मायावती की खातिर कोटा बिल पेश करेगी सरकार

मायावती की खातिर कोटा बिल पेश करेगी सरकार

By: | Updated: 09 Dec 2012 09:10 PM


नई
दिल्‍ली:
राज्यसभा में आज
जबरदस्त हंगामा हो सकता है.
दरअसल, आज राज्यसभा में
प्रमोशन में रिजर्वेशन बिल
लाया जा रहा है.

दुआ कीजिए
कि पिछली बार की तरह इस बार
प्रमोशन में रिजर्वेशन बिल
के मसले पर संसद शर्मसार न हो.


मानसून सत्र में जब इस
बिल को पेश किया गया था तो
समाजवादी पार्टी के सांसद
नरेश अग्रवाल और बीएसपी के
सांसद अवतार सिंह करीमपुरी
के बीच हाथापाई की नौबत तक आ
गई थी.

अब देखना है कि इस
बार बिल को लेकर एसपी और
बीएसपी के सांसद किस हद तक
जाते हैं.

सूत्रों के
मुताबिक सरकार मायावती का
एहसान उतारने के लिए इस बिल
को ला रही है. विदेशी किराना
के मुद्दे पर मायावती ने
लोकसभा में वॉक आउट करके
सरकार को मदद पहुंचाई थी.

वहीं,
राज्यसभा में मायावती ने
सरकार के पक्ष में वोट डालकर
सरकार की नाक बचाई थी. उसी समय
मायावती ने साफ कर दिया था कि
वो जनहित के बिलों के लिए
सरकार का समर्थन कर रही हैं
और इसमें प्रमोशन में आरक्षण
बिल मायावती के एजेंडे में
सबसे ऊपर था.

समाजवादी
पार्टी शुरू से प्रमोशन में
रिजवर्वेशन बिल का विरोध कर
रही है. इसी साल अगस्त में
सरकार ने इस मुद्दे पर ऑल
पार्टी मीटिंग बुलाई थी. तब
समाजवादी पार्टी के साथ-साथ
शिवसेना ने भी इसका विरोध
किया था.

बीजेपी ने भले ही
सर्वदलीय बैठक में इसका
समर्थन किया था, लेकिन वो इस
पर विस्तार से चर्चा चाहती है
और इस बिल की खातिर संविधान
संशोधन के खिलाफ है. उसका
मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के
आदेश के मद्देनजर इस बिल का
ड्रॉफ्ट तैयार किया जाना
चाहिए.




गौरतलब है कि प्रमोशन में
रिजर्वेशन बिल के मुताबिक
दलितों और आदिवासियों को
सरकारी नौकरियों में
पदोन्नति में पांच फीसदी
आरक्षण का प्रावधान है. इस
बिल को 1995 से ही लागू किए जाने
का प्रावधान है.

अगर यह
बिल पास हो जाता है तो दलितों
और आदिवासियों को प्रमोशन और
वरीयता नए कानून के मुताबिक
दी जाएगी.

हालांकि
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी
आरक्षण के प्रावधान पर
आपत्ति जताई थी. दरअसल, 1955 से 1995
तक आरक्षण मिलता रहा था,
लेकिन उसके लिए कोई
सांवैधानिक प्रावधान नहीं
था.

लिहाजा सरकार ने इसे
अनिवार्य बनाने के लिए इसमें
कुछ संशोधन किए, जिसे बाद में
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2002
में खारिज कर दिया था.

सुप्रीम
कोर्ट के फैसले के बावजूद
उत्तर प्रदेश विधानसभा
चुनाव से ठीक पहले मायावती ने
इसे उत्तर प्रदेश में लागू
करने की कोशिश की थी, लेकिन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का
हवाला देते हुए मायावती की इन
कोशिशों पर पानी फेर दिया था.

अब
मायावती संसद से इस बिल को
पास कराना चाहती हैं, लेकिन
समाजवादी पार्टी इस बिल को
रोकने के लिए किसी हद तक जाने
की बात कहती रही है.

ऐसे
में देखना है कि राज्यसभा में
जब इस बिल को पेश किया जाता है
तो वहां नजारा क्या होता है?




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