'मंगल'कामना: ऐतिहासिक अभियान के लिए सफलतापूर्वक रवाना हुआ मंगलयान

By: | Last Updated: Monday, 4 November 2013 9:09 PM
‘मंगल’कामना: ऐतिहासिक अभियान के लिए सफलतापूर्वक रवाना हुआ मंगलयान

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<b></b>
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<b>श्रीहरिकोटा: </b>भारतीय
अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
(इसरो) के अध्यक्ष
के.राधाकृष्णन ने मंगलवार को
कहा कि देश के प्रथम मंगलयान
को ले जा रहे प्रक्षेपण यान
को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित
किया गया.
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राधाकृष्णन ने कहा, “मैं यह
घोषणा करते हुए बहुत प्रसन्न
हूं कि पीएसएलवी-सी25 ने
मंगलयान को पृथ्वी के चारों
ओर अंडाकार कक्षा में
सफलतापूर्वक पहुंचा दिया है.”
</p>
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उन्होंने कहा कि पीएसएलवी की
यह 25वीं उड़ान है. अब पृथ्वी
की कक्षा से मंगल की कक्षा तक
की उड़ान एक जटिल अभियान है.
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उन्होंने कहा, “मैं इसरो की
टीम को सलाम करता हूं.”
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
अपने निर्धारित कार्यक्रम
के मुताबिक दोपहर 2.38 बजे
मंगलयान का लॉन्च कर दिया गया
है. श्रीहरिकोटा से मंगलयान
रवाना हुआ.
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<b>ताज़ा अपडेट</b>
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<b>03.25 PM:  </b>इसरो के चेयरमैन ने
अपने वैज्ञानिकों को दी बधाई.
<b></b>
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<b>03.24 PM: </b>इसरो के चेयरमैन के
राधाकृष्ण अब मंगल मिशन की अब
तक की सफलता के बारे में बता
रहे हैं.<b> </b>
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<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<b>03.23 PM: </b>तालियों की गरगराहट से
गूंजा इसरो का दफ्तर.<b><br /></b>
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<b>03.22 PM: </b>तीन बजकर 20 मिनट पर
मंगलयान पृथ्वी की कक्षा में
पहुंचा.<b> <br /></b>
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<b>03.07 PM: </b>मंगलयान का चौथा चरण
शुरू.<b><br /></b>
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<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<b>03.01 PM: </b>3.20 बजे पृथ्वी की कक्षा
में दाखिल होगा.<b><br /></b>
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<b>03.01 PM: </b>अभी तक सफल है मंगलयान
का सफर<b>.</b>
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<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<br /><b>02.59 PM: </b>नरेंद्र मोदी ने
मंगल मिशन से जुड़े
वैज्ञानिकों को दी बधाई.<b><br /></b>
</p>
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<b>02.51 PM: </b>के बूस्टर रॉकेट से
अलग हुए.
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<b><b>02.48 PM: </b></b>तीसरे चरण में
पहुंचा मंगलयान
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<b>02.41 PM: </b> श्रीहरिकोटा से
मंगलयान रवाना हुआ.
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<b>02.40 PM: </b>2.38 बजे मंगलयान का
लॉन्च किया गया.
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इसरो के 44 साल के लंबे इतिहास
में पहली बार पृथ्वी के
प्रभावक्षेत्र के बाहर कोई
अभियान शुरू किया गया है.
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चेन्नई से 100 किलोमीटर दूर
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के
अभियान नियंत्रण कक्ष में
काफी चहल-पहल है. यहां
वैज्ञानिक मंगल पर भारत के
पहले अभियान पर नजर बनाए हुए
हैं.
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वर्ष 1969 में अपनी स्थापना के
बाद से अब तक इसरो ने विभिन्न
उद्देश्यों के लिए सिर्फ
पृथ्वी के आसपास के अभियान और
चंद्रमा के लिए एक अभियान को
ही अंजाम दिया है. ऐसा पहली
बार है जब राष्ट्रीय
अंतरिक्ष एजेंसी पृथ्वी के
प्रभाव क्षेत्र से बाहर के
किसी खगोलीय पिंड का अध्ययन
करने के लिए एक अभियान भेज
रही है.
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मंगल मिशन के साथ ही भारत
दूसरे ग्रह के लिए अभियान
चलाने वाला एशिया का पहला देश
और दुनिया का चौथा संस्थान बन
जाएगा. धरती से करीब 40 करोड़
किलोमीटर की दूरी पर स्थित
मंगल ग्रह के लिए अभियान आज
शुरू हुआ.
