मध्यप्रदेश: दवा फैक्ट्रियों में सेहत से खिलवाड़

मध्यप्रदेश: दवा फैक्ट्रियों में सेहत से खिलवाड़

By: | Updated: 09 Jul 2012 11:07 AM


भोपाल:  जिसे हम दवा समझ कर
खाते हैं वो दवा हमारी तबियत
ठीक करने की बजाय और बिगाड़
सकती है. मध्यप्रदेश में चलने
वाली अनेक दवा कंपनियों में
जान के साथ खिलवाड़ करने के
पूरे इंतज़ाम हैं.




उज्जैन के खाराकुआ इलाके के
एक मकान में जीवनरक्षक दवाएं
बनाई जाती है. मगर दवाएं
बनाने में उपयोग होने वाले
केमिकल में कीड़े पड़े हुए
हैं और मिलावट साफ दिख रही है.
यही हाल मशीनों का है, जिसे
सफाई के अभाव में जंग खा रही
हैं.




खाराकुआ की दवा फैक्ट्री
बिना कैमिस्ट की ही चल रही है.
प्रशासन के अफसरों ने छापा
मारा तो पहली नजर में ही जान
के साथ खिलवाड़ का मामला
निकला. खाराकुआ अकेला इलाक़ा
नहीं है, बल्कि शहर के
रिहायशी इलाके में भी इस तरह
की फैक्ट्रियां चल रही हैं.




उज्जैन के अलावा इंदौर में भी
रिहायशी इलाकों में छिप
छिपाकर दवा फैक्ट्रियां
चलती है. कभी कभार होने वाली
छापे मारी से ही इस
फर्जीवाड़े का राज खुलता है.




इंदौर में कुछ समय पहले
गांधीनगर इलाके में चलने
वाली फैक्ट्री पर छापे मारकर
गलत तरीके से बनने वाली दवाओं
का पर्दाफ़ाश हुआ. दवा बनाने
वाली फैक्ट्रियों की
निगरानी का ज़िम्मा खाद्य और
दवा नियंत्रक का होता है.




इस विभाग ने 2011-12 में प्रदेश
में करीब 8607 दवा फैक्ट्रियों
पर निरीक्षण कर 2485 संदिग्ध
नमूने ज़ब्त कर 104 को अमानक या
सब स्टेंडर्ड माना. इस पर 70
केस में कार्रवाई कर लाइसेंस
निलंबित किये गए. ये सारी
कार्रवाई औषधि और प्रशाधन
सामग्री अधिनियम 1940 के तहत
हुई.




दवा कंपनियों की देखरेख का
ज़िम्मा इस विभाग के लोगों का
है जो कभी कभार छापे मारी
करते है. मगर बड़ी और सख्त
कार्रवाई करने से डरते है.
इसलिए जनता हानिकारक केमिकल
खाने को मजबूर है.




हालांकि, राज्य के स्वास्थ्य
राज्य मंत्री महेन्द्र
हार्डिया का कहना है कि
उन्हें जब भी शिकायत मिली है
तो उन्होंने कार्रवाई की है.




मध्यप्रदेश में करीब डेढ सौ
दवा निर्माता कंपनियां हैं.
नई नीतियों के कारण छोटी छोटे
दवा निर्माता बाजार से बाहर
ही हो गए हैं. जो हैं वो छिप कर
ऐसा कारोबार कर रहे हैं.
जरूरत हैं ऐसे चोरी छिपे जनता
की जान से खिलवाड़ करने वालों
को बेनकाब करने की.



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