटी टेररिस्ट
स्क्वाड यानी एटीएस के लॉकअप
में ही गुजर चुकी हैं.
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<b>जब आसाराम की जुबान पर लग गए
ताले </b><br />
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दरअसल आसाराम के नर्वस
होने की शुरुआत कल सुबह ही हो
चुकी थी. जैसे ही पुलिस
अधिकारी आसाराम के सामने
पीड़ित युवती को लेकर आए,
आसाराम की भाव-भंगिमा बदल गई.
उनके हौसले पस्त होने लगे.
दूसरी तरफ पीड़ित युवती
आसाराम पर एक के बाद एक आरोप
लगाए जा रही थी, चिल्ला रही थी
और कहां आसाराम के गले से
आवाज भी जोर से नहीं निकल रही
थी.
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कुछ देर में हालात ऐसे बन गये
कि दोनों को एक-दूसरे को
देखना तक मंजूर नहीं हुआ. ऐसे
में पूछताछ के काम में लगे
पुलिस अधिकारियों को दोनों
को एक-दूसरे के सामने की जगह
उल्टी दिशा में बिठाना पड़ा.
दोनों के चेहरे एक-दूसरे से
अलग दिशा में थे, एक कमरे में
बैठे होने के बावजूद. इस अजीब
परिस्थिति के बावजूद पुलिस
आसाराम से कई सच उगलवाने में
कामयाब रही.
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आसाराम ने झख मारकर कबूल कर
लिया कि वो युवती को अच्छी
तरह से जानते थे और उन्होंने
उसे शांति वाटिका के नाम से
मशहूर अपने फार्म हाउस में
बुलाया था.
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आसाराम ने युवती के शरीर पर
हाथ फेरने की बात तो कबूल की,
लेकिन वो ये बात मानने को
बिल्कुल तैयार नहीं हुए कि
उन्होंने पीड़ित युवती के
साथ बलात्कार किया है. इस
दौरान पुलिस अधिकारियों को
आसाराम की एक और आदत का पता
चला.
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http://www.youtube.com/watch?v=PV0oZUO5Kbo<br />
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<b>पट्टो, मईं और गागु का मतलब</b><br />
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आसाराम को अपने सभी करीबी और
खास लोगों को असली नाम से
बुलाने की जगह उपनाम से
बुलाने की आदत है. इसका संकेत
एफआईआर में दर्ज कराये गये
पीड़ित युवती के बयान से
मिलता है. पीड़ित युवती ने
अपनी फरियाद में कहा है कि जब
आसाराम ने वर्ष 2001 में शांति
वाटिका में उसके साथ
बलात्कार किया, तो आसाराम की
बेटी भारती उसे वहां लेकर गई
थी. आसाराम ने तब कमरे के अंदर
से ही सिंधी भाषा में एक
वाक्य कहा – पट्टो इन्नन बे
खणिया. आसाराम के इस वाक्य का
मतलब था – पट्टो इन दोनों को
अंदर लेकर आ.
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सवाल ये उठता है कि पट्टो का
मतलब क्या. पीड़ित युवती ने
बताया कि पट्टो से आसाराम का
आशय अपनी बेटी भारती से ही था.
आसाराम ने पहले तो इससे इंकार
किया, लेकिन बाद में वो ये बात
कबूल करते नजर आए. पुलिस को
अभी तक की जांच में ये भी पता
चला है कि आसाराम अपनी पत्नी
लक्ष्मी के लिए मईं, तो बेटे
नारायण के लिए गागु नाम
कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल
करते हैं.
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इसी तरह अपनी दो खास
सेविकाओं निर्मला और मीरा को
भी वो ढेल और बंगलो के उपनाम
से पुकारते हैं.
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ढेल और बंगलो पर आरोप हैं कि
वो आसाराम के लिए लड़कियां
फांसने का काम करती थीं.
आसाराम की एक और खास आदत
पुलिस अधिकारियों ने नोट की.
आसाराम को जब भी किसी सवाल का
जवाब नहीं देना होता था, वो
हरि ओम-हरि ओम का जाप शुरू कर
देते थे या फिर उनके मुंह से
नारायण-नारायण शब्द फूटने
लगते थे. यही नहीं, आसाराम भले
ही तीसरी कक्षा तक पढ़े हैं,
लेकिन कानून और पुलिस के
तौर-तरीकों का ज्ञान है
उन्हें.
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पुलिस जब उनकी मर्दानगी का
टेस्ट कराने ले गई, तो कानूनी
प्रावधानों का जिक्र करते
हुए आसाराम ने उसके लिए अपनी
सहमति नहीं दी.
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आसाराम वैसे तो अपने
प्रवचनों में हिंदी भाषा का
ही अमूमन इस्तेमाल करते रहे
हैं, लेकिन पुलिस वालों ने जब
पूछताछ शुरु की, तो ज्यादातर
समय वो गुजराती में ही बात
करते नजर आए. हां, जब किसी सवाल
का जवाब देने में वो असहज
महसूस करते थे, तो फिर हिंदी
में योग और ध्यान की बातें
शुरू कर देते थे.
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अपने ऊपर लगे आरोपों से
आसाराम अभी तक हिले नहीं हैं.
