भूटान अच्छा पड़ोसी है, ये पैगाम देकर मोदी भारत के लिए हुए रवाना

By: | Last Updated: Monday, 16 June 2014 8:50 AM
भूटान अच्छा पड़ोसी है, ये पैगाम देकर मोदी भारत के लिए हुए रवाना

थिम्पू: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थिम्पू से दोपहर साढ़े बारह बजे रवाना हो गये. उनका आखिरी कार्यक्रम थिम्पू के ताशीचेजौंग में था. वहां पर उनके सम्मान में न सिर्फ महाराजा की तरफ से भोज दिया गया, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किये गये.

 

इस दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे भी मौजूद थे. जौंग से रवाना होने के ठीक पहले भूटान के महाराजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और उनके पिता जिग्मे सिये वांगचुक के साथ औपचारिक तौर पर फोटो भी मोदी ने खिचाई.

 

यात्रा का पूरा हाल

 

“खुशी के लिए अच्छे पड़ोसी होना जरुरी है और भूटान हमारा अच्छा पड़ोसी है. सब कुछ होने के बावजूद कई बार पड़ोसी दुखी कर देता है.”

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये बयान रविवार शाम उस समय आया, जब वो भूटान के प्रधानमंत्री की तरफ से उनके सम्मान में दिये गये रात्रि भोज के मौके पर बोल रहे थे. बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्रा पर भूटान पहुंचे नरेंद्र मोदी ने भारत-भूटान संबंधों के सिलसिले में ये बात कही और कहीं न कहीं इशारे में पाकिस्तान और चीन पर चोट भी की. मोदी ने बार बार ये जोर देकर कहा कि भारत आर्थिक और शैक्षणिक दोनों मोर्चे पर भूटान के साथ अपने संबंध और सुदृढ़ करना चाहता है.

 

मोदी की भूटान यात्रा रविवार की सुबह ग्यारह बजकर दस मिनट पर शुरु हुई, जब भारतीय वायुसेना के विशेष विमान राजदूत से वो पारो हवाई अड्डे पहुंचे, जो भूटान का एक मात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड़्डा है. बतौर प्रधानमंत्री मोदी की पहली विदेश यात्रा में उनके साथ आईं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मोदी के साथ मौजूद थे.

 

विमान से मोदी के उतरने के बाद हवाई अड्डे पर ही भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे और उनके साथी मंत्रियों ने स्वागत किया. दो भूटानी बच्चों ने भी मोदी को गुलदस्ता दिया. इसके बाद मोदी को औपचारिक तौर पर शाही भूटान सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया. इसके बाद मोदी का काफिला रवाना हुआ राजधानी थिम्पू के लिए जो पारो से करीब पचपन किलोमीटर की दूरी पर है.

 

रास्ते का नजारा अदभुत था. पारो से थिम्पू वाली सड़क के दोनों तरफ तैनात थे स्कूली छात्र और छात्राएं, साथ में भूटान के आम नागरिक और युवा भी. शायद ही रास्ते का कोई हिस्सा ऐसा हो, जिसमें हर दो किलोमीटर पर हाथ में भारत और भूटान के झंडे लिये हुए स्कूली छात्र खड़े न हों. मोदी के स्वागत में न सिर्फ ये झंडे हिला रहे थे, बल्कि वंदे मातरम भी गा रहे थे. बीच-बीच में बड़े-बड़े तोरणद्वार भी खड़े किये गये थे, जिसमें संदेश के तौर पर उम्मीद ये जाहिर की गई थी कि मोदी की भूटान यात्रा से भारत और भूटान के संबंध और मजबूत हों.

 

राजधानी थिम्पू के करीब पहुंचते-पहुंचते सड़क किनारे खड़े लोगों की तादाद बढ़ती चली गई. थिम्पू शहर में तो छात्रों और युवाओं के अलावा शहरी लोग भी बड़े पैमाने पर सड़क के किनारे खड़े हाथ हिलाते नजर आए. अभी तक टीवी के पर्दे पर देखते आए मोदी को अपनी आंखों के सामने देखने का मौका था और ऐसे में ज्यादातर लोग सड़कों के किनारे खड़े हो गये थे. भूटान के सरकारी अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक पारो से थिम्पू के रास्ते पर करीब सात हजार स्कूली छात्र खड़े थे यानी भूटान की करीब सात लाख की आबादी का एक फीसदी आज पचपन किलोमीटर लंबे मार्ग पर खड़ा था मोदी के स्वागत के लिए. युवाओं और छात्रों के अलावा सड़क पर हजारों की तादाद में सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे. मोदी की सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसलिए पूरे रास्ते को दो दिन पहले ही खंगाल दिया गया था.

 

थिम्पू पहुंचने के बाद मोदी ने रुख किया होटल ताज ताशी का, जहां वो अपनी दो दिन की भूटान यात्रा के दौरान रुकने वाले हैं. तरोताजा होने के बाद करीब तीन बजे मोदी ने रुख किया ताशीचेजौंग का. ताशीचेजौंग थिम्पू की वो अति महत्वपूर्ण इमारत है, जिसमें भूटान के राष्ट्र प्रमुख और महाराजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का अपना कार्यालय तो है ही, साथ में गृह और वित्त मंत्रालय का दफ्तर भी है. इसे आम बातचीत में जौंग के तौर पर भी जाना जाता है. भूटान के जिला मुख्यालयों में भी मुख्य प्रशासनिक इमारत जौंग के तौर पर ही जानी जाती है.

