ब्लॉग: आंदोलन से व्यवस्था परिवर्तन या पीएम बनने का सपना!

By: | Last Updated: Tuesday, 21 January 2014 9:26 AM

नई दिल्ली: जिस दिल्ली पुलिस के खिलाफ अरविंद केजरीवाल धरना दे रहे हैं उसी दिल्ली पुलिस से ये भी कह रहे हैं कि आप लोग 4-5 दिनों की छुट्टियां ले लीजिए और धरने में शामिल हो जाइए. साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखते हैं कि धरने में आम आदमी ना आए, धरने में केवल पार्टी के विधायक होंगे. लेकिन जनता को साथ लेकर धरना दे रहे केजरीवाल ने दिल्ली के पुलिस जवानों से धरने में शामिल होने के लिए यहां तक कह दिया कि अगर पुलिस कमीश्नर उन्हें कुछ कहेगा तो वो उसे भी देख लेंगे.

 

क्या आपको नहीं लगता कि ये अरविंद केजरीवाल का दोहरा चरित्र है?

 

क्या यह अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक गुंडागर्दी नहीं है? क्या दिल्ली पुलिस और अरविंद केजरीवाल के बीच गतिरोध इतना ज्यादा हो गया था कि बिना धरने के काम नहीं हो सकता था. केजरीवाल ने 4 पुलिस वालों को सस्पेंड करने की मांग के बाद उनके ट्रांसफर के मांग पर समझौता क्यों कर लिया? और यदि उन 4 पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया जाए या ट्रांसफर कर दिया जाए तो क्या केजरीवाल इस बात की गारंटी लेंगे कि उसके बाद दिल्ली पुलिस में इस तरह की हरकत नहीं करेगी? उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे अनेक राज्यों में आए दिनों पुलिस महकमें में तबादले होते रहते हैं फिर भी हत्या और बलात्कार जैसे मामलों में कभी कोई कमी आई हो ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है.

 

आखिर केजरीवाल धरने पर क्यों अड़े हैं ? सवाल को समझने के लिए हम थोड़ा पीछे चलते हैं. दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती पुलिस को बिना बताए तलाशी करने पहुंच जाते हैं. वहां जाकर पुलिस से कहते हैं कि आप इस घर में रेड करे, छापा मारे, यहां वेश्यावृत्ति हो रही है. यहां नशाखोरी हो रही है. दिल्ली के कानून मंत्री शायद यह नहीं जानते की कानून के अनुसार पुलिस रात में किसी महिला की तलाशी नहीं ले सकती है और ना ही उसे गिरफ्तार कर सकती है. और जब उसके साथ महिला कांस्टेबल ना हो तबतक तो बिल्कुल भी नहीं.

 

इसी बात को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री धरना दे रहे हैं. क्योंकि अरविंद केजरीवाल मान चुके हैं कि वो पुलिस वाला गलत है जिसने उनके मंत्री की बात नहीं मानी. जबकि गृहमंत्रालय इस पूरे मामले की अभी भी जांच कर रहा है.

 

यदि दिल्ली के कानून मंत्री सच में समाज में व्याप्त वेश्यावृत्ति को खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें तुरंत दिल्ली के जीबी रोड में छापा डलवाना चाहिए. वहां पुलिस के साथ जाना चाहिए. वहां सैकड़ो लड़कियां होंगी जिनको उनकी इच्छा के विरूद्ध देश के विभिन्न हिस्सों से लाकर उनसे वेश्यावृत्ति कराई जाती है. यदि वो नशाखोरी से दिल्ली को मुक्त कराना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली के फ्लाइओवरों, सब-वे और रेलवे स्टेशनों पर जाकर छापा मारना चाहिए. वहां उन्हें ऐसे तमाम केस मिल जाएंगे. लेकिन वहां ना जाकर वो दक्षिण अफ्रीकी देशों से आई महिलाओं पर वेश्यावृत्ति और नशाखोरी का आरोप लगा रहे हैं.

