बुजुर्ग की आंख से निकले 8 कीड़े

बुजुर्ग की आंख से निकले 8 कीड़े

By: | Updated: 31 May 2014 04:42 AM

रायपुर: आपने आंखों में होने वाली तरह-तरह की बीमारियों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कभी सुना है कि आंख में लार्वा पैदा हो सकता है? शायद नहीं. लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी के एक निजी अस्पताल में एक ऐसे व्यक्ति की आंख का सफल ऑपरेशन किया गया, जिनकी आंख में पहले लार्वा बना, फिर अंडे बने और इन अंडों से पैदा कीड़े आंख को खा रहे थे.

 

आंख को पूरी तरह से खा चुके कीड़े ऑर्बिट तक पहुंच चुके थे. डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर परिजनों ने जांच न करवाई होती तो कीड़े मस्तिष्क तक पहुंच जाते और फिर मरीज की जान बचा पाना नामुमकिन हो जाता.

 

नेत्ररोग विशेषज्ञ और ऑपरेशन करने वाली टीम के सदस्य डॉ. चारुदत्त करमकर ने बताया, "जब बहार सिंह इलाज के लिए आए तो उनकी आंख को देखकर कुछ देर के लिए हम भी हैरान रह गए, क्योंकि आंख पूरी तरह सड़ चुकी थी. उसके बाद जांच हुई, एमआरआई करवाया गया तो पाया गया कि आंख में कीड़े हैं. बड़ी चुनौती थी. दो ऑपरेशन हुए, आज बहार सिंह ठीक हैं. अगर ऑपरेशन नहीं हुआ होता तो कीड़े मस्तिष्क में जरूर पहुंच जाते."

 

बेमेतरा इलाके के बेरा गांव में रहने वाले 80 साल के बहार सिंह साहू को बाईं आंख से बचपन से ही दिखाई नहीं देता था, लेकिन उन्हें इससे कोई तकलीफ नहीं थी. दो से तीन महीने पहले उन्हें इस आंख में तकलीफ शुरू हुई, लेकिन न तो उन्होंने ध्यान दिया और न ही उनके बेटा-बहू ने. धीरे-धीरे लार्वा से कीड़े निकले और आंख के अंदर व बाहर के हिस्सों को खाते गए.

 

बहार सिंह की बहू दुखवंतिन ने बताया कि उनके ससुर की आंख से खून भी बहता था. गांव में डॉक्टर को दिखाया तो कुछ आराम लगा, लेकिन यह उपचार सिर्फ दर्द कम करने वाला था. जब बहार सिंह के बेटा-बहू ने देखा कि आंख के बाहर का हिस्सा गल रहा है तो वे सप्ताहभर पहले उन्हें लेकर रायपुर पहुंचे और श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल, देवेंद्रनगर में जांच करवाई.

 

डॉक्टर मरीज को देखकर हैरान रह गए, क्योंकि यह अपने आप में अजीबो-गरीब और पहला मामला था. चार डॉक्टरों की टीम बनी और इस टीम ने दो राउंड में दो बड़ी सर्जरी की.

 

पहले राउंड में बहार सिंह की आंख से 6 कीड़े बाहर निकाले और दूसरे राउंड में बचे हुए 2 कीड़े. ऑपरेशन करने वाली टीम में शहर के चार नेत्ररोग विशेषज्ञ और सर्जन शामिल थे, जिनमें डॉ. विनय जायसवाल, डॉ. चारुदत्त करमकर, डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. सुनील मल. डॉक्टरों ने बताया कि पहले चरण का ऑपरेशन ढाई घंटे चला और दूसरे में भी लगभग इतना ही वक्त लगा.

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