प्रणब होंगे देश के नए राष्ट्रपति, संगमा को हराया

प्रणब होंगे देश के नए राष्ट्रपति, संगमा को हराया

By: | Updated: 21 Jul 2012 11:25 PM














नई दिल्ली:
यूपीए के उम्मीदवार प्रणब
मुखर्जी देश के अगले
राष्ट्रपति होंगे. उन्होंने
बहुत बड़े अंतर से एनडीए के
उम्मीदवार पी संगमा को हरा
दिया है.




उम्मीद के एन मुताबिक यूपीए
समर्थित राष्ट्रपति के
उम्मीदवार और पूर्व वित्त
मंत्री प्रणब मुखर्जी ने
रायसीमा हिल्स की दौड़ जीत ली
है.




राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे
पर बिखराव का सामना कर रही
एनडीए के उम्मीदवार पीए
संगमा को प्रणब ने भारी मतों
से हराया.




यूपीए के उम्मीदवार प्रणब
मुखर्जी को कुल मिलाकर 7,13,763
यानि  69 फीसदी वोट मिले.
बीजेपी के समर्थन वाले पी ए
संगमा को 315987 यानि 31 फीसदी वोट
मिले.





जीत के एलान के साथ ही दिल्ली
और बीरभूम में प्रणब के घरों
पर खुशी की धूम मच गई, प्रसंशक,
परिवार और पार्टी आपस में
मिट्ठाइयां बांटने का
सिलसिला शुरू हो गया.




वोट




पीएम-सोनिया ने दी
प्रणब को बधाई






राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब
मुखर्जी को सांसदों का
ज़बरदस्त समर्थन हासिल हुआ
है. राष्ट्रपति चुनाव में वोट
डालने वाले सत्तर फीसदी से
ज्यादा सांसदों ने प्रणब
मुखर्जी को वोट दिया है.
निरस्त कर दिए गए वोटों को
अलग कर दें, तो करीब बहत्तर
फीसदी सांसदों ने प्रणब
मुखर्जी को समर्थन दिया है.




सांसदों के वोटों की गिनती
पूरी होने के बाद जारी
आंकड़ों के मुताबिक
राष्ट्रपति चुनाव में कुल 748
सांसदों ने वोट दिए, जिनमें 15
सांसदों के वोट किसी ना किसी
कारण से निरस्त कर दिए गए.




निरस्त वोटों को हटाने के बाद
बचे कुल 733 वोटों में 527 वोट
प्रणब मुखर्जी को मिले. यानी
करीब बहत्तर फीसदी सांसदों
ने प्रणब मुखर्जी का समर्थन
किया है.




पीए संगमा को 733 में 206 सांसदों
ने वोट दिए यानी उन्हें करीब 28
फीसदी सांसदों का समर्थन
हासिल हुआ है.




सांसदों के खारिज किए गए
वोटों में समाजवादी पार्टी
के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव
का वोट भी शामिल है.




जब तक की वोटों की गिनती में
प्रणब को 5,58,195 मत मिले हैं,
जबकि संगमा को 2,39,865 मत मिले
हैं.




इससे पहले कुल 748 सांसदों की
वोटों की गिनती हुई जिसमें 15
के मत खारिज किए गए. प्रणब को 527
सांसदों के मत मिले हैं, वहीं
206 सांसदों के मत पीए संगमा के
हक में गए हैं.




उसी तरह राज्यों के वोटों की
गिनती में प्रणब को असम,
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल
प्रदेश, बिहार और हरियाणा में
जबरदस्त समर्थन मिला है.
फिलहाल विधायकों के मतों की
गिनती चल रही है.




राज्यवार ब्यूरा




प्रणब का कहना
है कि जीत की राह आसान है ये तो
पहले से मालूम था, लेकिन
उम्मीद से ज्यादा वोट
मिलेंगे. इस बात ने खुशी
दोहरी कर दी.




यूपीए के उम्मीदवार प्रणब
मुखर्जी को कुल मिलाकर 7,13,763
यानि  69 फीसदी वोट मिले.
बीजेपी के समर्थन वाले पी ए
संगमा को 315987 यानि 31 फीसदी वोट
मिले.




लेकिन देश भर के राज्यों से
मिले वोटों यानि विधानसभा और
विधान परिषद के विधायकों की
वोटों पर नजर डालें तो
राजनीति की कई दिलचस्प परतें
खुलती नजर आती हैं.




बीजेपी ने भले ही पी ए संगमा
को राष्ट्रपति की
उम्मीदवारी में समर्थन दिया
था, लेकिन बीजेपी के शासन
वाले राज्यों में संगमा
प्रणब को तगड़ी टक्कर देते
नहीं दिखे.




