मप्र में भाजपा का घोषणा पत्र कांग्रेस का जवाबी दस्तावेज

By: | Last Updated: Saturday, 16 November 2013 9:47 AM

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<b>भोपाल:</b>
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता
पार्टी (भाजपा) का घोषणा पत्र
जनता से लोक लुभावन वादे करने
के साथ ही कांग्रेस के आरोपों
का जवाबी दस्तावेज भी है.
इसमें हर वर्ग को खुश करने के
अलावा कांग्रेस को उसके
शासनकाल की कमियों को गिनाकर
आईना दिखाने की कोशिश की गई
है.<br /><br />विधानसभा चुनाव के लिए
जनसंकल्प 2013 के नाम से जारी
भाजपा के 56 पृष्ठों के घोषणा
पत्र की शुरुआत 10 वर्षो के
शासनकाल के दौरान किए गए
कार्यो के ब्यौरे के साथ की
गई है, मगर आगे चलकर कांग्रेस
के पिछले कार्यकाल की कमियां
गिनाने के अलावा कांग्रेस
द्वारा जारी आरोप पत्र के
आरोपों को झुठलाया गया है, और
कांग्रेस के घोषणा पत्र पर
सवाल उठाए गए हैं. <br /><br />निवेदन
शीर्षक जिसे प्रस्तावना कह
सकते हैं, से जारी प्रथम तीन
पृष्ठ में उपलब्धियों का
बखान करने से ज्यादा
कांग्रेस पर निशाना साधा गया
है.<br /><br />राजनीतिक परंपरा के
मुताबिक किसी भी दल का घोषणा
पत्र उसकी आगामी कार्ययोजना
का एक दस्तावेज हेाता है,
जिसमें दल बताता है कि सत्ता
में आने पर जनता के लिए कौन-सी
योजनाएं लाएगा. <br /><br />वहीं
सत्ताधारी दल घोषणा पत्र में
बीते कार्यकाल की
उपलब्धियों और अधूरी
कोशिशों के कारणों की वजह
बताते हुए फिर सत्ता में आने
पर आगामी योजनाओं का ब्यौरा
देता है. घोषणा पत्र को आरोप
और प्रत्यारोपों से दूर रखा
जाता है.<br /><br />मार्क्‍सवादी
कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के
राज्य सचिव बादल सरोज का कहना
है कि भाजपा का घोषणा पत्र
उसकी हताशा को दर्शाने वाला
है. घोषणा पत्र में बताया
जाना चाहिए था कि राज्य की
भूखमरी कैसे दूर करेंगे,
कुपोषण का हथियार क्या होगा.
किसानों की आत्महत्या पर
कैसे अंकुश लगाया जाएगा. <br /><br />भाजपा
काल में जो कुछ हुआ है, उसे
बताना उसके लिए आसान नहीं है,
क्योंकि उसके दल के नेता
समृद्ध और सम्पन्न हुए हैं.
वहीं जनता समस्याओं से घिरती
चली गई है.<br /><br />सरोज का कहना है
कि भाजपा हो या कांग्रेस,
दोनों का कोई सकारात्मक
एजेंड नहीं है. दोनों ही
एक-दूसरे की कार्बन कापी हैं.
दोनों का सच्चाई से वास्ता
नहीं है. लिहाजा वे एक-दूसरे
पर आरोप लगाकर अपने गाल बजा
लेती हैं.<br /><br />विधानसभा में
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष
अजय सिंह का कहना है कि भाजपा
का घोषणा पत्र परंपराओं को
तोड़कर तैयार किया गया है, जो
उसके भय और डर को जाहिर करने
वाला है. उसे अपने ही विकास के
दावों पर भरोसा नहीं है,
लिहाजा उसने दूसरों के घोषणा
पत्र पर सवाल उठाने की कोशिश
की है. इस घोषणा पत्र से उसने
अपनी हार की इबारत लिख दी है.<br /><br />जबकि
भाजपा घोषणा पत्र समिति के
सदस्य गोविंद मालू का कहना है
कि घोषणा पत्र, उनका संकल्प
पत्र है. इसमें उन्होंने
कांग्रेस और भाजपा सरकार के
कार्यकाल की तुलना की है. ऐसा
इसलिए क्योंकि कांग्रेस
सिर्फ चुनाव में घोषणा पत्र
जारी करने की रस्म अदायगी कर
उसे कचरे की टोकरी में डाल
देती है, वहीं भाजपा के लिए
घोषणा पत्र धार्मिक ग्रंथ
गीता के समान है, उसमें किए गए
वादों को पूरा करना उसका धर्म
है.<br /><br />मालू आगे कहते हैं,
“जहां तक प्रस्तावना में
कांग्रेस के शासनकाल का
जिक्र किए जाने का सवाल है तो
इसमें भाजपा शासनकाल की भी
तुलना की गई है. जनता को बताया
गया है कि किसने क्या किया और
आगे क्या करेंगे.”<br /><br />राजनीतिक
विश्लेषक शिव अनुराग
पटैरिया भाजपा के घोषणा पत्र
को कांग्रेस का जवाबी
दस्तावेज मानते हैं. उनका
कहना है कि भाजपा का घोषणा
पत्र, कांग्रेस के घोषणा पत्र
से मिलता-जुलता है.<br />
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Web Title: मप्र में भाजपा का घोषणा पत्र कांग्रेस का जवाबी दस्तावेज
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