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<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<b><b></b></b>भारतीय
अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
(इसरो) के एक शीर्ष अधिकारी ने
मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम)
से पहले कहा, “अब तक रूस,
अमेरिका और यूरोपीय
अंतरिक्ष एजेंसी ने ही मंगल
अभियान चलाया है. भारत दुनिया
में चौथा और एशिया में पहला
होगा.”
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इसरो के अध्यक्ष के.
राधाकृष्णन ने कहा, “मंगल को
रहने योग्य माना जाता है. कई
प्रकार से यह धरती जैसा ही है.”
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धरती के लगभग समान मंगल भी
अपनी धुरी पर 24 घंटे 37 मिनट में
एक घुर्णन लगाती है. हालांकि
धरती जहां 365 दिन में सूर्य की
एक परिक्रमा पूरी करती है,
वहीं मंगल को इसमें 687 दिन
लगते हैं.
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http://www.youtube.com/watch?v=Gf2WaYWDRFE<br />
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इस अभियान पर 450 करोड़ रुपये
खर्च हो रहे हैं. राधाकृष्णन
ने कहा कि ऑर्बिटर को मंगल की
कक्षा में पहुंचने में नौ
महीने लगेंगे. उन्होंने कहा
कि वैज्ञानिकों के पास इस
अभियान की तैयारी के लिए
सिर्फ 15 महीने का वक्त था,
क्योंकि अगला अवसर 780 दिन के
बाद जनवरी 2016 में ही मिल सकता
था.
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http://www.youtube.com/watch?v=zfp7eYo8koA
</p>
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मंगल की कक्षा में ऑर्बिटर
पांच प्रयोग करेगा. उन्होंने
कहा कि अब तक चलाए गए 51 मंगल
अभियानों में 21 ही सफल रहे
हैं.
</p>
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अंतरिक्ष कार्यक्रम हालांकि
1960 से ही इसरो के अभियानों का
हिस्सा रहा है, लेकिन इस
क्षेत्र में पहला बड़ा कदम 2008
में चंद्रयान-1 के साथ रखा गया.
चंद्रयान-1 अभियान में ही
पहली बार चांद पर पानी का पता
चला था.
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अभी ऑर्बिटर धरती की कक्षा
में ही चक्कर लगाएगा. एक
दिसंबर को इसे अंतरिक्ष में
मंगल की ओर बढ़ाया जाएगा.<br />भारत
के मंगल ऑर्बिटर की सितंबर 2014
तक लाल गृह की कक्षा में
पहुंच जाने की संभावना है.
वहां यह जीवन का संकेत देने
वाली मिथेन गैस की उपस्थिति
की संभावनाएं तलाशेगा. इसरो
ने दुनिया भर में स्टेशनों का
पूरा नेटवर्क बनाया है, जो
यहां से दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर
पहले लॉन्च पैड से मंगल
ऑर्बिटर मिशन को लॉन्च किए
जाने के बाद इसपर नजर रखेंगे.
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अन्य पीएसएलवी अभियानों से
अलग, पीएसएलवी सी 25 मंगल
ऑर्बिटर को पृथ्वी की कक्षा
में प्रविष्ट करा़ने में 40
मिनट का अतिरिक्त समय लेगा.
ऐसा इसलिए होगा क्योंकि
लॉन्च के लिए इसका तटानुगमन
:लॉन्ग कास्टिंग फेस: का चरण 1700
सेकेंड का समय लेता है और
उपग्रह व पृथ्वी के बीच
निकटतम दूरी वाले बिंदु का
कोण 276.4 डिग्री रखना होता है.
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वाहन के मार्ग की निगरानी कई
निरीक्षण स्टेशनों से की
जाएगी, जिनमें यहां अंतरिक्ष
केंद्र के अलावा बेंगलूर के
पास ब्यालुलू में इंडियन दीप
स्टेशन नेटवर्क, भारत के
पोर्ट ब्लेयर में डाउन रेंज
स्टेशन शामिल हैं. इसके साथ
ही इंडोनेशिया के बियाक और
ब्रुनेई से भी इसपर नजर रखी
जाएगी.<br />
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Web Title: ‘मंगल’कामना: ऐतिहासिक अभियान के लिए सफलतापूर्वक रवाना हुआ मंगलयान
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