बोफोर्स: सोनिया का नाम न आने पर RSS को हैरानी

बोफोर्स: सोनिया का नाम न आने पर RSS को हैरानी

By: | Updated: 28 Apr 2012 10:45 PM


नई
दिल्‍ली:
आरएसएस के मुखपत्र
ऑर्गनाइजर ने अपने संपादकीय
में बोफोर्स मामले में
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया
गांधी का नाम घसीटने की कोशिश
की है.

संपादकीय में लिखा
गया है कि इस मामले में अब तक
सोनिया गांधी का नाम नहीं आना
हैरानी की बात है, जबकि
ओट्टावियो क्वात्रोकी उनका
करीबी रहा है.

संपादकीय
में यह भी कहा गया है कि
गैर-कांग्रेसी सरकारों ने भी
बोफोर्स केस में सच को सामने
लाने की कोशिश नहीं की.

दिलचस्प
बात यह है कि संपादकीय ने इस
सिलसिले में वीपी सिंह की
सरकार का जिक्र तो किया है,
लेकिन एनडीए सरकार का नाम
नहीं लिया.

आरएसएस के
मुखपत्र 'ऑर्गनाइजर' के
संपादकीय में कांग्रेस
अध्यक्ष सोनिया गांधी पर
निशाना साधा गया है. पीटीआई
के मुताबिक बोफोर्स मामले पर
लिखे गए 'ऑर्गनाइज़र' के
संपादकीय में कहा गया है कि
पूरे मामले में सोनिया का नाम
नहीं आना हैरानी की बात है.

संपादकीय
में लिखा है, 'बोफोर्स के
मुद्दे पर आजकल हो रही
चर्चाओं में एक हैरान करने
वाली बात यह है कि क्वात्रोकी
को गांधी परिवार में लाने
वाली सोनिया गांधी के नाम का
जरा भी जिक्र नहीं हो रहा. ये
तो बिलकुल वैसा ही है जैसे जे
के रॉलिंग की हैरी पॉटर सीरीज
का एक पात्र. ऐसा लगता है कि
वही हैं, जिनका नाम लेना मना
है.'

'ऑर्गनाइजर' के
संपादकीय में यह भी कहा गया
है कि बोफोर्स मामले में
सोनिया के पति राजीव गांधी का
नाम लिया जाता है, यहां तक कि
अरुण नेहरू का नाम भी इसमें
घसीटा जाता है, लेकिन सोनिया
गांधी का नाम नहीं आता.

इस
संपादकीय में आरोप लगाया गया
है कि बोफोर्स मामले का
खुलासा होने के बाद सत्ता में
कई गैर-कांग्रेसी सरकारें भी
आईं, लेकिन उन्होंने बोफोर्स
केस की सच्चाई को सामने लाने
की ज्यादा कोशिश नहीं की.

संपादकीय
में लिखा गया है, 'एक के बाद एक
सत्ता में आईं तमाम सरकारों
को पता था कि दोषी कौन है,
लेकिन उन्होंने जानबूझकर
अपनी नजरें दूसरी तरफ घुमा
लीं.'

ऑर्गनाइजर ने इस
सिलसिले में गैर-कांग्रेसी
सरकारों को भी कटघरे में खड़ा
किया है. आरएसएस के मुखपत्र
में लिखा गया है,'कई
गैर-कांग्रेसी सरकारें भी
सत्ता में आईं. इनमें वीपी
सिंह की वो सरकार भी शामिल थी,
जिसने सत्ता में आने के 100 दिन
के भीतर दोषियों के खिलाफ
कार्रवाई का वादा किया था,
लेकिन कोई खास कदम नहीं उठाया
गया.'

दिलचस्प बात यह है कि
गैर-कांग्रेसी सरकारों का
जिक्र करते समय 'ऑर्गनाइजर'
के संपादकीय में 11 महीने तक
सत्ता में रही वीपी सिंह की
सरकार का नाम तो ले लिया गया,
लेकिन छह साल तक देश की कमान
संभालने वाली एनडीए सरकार का
इसमें कोई जिक्र नहीं है.




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