बकरा भी नहीं बचा पाया रेलमंत्री बंसल की कुर्सी

बकरा भी नहीं बचा पाया रेलमंत्री बंसल की कुर्सी

By: | Updated: 10 May 2013 11:24 AM


नई
दिल्ली:
बकरे की पूजा भी
नहीं बचा सकी पवन बंसल की
कुर्सी. दोपहर तीन बजे के
करीब  बला टालने के लिए
दिल्ली में बंसल के घर पर
बकरे की पूजा की गई थी.




दिल्ली के 6 अशोका रोड पवन
बंसल के घर में काली टीशर्ट
पहना एक शख्स बकरे को लेकर
दाखिल हुआ तो मीडिया सक्रिय
हो गया. ये बकरा घर का पाला हुआ
जानवर नहीं बल्कि एक टोटके के
लिए लाया गया था.




तस्वीरों में पवन बंसल बकरे
को कुछ खिलाते दिखे. इसके बाद
पवन बंसल ने बकरे के सिर पर
हाथ फेरा और वहां से हट गए.




इसके बाद दिखीं रेल मंत्री की
पत्नी मधु बंसल जिन्होंने
पवन बंसल की नजर उतारी और
बकरे को कुछ खिला दिया. इसके
बाद बंसल घर के भीतर दाखिल हो
गए.

साफ है कि कुर्सी जाने
के डर से पवन बंसल ने
अंधविश्वास का सहारा लिया
लेकिन बकरा भी बंसल को बचा
नहीं सका.

मीडिया से
बदसुलूकी


मीडिया में जब
पवन बंसल के घर टोटके की
तस्वीरें दिखाई गई तो बंसल के
घर के बाहर जमे पत्रकारों से
बंसल के बेटे ने बदसलूकी की.


पवन बंसल के बेटे मनीष
बंसल ने मीडिया के कैमरे पर
हाथ मारा. नाराजगी की वजह थी
टोटके की तस्वीरों को टीवी पर
दिखाना.

दोपहर तीन बजे के
करीब जब बंसल के घर पर कुर्सी
बचाने के लिए टोटका चल रहा था.
घर के बाहर मीडिया के कैमरे
सब कैद कर रहे थे इसी से पवन
बंसल के बेटे का पारा सांतवें
आसमान पर पहुंच गया और मीडिया
से बदसलूकी करने लगे.

आखिर
क्यों गई बसंल की कुर्सी


पवन
बंसल की कुर्सी चली गई. रेल
घूसकांड में बंसल पर गाज गिर
ही गई. अब बड़ा सवाल ये है कि
क्या सीबीआई बंसल से भी
पूछताछ करेगी?

तीन मई को
खुलासा हुआ था रेल घूसकांड
का. घूस लेकर प्रमोशन दिलाने
के आरोप में पवन बंसल के
भांजे विजय सिंगला को सीबीआई
ने गिरफ्तार कर लिया. घूस
देने वाले रेलवे बोर्ड के
मेंबर स्टाफ महेश कुमार भी
गिरफ्तार किए गए.

बाद में
गिरफ्तार होने वालों की
संख्या 10 जा पहुंची. सीबीआई
जांच में खुलासा हुआ कि रेलवे
बोर्ड में मेंबर
इलेक्ट्रिकल के पद पर
प्रमोशन दिलाने के लिए कुल 12
करोड़ रुपये की डील हुई थी.

सिंगला
के पास इसी की किश्त के 90 लाख
रुपये भी पहुंचाए गए. ये रकम
सीबीआई ने बरामद कर ली है. इस
घूसकांड की आंच पवन बंसल तक
भी आ पहुंची है.

सिंगला के
फोन टैपिंग में बंसल के नाम
का जिक्र भी आया है. ये भी पता
चला है कि बंसल के बेटे के
कारोबारी रिश्ते सिंगला से
हैं. यहीं नहीं अखबार मेल
टुडे का दावा है कि महेश
कुमार ने भी पवन बंसल से
मुलाकात की थी.

घूसकांड
का खुलासा होने के बाद से ही
पवन बंसल विपक्ष के निशाने पर
थे. आखिरकार भारी दवाब के
चलते बंसल को जाना ही पड़ा.
 
पवन
बंसल


पवन बंसल की गिनती
कांग्रेस के धुरंधर नेताओं
में की जाती है. पिछले साल
ममता बनर्जी की टीएमसी के
सरकार से हटने के बाद बंसल
रेल मंत्री बने थे. विदेशी
किराना के मुद्दे पर ममता
बनर्जी ने सरकार का साथ छोड़ा
तो रेल मंत्रालय भी तृणमूल के
कोटे से खाली हो गया.
प्रधानमंत्री ने खाली हुआ
रेल मंत्री का पद अपने
भरोसेमंद पवन बंसल को सौंपा.


बंसल
28 अक्टूबर 2012 को रेल मंत्री
बने थे. यूपीए टू में बंसल 28 मई
2009 से 28 अक्टूबर 2012 तक संसदीय
कार्यमंत्री रहे.

पवन
बंसल यूपीए 2 में जल संसाधन
मंत्री की जिम्मेदारी निभा
चुके हैं. यूपीए वन सरकार
बंसल संसदीय कार्य
राज्यमंत्री और वित्त
राज्यमंत्री थे. वे चंडीगढ़
से कांग्रेस सांसद हैं.

2004
और 2009 में बंसल ने चंडीगढ़ से
लोकसभा का चुनाव जीता था. पवन
बंसल पंजाब के तापा के रहने
वाले हैं, उन्होंने पंजाब
यूनिवर्सिटी से LLB की डिग्री
हासिल की हुई है.

पवन बंसल
पर वित्त राज्यमंत्री रहते
रिश्तेदारों की कंपनी को
फायदा पहुंचाने का आरोप भी लग
चुका है, लेकिन इस बार
घूसकांड में बंसल पर काफी
गंभीर आरोप लग रहे हैं.




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