 

राजनीति में विरोध और समर्थन होते रहते हैं. जरूरी नहीं है कि केजरीवाल की हर गतिविधि का हर कोई समर्थ ही करे बीजेपी ने केजरीवाल के धरने को नौटंकी बताया तो  दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने बीजेपी के नेताओं पर थूकने की बात कह दी.  राजनीति में नैतिकता की बात करने वाली आम आदमी पार्टी का क्या यही शिष्टाचार है?

 

अरविंद  केजरीवाल के धरने के पीछे आखिर क्या वजह है ?

 

आम आदमी पार्टी के विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने जिस तरीके से पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला उसका पार्टी के पास कोई जवाब नहीं था. हो सकता है कि जनता का ध्यान इस मुद्दे से हटाने के लिए आम आदमी पार्टी ऐसा कर रही हो. क्योंकि बिन्नी प्रकरण के बाद आम आदमी पार्टी की साख को नुकसान हुआ था. बिन्नी पार्टी के उन सदस्यों में से थे जो शुरुआत से पार्टी से जुड़े थे और बिन्नी ने सीधे अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला था.

 

जिस तरह से केजरीवाल का जनता दरबार का आइडिया फ्लॉप रहा और उसके बाद जनता दरबार के मुद्दे पर मीडिया ने जिस तरह से घेरा, हो सकता है कि इस मुद्दे से जनता का ध्यान हटाने के लिए आम आदमी पार्टी ने ये कदम उठाया हो ?

 

चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा था की वो गाड़ी-बंगला नहीं लेंगे, लेकिन जब मुख्यमंत्री 10 कमरों वाला डुप्लेक्स लेने को तैयार हो गए तो मीडिया ने जमकर खींचाई की थी जिसके बाद उन्होंने छोटा मकान लेने की बात कही. इस मुद्दे पर भी केजरीवाल को मीडिया ने जमकर घेरा था. हो सकता है कि आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया हो.

 

दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों एक बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली में एफडीआई पर प्रतिबंध लगा दिया था. जिसके बाद हाल ही में पार्टी में शामिल हुए कैप्टन गोपीनाथ ने भी इस कदम को गलत बताया था. हो सकता है वो देश का ध्यान इस मुद्दे से हटाना चाहते हों ?

 

4 महीने बाद देश में लोकसभा चुनाव होने हैं. आम आदमी पार्टी ने 15 से 20 राज्यों में लड़ने की बात की है. पार्टी का कोई मजबूत क्षेत्रिय संगठन नहीं है. हो सकता है पार्टी आंदोलन की आग को चुनाव तक जिंदा रखना चाहती हो. क्यों कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार बनाने में अन्ना के आंदोलन की एक बड़ी भूमिका रही है. और इस विषय पर तो आईबी ने भी गृहमंत्रालय को अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनावों के लिए देश में आंदोलन का माहौल तैयार करेगी. तो कहीं आम आदमी पार्टी का यह कदम केवल चुनावी एजेंडा तो नहीं है.

 

क्षेत्रिय संगठन ना होने से पार्टी आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगी इसलिए आंदोलन की वजह से उन्हें मीडिया हाइप मिल जाएगा और वो आसानी से देश के कोने कोने में पहुंच जाएंगे और इसका उन्हें सीधे लाभ मिल सकता है. क्योंकि पार्टी एक ऐसे मुद्दे पर आंदोलन कर रही है जिससे कहीं ना कहीं पूरे देश की जनता परेशान है. और गणतंत्र दिवस पास में है ऐसे में जनता की भावनाओं का लाभ लिया जा सकता है.

 

या फिर ये हो सकता है कि आम आदमी पार्टी वास्तव में भारत को वेश्यावृत्ति और नशाखोरी मुक्त बनाना चाहती हो. जनता को पुलिस के उत्पीड़न से मुक्त कराना चाहती हो. इसलिए आंदोलन कर रही हो?

 

लेकिन एक बाद तो साफ है कि इस बार के केजरीवाल के आंदोलन की वजह चाहे जो भी हो लेकिन जिस तरह की भाषा का प्रयोग अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री कर रहे हैं वो निश्चित रूप से आपत्तिजनक है.

 

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