प्रमोशन में आरक्षण पर आज भी बात नहीं बन सकी

प्रमोशन में आरक्षण पर आज भी बात नहीं बन सकी

By: | Updated: 11 Dec 2012 05:21 AM


नई दिल्ली: समाजवादी
पार्टी के हंगामे के कारण
प्रमोशन में आरक्षण बिल पर
चर्चा नहीं हो पा रही है.
मायावती प्रमोशन में आरक्षण
का पुरजोर समर्थन कर रही हैं,
लेकिन मुलायम की पार्टी
पुरजोर विरोध कर रही है.




सरकार ने बिल पर चर्चा शुरू
करने की कोशिश की, लेकिन
हंगामे के कारण राज्यसभा
स्थगित होती रही.




मायावती इस बिल को किसी कीमत
पर लागू करवाना चाहती हैं,
लेकिन समाजवादी पार्टी के
हंगामे की वजह से इस बिल पर
चर्चा नहीं हो पा रही है. आज दो
बार इसी मुद्दे पर राज्यसभा
की कार्यवाही स्थगित करनी
पड़ी.




अभी तक की तस्वीर क्या है?




अभी तक जो तस्वीर बन रही है
उसके मुताबिक मायावती के साथ
साथ सरकार इस बिल के पक्ष में 
है, लेकिन समाजवादी पार्टी इस
बिल के सख्त खिलाफ है.




एनडीए में इस बिल पर एक राय
नहीं दिख रही है. बीजेपी का
रुख जहां साफ नहीं है वहीं
जेडीयू इस बिल के पक्ष में
दिख रही है. शिवसेना इस बिल के
खिलाफ है. अब सरकार की अहम
सहयोगी डीएमके भी इस बिल के
विरोध में आ गई है.




मायावती और समाजवादी पार्टी
अपने अपने वोटबैंक को देख रहे
हैं लेकिन बीजेपी का मामला
समझ से परे है. एक तरफ बीजेपी
खुद को दलितों का दोस्त बता
रही है तो दूसरी ओर इस बिल पर
अपना रुख साफ नहीं कर पा रही
है. मायावती बीजेपी को भी
कटघरे में खड़ा कर रही हैं.




कहां से शुरू हुआ विवाद?




असल में मायावती ने उत्तर
प्रदेश में अपनी सरकार के
कार्यकाल के दौरान प्रमोशन
में एससी-एसटी को आरक्षण का
फैसला लागू करवाया था, लेकिन
पहले हाईकोर्ट और फिर
सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज
कर दिया. अप्रैल 2012 में ही
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले
में कहा था कि प्रमोशन में
आरक्षण से पहले ये तय करना
होगा कि पिछड़ेपन, योग्यता और
उचित प्रतिनिधित्व के आधार
पर वाकई किसी को दिया जा रहा
आरक्षण ज़रूरी और संवैधानिक
तौर पर सही है.




इसी के बाद से मायावती लगातार
सरकार पर इस प्रावधान को पूरी
तरह से हटाते हुए संशोधन के
साथ बिल को फिर से पास कराने
का दबाव बना रही है.




क्या है प्रमोशन में आरक्षण?




आपको बता दें कि प्रमोशन में
रिजर्वेशन बिल के मुताबिक
दलितों और आदिवासियों को
सरकारी नौकरियों में
प्रमोशन में पांच फीसदी
आरक्षण का प्रावधान है. मतलब
ये कि अगर सौ कर्मचारियों का
प्रमोशन होना है तो उसमें से
पांच एससी एसटी के कर्मचारी
होंगे.




संशोधन बिल पास होने के बाद
छोटे से लेकर बड़े स्तर तक के
कर्मचारियों को इसका फायदा
मिलेगा.




इस बिल को 1995 से ही लागू किए
जाने का प्रावधान है. अगर यह
बिल पास हो जाता है तो दलितों
व आदिवासियों को प्रमोशन और
वरीयता नये कानून के मुताबिक
दी जाएगी. आगे से ऐसे आरक्षण
से पहले किसी आधार पर कोई
सफाई देने की ज़रूरत नहीं
होगी. एक और महत्वपूर्ण बात
ये कि ये कानून सभी राज्यों
को मानना होगा.




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