 

नरेंद्र मोदी का पारंपरिक तौर पर जौंग के अंदर स्वागत किया गया. इसके तहत भूटान के पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाये गये और जुलूस की शक्ल में मोदी को अंदर लेकर आया गया. इस दौरान नाचते- गाते लोक कलाकार अपनी कला का प्रर्दशन कर रहे थे. पारंपरिक स्वागत के साथ ही शाही भूटान सेना, भूटान पुलिस और महाराजा के सुरक्षाकर्मियों की तरफ से संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर भी मोदी को दिया गया.

 

इस पारंपरिक और औपचारिक स्वागत के बाद भूटान के महाराजा के साथ मोदी की करीब घंटे भर तक बातचीत हुई. भारत और भूटान के आपसी संबंधों को और मजबूत करने को लेकर ये  बातचीत हुई. भूटान रवाना होने से ठीक पहले बयान जारी कर मोदी ने इस बात के संकेत आज सुबह ही दे दिये थे. बातचीत के बाद खुद महाराजा नरेंद्र मोदी के साथ बाहर आए. इसके बाद परिसर में ही एक इमारत की दीवार पल लगी एक विशाल और ऐतिहासिक पेंटिंग के आगे खड़े होकर दोनों ने फोटो खिंचाई. बाद में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भूटान की महारानी जेस्टन पेमा वांगचुक भी इस फोटो सेशन में शामिल हुईं.

 

महाराजा से मिलने के बाद मोदी ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे के साथ उनके कार्यालय जाकर औपचारिक बातचीत की. टोबगे ने मोदी की यात्रा से पहले ही कह दिया था कि उनकी सरकार इस बात से काफी खुश है कि मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भूटान को चुना.

 

बी2बी करार

 

शेरिंग टोबगे से मुलाकात के दौरान मोदी ने भारत-भूटान संबंधों को बी2बी करार दिया, मतलब भारत से भूटान. मोदी ने भूटान की सरकार और जनता को भी भव्य स्वागत के लिए धन्यवाद दिया. मोदी ने कहा कि भूटान में हुआ उनका भव्य स्वागत इस बात का प्रतीक है कि दोनों देशों के आपसी संबंध कितने गर्मजोशी से भरे हैं. मोदी ने इस मौके पर भूटान के उन छात्रों के लिए कुल मिलाकर दो करोड़ रुपये की छात्रवृति देने की घोषणा की, जो भारत में पढ़ते हैं. यही नहीं, मोदी ने भूटान में डिजिटल लाइब्रेरी बनाए जाने में भारत सरकार की मदद का वादा भी किया, जिसके जरिये करीब बीस लाख किताबें और पत्रिकाएं भूटान के युवाओं और छात्रों को ऑनलाइन हासिल होंगी. 

 

शेरिंग से मुलाकात के बाद मोदी भूटान के सुप्रीम कोर्ट की नई बनी इमारत का उदघाटन करने गये. यहां सुप्रीम कोर्ट की पूरी बेंच ने मोदी का स्वागत किया और मुख्य न्यायाधीश की तरफ से स्वागत भाषण पढ़ा गया. भेंट के तौर पर मोदी को शिव और बुद्ध की प्रतिमा भी भेंट की गई. भूटान की सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के अलावा चार साथी जज होते हैं. सुप्रीम कोर्ट की इस इमारत का निर्माण भारत-भूटान मैत्री परियोजना के तहत ही किया गया है और भारत की तरफ से इसके लिए सत्तर करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई गई है. चीफ जस्टिस ने अपने भाषण में इसकी चर्चा करते हुए कहा कि भारत और भूटान के संबंध कितने प्रगाढ़ हैं, इसका उदाहरण ये नव निर्मित इमारत है.

 

भूटान के प्रधानमंत्री की तरफ से औपचारिक रात्रिभोज भी दिया गया. ये समारोह थिम्पू के उस कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जहां अमूमन सार्क देशों की बैठकें होती हैं. मोदी के दौरे के पहले दिन की समाप्ति के बाद अब निगाहें मोदी के उस भाषण पर हैं, जो भूटान की संसद में वो आज सुबह (सोमवार को) देने वाले हैं. मोदी भूटान की एसेंबली और नेशनल कौंसिल के सदस्यों को साझा तौर पर संबोधित करेंगे. इस भाषण के दौरान मोदी भारत-भूटान संबंधों पर अपना नजरिया विस्तार से बता सकते हैं.

 

हालांकि खास बात ये होगी कि मोदी के भाषण के दौरान सदन में मोजूद कोई भी व्यक्ति ताली नहीं बजा सकेगा. इसके लिए खास तौर पर निर्देश जारी किया गया है. इसका कारण और कुछ नहीं, बल्कि भूटान की एक बड़ी पुरानी धार्मिक मान्यता है. इस मान्यता के मुताबिक ताली सिर्फ दुष्ट आत्माओं को भगाने के लिए बजाई जाती है.

 

मोदी अपने दौरे के दूसरे दिन 600 मेगावाट की एक पनबिजली परियोजना का भी शिलान्यास करने वाले हैं, जिसे दोनों देश साझा तौर पर विकसित कर रहे हैं. दोपहर में भूटान के राजा की तरफ से मोदी के सम्मान में भोज दिया जाएगा. इन कार्यक्रमों के बाद मोदी दोपहर बाद करीब दो बजे स्वदेश के लिए रवाना हो जाएंगे.

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