बीजेपी से गठबंधन की चर्चा के बीच पासवान को झटका, बोकारो स्टील प्लांट भर्ती घोटाले में सीबीआई कर सकती है पूछताछ

By: | Last Updated: Wednesday, 26 February 2014 3:03 AM

नई दिल्ली: क्या बीजेपी से नजदीकी बढ़ाने की कीमत रामविलास पासवान को सीबीआई जांच का सामना कर चुकानी पड़ेगी? पीटीआई के मुताबिक सीबीआई एलजेपी सुप्रीमो पासवान से जल्द पूछताछ कर सकती है.

 

बीजेपी से गठबंधन की अटकलों के बीच लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान के लिए बुरी खबर है. सीबीआई जल्द ही पूर्व इस्पात मंत्री पासवान से बोकारो स्टील प्लांट भर्ती घोटाला केस में पूछताछ कर सकती है. जनवरी महीने में सीबीआई ने दो अलग अलग केस दर्ज किये थे.

 

आरोप है कि साल 2008 में बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन में जूनियर और मिडिल लेवल में हुई भर्ती में घोटाला हुआ है. इस मामले में पूर्व एक्जक्यूटिव डायरेक्टर सहित कई बड़े अधिकारी नामजद आरोपी हैं.

 

घोटाले के आरोपियों में कई बड़े और हाईप्रोफाइल लोगों के करीबियों के नाम हैं. आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को इन लोगों ने प्रभावित किया और अपने करीबियों को नौकरी दिलवाई. 2004 से 2009 तक पासवान मनमोहन सिंह की सरकार में स्टील और रसायन मंत्री थे.

 

सूत्रों ने कहा कि आगामी आम चुनावों के लिए बिहार में सीटों के बंटवारे पर वार्ता कर रहे पासवान कुछ दस्तावेजों की बरामदगी के बाद जांच के घेरे में हैं. इन दस्तावेजों में संकेत मिलते हैं कि हो सकता है कि पासवान के कार्यालय से जुड़े लोग कुछ अ5यर्थियों को लाभ पहुंचाने में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं.

 

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘संबंधित मंत्री की मंजूरी के बगैर निचले स्तर के कर्मचारी इस तरह के कदम नहीं उठा सकते. हम इस संबंध में उनसे :पासवान: पूछताछ कर सकते हैं. पूछताछ को लेकर अंतिम फैसला जांच आगे बढने के बाद किया जा सकता है.’’

 

सूत्रों ने कहा कि कुछ सफल अ5यर्थियों द्वारा सौंपे गये दस्तावेजों में पासवान के आधिकारिक आवास 12 जनपथ की सील और बोकारो इस्पताल संयंत्र में जगह देने के लिए उनके नामों की सिफारिश करने वाले उनके स्टाफ के पत्र मौजूद हैं. पासवान मई 2004 से मई 2009 के बीच संप्रग सरकार के दौरान केन्द्रीय रसायन, उर्वरक और इस्पात मंत्री थे और इन नियुक्तियों में कथित घपला उनके कार्यकाल के दौरान हुआ.

 

सीबीआई ने जनवरी में वर्ष 2008 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में मध्यम और कनिष्ठ प्रबंधन स्तर पर नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से संबंधित दो अलग अलग मामले दर्ज किये थे जिसमें संयंत्र के एक पूर्व कार्यकारी निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था.