वोटों के मामले में झारखंड
में संगमा फेल हो गए, वहां
उन्हें सिर्फ पच्चीस फीसदी
वोट मिले और प्रणब को 75 फीसदी.
कर्नाटक में भी संगमा प्रणब
से पिछड़ गए, प्रणब को यहां 53
फीसदी और संगमा को 47 फीसदी वोट
मिले. खास बात ये है कि
कर्नाटक में बीजेपी की सरकार
है. बीजेपी के 17 विधायकों ने
प्रणब के पक्ष में क्रॉस
वोटिंग की.




गुजरात में संगमा जरूर प्रणब
को पछाड़ते दिखे, गुजरात में
प्रणब को सिर्फ 32 फीसदी वोट
मिले. जबकि संगमा को दुगने से
भी ज्यादा यानि करीब 68 फीसदी.
छत्तीसगढ़ में  संगमा को 56
फीसदी वोट मिले, तो प्रणब को 43
फीसदी.




आदिवासी कार्ड की बात कर
संगमा राष्ट्रपति चुनाव में
उतरे थे, लेकिन आदिवासी बहुल
राज्यों में उन्हें खुलकर
वोट नहीं मिला.




अपने गृह राज्य मेघालय में भी
सिर्फ 40 फीसदी वोट जुटा पाए
संगमा. कांग्रेस के शासन वाले
पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों
में प्रणब उनसे मीलों आगे
रहे. असम में प्रणब को 88 फीसदी
तो संगमा को महज 10 फीसदी वोट
मिले. अरुणाचल में प्रणब को 91
फीसदी तो संगमा को महज 3 फीसदी
वोट मिले. मणिपुर में प्रणब
को 98 फीसदी तो संगमा को सिर्फ
डेढ़ फीसदी वोट मिले. मिजोरम
में प्रणब को 82 फीसदी और संगमा
को 17 फीसदी वोट मिले.




गृह राज्य पश्चिम बंगाल में
प्रणब दा पर कांग्रेस के
अलावा लेफ्ट, तृणमूल ने भी
भरोसा जताया था. वहां उन्हें 98
फीसदी वोट जरूर मिले, लेकिन
वोटों के लिहाज से नगालैंड
में सबसे अव्वल रहे. उन्हें
वहां सौ फीसदी वोट मिले.




देश के लगभग आधे राज्यों में
राष्ट्रपति के तौर पर प्रणब
मुखर्जी में पूरा भरोसा
जताया. वोटों की बात करें तो
करीब चौदह राज्यों में प्रणब
को 80 फीसदी से ज्यादा वोट मिले
और कुल मिलाकर 22 राज्यों में 55
फीसदी से ज्यादा वोट प्रणव के
हिस्से में आए.




आखिर
कैसे होता है राष्ट्रपति का
चुनाव





तनातनी और जीत





19 जुलाई को सिर्फ 72 प्रतिशत
मतदान हुआ जो अपेक्षा से कम
है. निर्वाचन मंडल का कुल मत
मूल्य 10,98,882 हैं जिसमें से लगभग
आठ लाख मत पड़े.




आपको बता दें कि राष्ट्रपति
पद के निर्वाचक मंडल में संसद
के दोनों सदनों और
विधानसभाओं के सदस्य शामिल
होते हैं. संसद के मनोनीत
सदस्यों को मताधिकार नहीं
होता.




नतीजे के ऐलान के बाद देश के
मुख्य न्यायाधीश नए
राष्ट्रपति को 25 जुलाई को पद
की शपथ दिलाएंगे.




प्रणब: बीरभूम से
रायसीना हिल्स का सफर






बीते एक महीने में प्रणब की
उम्मीदवारी तय होने तक से
लेकर उनके चुनावी अभियान तक
कई सियासी उतार चढ़ाव देखने
को मिले.




प्रणब दा की उम्मीदवारी को
लेकर तृणमूल कांग्रेस
सुप्रीमो ममता बनर्जी ने
कांग्रेस से सीधा टकराव मोल
ले लिया.




मगर मजबूरी में ही सही, प्रणब
के समर्थन का उन्हें भी एलान
करना पड़ा. यहीं नहीं प्रणब
के बड़े राजनीतिक कद के आगे
तो एनडीए भी एकजुट नहीं रख
सका.




बीजेपी से अलग जेडीयू ने
प्रणब का समर्थन किया तो
कांग्रेस की कट्टर विरोधी
शिवसेना पर भी दादा का जादू
चल गया. यूपीए के सभी घटक दलों
के अलावा एसपी, बीएसपी,
आरजेडी, एलजेपी, सीपीएम और
फारवर्ड ब्लॉक ने दादा को
अपना वोट दिया.




शायद यही वजह है कि प्रणब की
जीत का एलान एक औपचारिकता
माना जा रहा था.




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