'बिखर गई टीम इंडिया' की 'सर्जरी' लाज़मी है!

'बिखर गई टीम इंडिया' की 'सर्जरी' लाज़मी है!

By: | Updated: 24 Feb 2012 08:45 AM


नई दिल्ली: टीम के सीनियर
खिलाड़ियों के बीच जो खेल चल
रहा है उससे क्रिकेट की
दुनिया में हलचल मची हुई है
और उसी का नतीजा है कि टीम
इंडिया टूट गई है, बिखर गई है
और जीतना भूल गई है.




ऐसे में अब वक्त आ गया है इस
बीमारी से छुटकारा पा लेना
चाहिए, तो क्या इसके लिए टीम
को सर्जरी की जरूरत है? लेकिन
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर
कौन करेगा टीम इंडिया की
सर्जरी?




जब कोई बीमारी लाइलाज हो जाती
है तो उसकी सर्जरी की जरूरत
पड़ती है और टीम इंडिया की
हालत भी इस समय कुछ ऐसी ही है.




धोनी और सहवाग की गुटबाजी में
भारतीय टीम भी पूरी तरह से
बीमार हो चुकी है. मैदान पर
टीम का प्रदर्शन बद से बदतर
होता जा रहा है लेकिन टीम के
खिलाड़ियों को एक दूसरे की
टांग खींचने से फुर्सत नहीं
है.




एक तरफ कप्तान का कुनबा है तो
दूसरी तरफ उप कप्तान की पलटन.
अब टूटी हुई टीम जीत का
जज़्बा लाए भी तो कहां से.
वेंटिलेटर पर जा चुकी है टीम.
वेंटिलेटर हटाना है तो
सर्जरी करनी होगी. सवाल है कि
ये सर्जरी करे कौन और कितने
चरणों में क्योंकि बीमारी
बिगड़ चुकी है और एक सर्जरी
से तो टीम की धड़कन सामान्य
होने से रही.




टकराव




टीम इंडिया में चल रही
गुटबाजी के सबसे बड़े किरदार
हैं कप्तान धोनी और उपकप्तान
वीरेंद्र सहवाग. इन दोनों की
वजह से ही भारतीय टीम बीमार
हो गई. बेजार हो गई और बिखर गई.
धोनी और सहवाग के बीच दरार की
खबर तब बाहर आई जब कप्तान
धोनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के
दौरान सीनियर खिलाड़ियों की
फिटनेस पर सवाल उठाते हुए
रोटेशन पॉलिसी का जिक्र किया.




कप्तान के इस बयान का जवाब
किसी और सीनियर खिलाड़ी ने तो
नहीं दिया लेकिन सहवाग ने
मीडिया के सामने धोनी की राय
पर अपना दिल खोलकर रख दिया.




ऐसा बताया जा रहा है कि धोनी
और सहवाग के बीच चल रही
गुटबाजी में सचिन तेंडुलकर
और गौतम गंभीर भी उतने ही
जिम्मेदार हैं जितने कि धोनी
और सहवाग. टीम के सीनियर
खिलाड़ी होने के नाते इन
दोनों की जिम्मेदारी टीम में
चल रहे झगड़े को खत्म करने की
थी, लेकिन कहा जा रहा है कि
गौतम गंभीर और सचिन तेंडुलकर
भी वीरेंद्र सहवाग का साथ
देकर टीम का माहौल खराब करने
में जुटे हुए हैं.




ये तो पूरी तरह से साफ हो चुका
है की टीम इंडिया की बीमारी
अब लाइलाज बन गई है और फौरन
इसकी सर्जरी न की गई तो खेल और
खराब होगा. लेकिन जिन्हें
इसका फैसला करना है वो मानने
को ही तैयार नहीं है कि टीम
इंडिया में कोई विवाद है.




बीसीसीआई अंतहीन होती जा रही
बर्बादियों के सिलसिले के
बाद भी सबक लेने को तैयार
नहीं है.




बोर्ड के कर्ताधर्ता भले
आलापें कि सब ठीक चल रहा है
लेकिन सच ये है कि सुर कहीं जा
रहा है ताल कहीं. और तालमेल का
तो नामोनिशान नहीं बचा है. और
खटपट के इस खेल के खिलाड़ियों
पर कार्रवाई का हंटर चलाने की
हिम्मत किसी को भी नहीं.




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