आसाराम उलटे पुलिस
अधिकारियों को ये समझाते नजर
आए कि ये उनके खिलाफ ईसाई
मिशनरियों का षडयंत्र है या
फिर ये कि उनके खिलाफ दर्ज
तमाम केसों के पीछे कांग्रेस
है.
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आसाराम के मुताबिक, जब से
उन्होंने राहुल गांधी को
बबलू कहा और सोनिया गांधी को
देश छोड़कर चले जाने की सलाह
दी, उनके खिलाफ अभियान शुरु
हो गया है.
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<b>तरह तरह के बहाने बना रहे
हैं आसाराम</b><br />
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चार दिन से अहमदाबाद पुलिस की
पूछताछ का सामना कर रहे
आसाराम कभी अपनी उम्र का
हवाला देते हुए बलात्कार के
आरोप से इंकार करते हैं, तो
कभी उल्टे पीड़ित युवती पर ही
आरोप लगा देते हैं. आसाराम
कहते हैं कि चूंकि उन्होंने
पीड़ित युवती की चोरी पकड़ ली
थी और उसे अपने आश्रम से
निकाल दिया था, इसलिए बदला
लेने के लिए युवती ने उनके
खिलाफ बलात्कार का आरोप लगा
दिया है.
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जहां तक परिवार का सवाल है,
आसाराम को बाकी लोगों की
ज्यादा फिक्र नहीं दिखती.
उनकी बातचीत में शायद ही कभी
पत्नी लक्ष्मी, बेटी भारती या
फिर बेटे नारायण का जिक्र आता
है. वैसे भी इस बात की चर्चा
काफी समय से रही है कि आसाराम
के परिवार में एक-दूसरे के
प्रति ज्यादा प्रेम नहीं है,
स्वार्थ साधने के लिए ही वो
अपने आपसी रिश्ते निभाते हैं.
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आसाराम की पिछले कुछ दिनों
में दिखी एक आदत का रहस्य भी
अब पुलिस वालों की समझ में आ
गया है. जोधपुर से अहमदाबाद
की यात्रा के दौरान कई बार
आसाराम अपनी मूंछों पर ताव
देते नजर आए. ज्यादातर लोगों
की समझ में नहीं आ रहा था कि
बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों
से घिरे आसाराम मुंछों पर ताव
देकर क्यों बेशर्मी का परिचय
दे रहे हैं. लेकिन पुलिस को अब
आसाराम की पीड़ा समझ में आ गई
है. आसाराम को सज-संवर कर रहने
की आदत है. लेकिन एक सितंबर को
जब जोधपुर पुलिस ने नाबालिग
युवती के शारीरिक शोषण के
मामले में उनकी गिरफ्तारी की,
उसके बाद से ही वो या तो पुलिस
लॉकअप या फिर जेल की हवा खाते
रहे हैं. ऐसे में
संजना-संवरना तो दूर, समय
काटना मुश्किल हो गया है
आसाराम के लिए. कहां अपने
भक्तों के बीच भगवान बने
फिरते थे आसाराम और कहां जेल
की चाहरीदीवारी में कैद
आसाराम. ऐसे में उनकी दाढ़ी
से लेकर मूंछें तक बेतरतीब हो
गई हैं. मूंछे उनके मुंह में
घुसी चली जा रही थीं, इसी से
बचने के लिए आसाराम ने मूंछों
को ऊपर की तरफ उमेठना शुरु कर
दिया.
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आसाराम की ये मजबूरी
ज्यादातर लोगों को उनकी
बेशर्मी का नमूना नजर आती
रही. आसाराम की फटेहाली आगे
भी जारी रह सकती है. कहां अपने
आश्रम में फाइव स्टार ढंग से
रहने वाले आसाराम और कहां अब
हवालात में पतली सी दरी पर
सोने के लिए मजबूर आसाराम.
कहां दो महीने पहले तक आसपास
हजारों चेलों-चेलियों से
घिरे रहने वाले आसाराम और
कहां अब हमेशा पुलिस वालों का
पहरा. आसाराम के लिए ये
सिलसिला काफी लंबा चल सकता
है.
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<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
कल आसाराम के पुलिस रिमांड की
अवधि पूरी होने वाली है.
लेकिन अहमदाबाद पुलिस एक बार
फिर से उनका पुलिस रिमांड
मांगेगी. दरअसल पुलिस को अभी
तक की आसाराम से पूछताछ ही
नहीं, बल्कि पीड़ित युवती से
भी ऐसी ढेर सारी जानकारियां
और सबूत हासिल हुए हैं, जिससे
वो आसाराम के खिलाफ मजबूत
मामला बना सकती है.
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दूसरी तरफ आसाराम ने अपने
खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द
करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट
में जो याचिका दाखिल की है, उस
पर अब सुनवाई अब बाइस अक्टूबर
को होगी. जाहिर है, आसाराम के
लिए फिलहाल कही से भी राहत की
कोई गुंजाइश नहीं है. उन्हें
अपने बुरे कर्मों का नतीजा
भुगतना पड़ रहा है, उन कर्मों
का जिसके बारे में उनकी ही एक
समय शिष्या रही युवती ने
हवाला दिया है अपनी शिकायत
में. <br />
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Web Title: पुलिस कस्टडी में फफक-फफक कर रो पड़े आसाराम
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