बस में गैंगरेप: थरूर के बयान पर नई बहस शुरू

बस में गैंगरेप: थरूर के बयान पर नई बहस शुरू

By: | Updated: 01 Jan 2013 09:32 PM


नई
दिल्‍ली:
क्या दिल्ली
गैंगरेप पीड़ित की पहचान
नहीं छिपाई जानी चाहिए?

इस
सवाल पर नई बहस शुरू हो गई है
क्योंकि केंद्रीय मंत्री
शशि थरूर ने ट्वीट किया है कि
पीड़ित के परिवार की मर्जी हो
तो दिल्ली गैंगरेप पीड़ित
लड़की की पहचान बता दी जानी
चाहिए.

पिछले 15 दिनों से
इंसाफ की मांग को लेकर जनता
सड़क पर है. दिल्ली में
गैंगरेप की घटना और फिर
पीड़ित की मौत के बाद देश
गुस्से में है.

लोग नाम और
पहचान जानने की जरूरत भी नहीं
समझते क्योंकि मकसद उससे
बड़ा है. मकसद है
बलात्कारियों को सख्त सजा की
मांग.

लेकिन इस बीच
केंद्रीय मानव संसाधन राज्य
मंत्री शशि थरूर के एक ट्वीट
पर विवाद शुरू हो गया है. थरूर
ने ट्विटर पर लिखा है कि
परिवार की मर्जी से पीड़ित
लड़की का नाम बताया जाना
चाहिए.

थरूर ने ट्विटर पर
लिखा है, 'पता नहीं क्यों मौत
के बाद भी दिल्ली गैंगरेप
पीड़ित लड़की का नाम और उसकी
पहचान को छिपाया जा रहा है. आप
उसे उसके नाम से सम्मानित
क्यों नहीं करते. अगर लड़की
के माता-पिता को एतराज न हो
बलात्कार के खिलाफ बनने वाले
कड़े कानून का नाम उसके नाम
पर रखा जाना चाहिए.'

थरूर
के इस बयान ने नई बहस शुरू कर
दी है, जहां पूर्व आईपीएस
किरन बेदी थरूर के बयान के
समर्थन में हैं वहीं विपक्षी
दल बीजेपी और राष्ट्रीय
महिला आयोग ने थरूर के बयान
का विरोध किया है.

बीजेपी
ही नहीं थरूर की पार्टी
कांग्रेस भी थरूर के बयान से
पल्ला झाड़ रही है. कांग्रेस
प्रवक्‍ता राशिद अल्‍वी के
मुताबिक, 'यह शशि थरूर की निजी
राय है.'




वहीं, पीड़ित लड़की को
श्रद्धांजलि देने के लिए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री
के सामने कांग्रेस के ही
विधायक ने मांग रखी है.




मुंबई के विले पार्ले से
कांग्रेस विधायक कृष्णा
हेगडे ने महाराष्ट्र के
मुख्यमंत्री को चिट्ठी
लिखकर 'मिलन सबवे' फ्लाईओवर
का नाम गैंगरेप पीड़ित के नाम
पर करने की मांग की है.




विधायक कृष्ण हेगड़े ने कहा
है, 'मैं जल्द तैयार होने वाले
मिलन 'सब-वे फ्लाईओवर' का नाम
'निर्भय' रखने की सलाह देने
चाहता हूं. ये दिल्ली गैंगरेप
पीड़ित के लिए हमारी एक
श्रृद्धांजलि भी होगी.
'निर्भय' का अर्थ भी होता है
साहसी, जो हमारी आने वाली
पीढ़ी को भी प्रेरणा देगा.'

शशि
थरूर ने जो लिखा है उस पर
सहमति, असहमति या बहस हो सकती
है लेकिन जरूरी ये है कि आखिर
इस मामले पर कानून क्या कहता
है.

क्या कहता है आईपीसी
228-ए?

इस मामले में आईपीसी
की धारा 228-ए के मुताबिक अगर
पीड़ित और उसके परिवार की
सहमति के बिना कोई बलात्कार
पीड़ित की पहचान जाहिर करता
है तो उसे दो साल तक की सजा और
जुर्माना हो सकता है.

लेकिन
अगर पीड़ित जिंदा है और लिखित
में सहमति दे तो नाम और पहचान
बताई जा सकती है. दूसरी
स्थिति में अगर बलात्कार
पीड़ित की मौत हो चुकी है तो
परिवार की सहमति पर ही नाम और
पहचान बताई जा सकती है.

इसके
अलावा अगर पुलिस को जांच में
मदद के लिए नाम और पहचान
जाहिर करने की जरूरत पड़े तो
जांच अधिकारी की लिखित इजाजत
के बाद नाम और पहचान को
प्रकाशित किया जा सकता है.

हालांकि
इतिहास में ऐसे मामले में तो
पीड़ित के नाम पर पुरस्कार तक
का ऐलान किया गया है.

दरअसल,
1978 में संजय और गीता चोपड़ा
नाम के भाई-बहन का अपहरण हुआ
था. रंगा-बिल्ला नाम के
आरोपियों ने गीता चोपड़ा से
बलात्कार भी किया था और फिर
दोनों को मार डाला था.

साल
1982 में रंगा-बिल्ला को फांसी
हुई थी. इसके बाद बहादुरी के
लिए हर साल संजय चोपड़ा और
गीता चोपड़ा अवॉर्ड दिया
जाता है.

लेकिन दिल्ली
गैंगरेप मामले में ये याद
रखना होगा कि पीड़ित लड़की का
परिवार पहले भी साफ कर चुका
है कि उनकी निजता का सम्मान
होना चाहिए.




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