भारत में प्रधानमंत्री निर्वाचित होते हैं या नामित?

By: | Last Updated: Friday, 28 February 2014 4:21 AM

नई दिल्ली: दस साल पहले 10 मई, 2004 को भारतीय संसद के सेंट्रल हॉल में कई तरह के राजनीतिक नाटक देखे गए थे. कांग्रेस के 200 नेता बिल्कुल निराश, अनाथ महसूस कर रहे थे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके त्याग पर पुनर्विचार की भीख मांग रहे थे.

 

एक राजनीतिक पार्टी के इतिहास में 10 साल बहुत बड़ा समय होता है. इन सालों में यादें क्षीण पड़ गई हैं, लेकिन इसे याद किए जाने की जरूरत है.

 

उस दौरान पार्टी नेता मणिशंकर अय्यर ने रोते हुए कहा कि मतदाताओं ने सोनिया की वजह से पार्टी को मत दिया है. उन्होंने पूछा, “हम यह कहते आ रहे हैं कि हमारे लिए वोट का मतलब सोनिया को वोट है. भारत के लोगों की अंतरात्मा की आवाज है कि आपको प्रधानमंत्री बनना चाहिए. हम आपके बिना आगे नहीं बढ़ सकते.”

 

पार्टी प्रवक्ता और उस दौरान नवनिर्वाचित सांसद कपिल सिब्बल ने सोनिया से कहा, “हमें आपके अलावा किसी में भरोसा नहीं है.” सोनिया हालांकि दृढ़ रहीं और कहा, “मैंने मेरे फैसले पर आपकी राय, दर्द और तकलीफें सुनीं. मुझे पता है मैं आपके लिए मुश्किलें बढ़ा रही हूं, लेकिन मुझे लगता है कि आप लोगों को मुझ पर भरोसा करना चाहिए, और फैसला लेने की इजाजत देनी चाहिए.”

अय्यर ने कहा, “आप भारत की जनता को धोखा नहीं दे सकतीं. भारत के लोगों की अंतरात्मा कहती है कि आपको प्रधानमंत्री बनना चाहिए.”सिब्बल ने कहा, “जब तक आप उस पद पर नहीं रहेंगी, हमें वहां से प्रेरणा नहीं मिलेगी.”

 

सोनिया के साथ मान-मनौव्वल के बीच कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) के संविधान को संशोधित किया गया. सीपीपी के नेता से अधिक शक्तिशाली अध्यक्ष का पद बनाया गया.

 

सोनिया इस पद पर आसीन हुई और सीपीपी के अध्यक्ष के नामांकन के अनुसार मनमोहन सिह को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए चुना गया. विस्तृत जानकारी के लिए राशिद किदवई की पुस्तक ‘सोनिया: ए बायोग्राफी’ पढ़ी जा सकती है.

 

सीपीपी के संविधान की धारा ‘पांच’ में संशोधन किया गया और इसमें उप धारा ‘सी’ को जोड़ा गया. इस संशोधन के अनुसार, “अगर जरूरत पड़े तो सीपीपी के अध्यक्ष के पास यह अधिकार होगा कि वह प्रधानमंत्री पद के लिए सीपीपी के नेता का चुनाव करेगा.”

 

इसके तहत ही सोनिया ने मनमोहन सिंह का नाम सीपीपी नेता के रूप में चुना, और उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता तैयार किया.

 

सीपीपी के संविधान संशोधन को दस साल बीत गए हैं. क्या यह कांग्रेस उपाध्यक्ष की कमजोर स्मृति या उनके होमवर्क न किए जाने का दोष है जिस वजह से उन्होंने एआईसीसी की बैठक और एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार में कहा कि सांसद प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं या मई 2004 से पहले की स्थिति को बरकरार रखने के लिए सीपीपी के संविधान का दोबारा संशोधन किया गया है.

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