मायावती ने सभापति से पूछा, 12 बजे बाद चले क्‍यों जाते हैं?

मायावती ने सभापति से पूछा, 12 बजे बाद चले क्‍यों जाते हैं?

By: | Updated: 12 Dec 2012 02:22 AM


नई
दिल्‍ली:
प्रमोशन में
आरक्षण बिल पर चर्चा न होने
को लेकर बहुजन समाज पार्टी
(बीएसपी) के सांसदों ने
राज्यसभा में हंगामा किया,
जिसके चलते सदन की कार्यवाही
स्‍थगित कर दी गई.

बीएसपी
सांसदों का आरोप है कि
समाजवादी पार्टी के सांसद
सदन नहीं चलने दे रहे हैं तो
फिर सभापति कार्रवाई क्यों
नहीं करते?

राज्‍यसभा की
कार्यवाही आज तीन बार
स्‍थगित करनी पड़ी. आखिरी बार
12:30 बजे सदन को कल तक के लिए
स्‍थगित कर दिया गया.

यही
नहीं आज खुद बीएसपी अध्यक्ष
मायावती ने मोर्चा संभाल
लिया. प्रमोशन में आरक्षण बिल
पर चर्चा न होने को लेकर
नाराज मायावती आज सीधे
सभापति हामिद अंसारी से भिड़
गई.

मायावती ने सभापति को
खूब खरी-खोटी सुनाई और कहा कि
12 बजे के बाद आप चले क्यों
जाते हैं?

राज्‍यसभा
स्‍पीकर हामिद अंसारी पर
सीधा हमला बोलते हुए मायावती
ने कहा, 'रोज़ाना 12:00 बजे के बाद
हाउस नहीं चल पा रहा है. आप सदन
के सभापति हैं और आपकी
जिम्‍मेदारी है कि 12:00 बजे के
बाद सदन की कार्यवाही सुचारू
रूप से चले. आप रोज 12:00 बजे उठकर
चले जाते हैं और हाउस नहीं चल
पाता, इसकी व्‍यवस्‍था कौन
करेगा?'

मायावती को
समझाते हुए जब सभापति हामिद
अंसारी ने कहा कि सदन सबके
सहयोग से चलता है और चलेगा तो
मायावती ने कहा, 'यह आपकी
(सभापति) जिम्‍मेदारी है. आप
12:00 बजे उठकर चले जाएंगे और फिर
नजर नहीं आएंगे.'

सभापति
हामिद अंसारी ने मायावती से
कहा कि वह बहुत वरिष्‍ठ नेता
हैं और प्रश्‍न काल चलने दें,
इस पर मायावती ने यह कहते हुए
पलटवार किया कि सदन बहुत
दिनों से नहीं चल रहा है.

मायावती
ने कहा, 'ये कैसी राज्‍यसभा है.
यहां रोज़-रोज़ तमाशा चल रहा
है. हर घंटे में राज्‍यसभा की
कार्यवाही स्‍थगित कर दी
जाती है.'

गौरतलब है कि
मायावती राज्यसभा न चलने
देने के लिए बीजेपी और
समाजवादी पार्टी पर हमला बोल
रही हैं, जबकि बीजेपी का कहना
है कि सरकार की सहयोगी पार्टी
के नेता ही सदन नहीं चलने दे
रहे.

समाजवादी पार्टी
शुरू से प्रमोशन में
रिजवर्वेशन बिल का विरोध कर
रही है. इसी साल अगस्त में
सरकार ने इस मुद्दे पर ऑल
पार्टी मीटिंग बुलाई थी. तब
समाजवादी पार्टी के साथ-साथ
शिवसेना ने भी इसका विरोध
किया था.

बीजेपी ने भले ही
सर्वदलीय बैठक में इसका
समर्थन किया था, लेकिन वो इस
पर विस्तार से चर्चा चाहती है
और इस बिल की खातिर संविधान
संशोधन के खिलाफ है. उसका
मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के
आदेश के मद्देनजर इस बिल का
ड्रॉफ्ट तैयार किया जाना
चाहिए.

क्‍या है प्रमोशन
में आरक्षण बिल?

प्रमोशन
में रिजर्वेशन बिल के
मुताबिक दलितों और
आदिवासियों को सरकारी
नौकरियों में पदोन्नति में
पांच फीसदी आरक्षण का
प्रावधान है. इस बिल को 1995 से
ही लागू किए जाने का प्रावधान
है.

अगर यह बिल पास हो जाता
है तो दलितों और आदिवासियों
को प्रमोशन और वरीयता नए
कानून के मुताबिक दी जाएगी.

हालांकि
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे किसी
आरक्षण के प्रावधान पर
आपत्ति जताई थी. दरअसल, 1955 से 1995
तक आरक्षण मिलता रहा था,
लेकिन उसके लिए कोई
सांवैधानिक प्रावधान नहीं
था.

लिहाजा सरकार ने इसे
अनिवार्य बनाने के लिए इसमें
कुछ संशोधन किए, जिसे बाद में
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2002
में खारिज कर दिया था.

सुप्रीम
कोर्ट के फैसले के बावजूद
उत्तर प्रदेश विधानसभा
चुनाव से ठीक पहले मायावती ने
इसे उत्तर प्रदेश में लागू
करने की कोशिश की थी, लेकिन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का
हवाला देते हुए मायावती की इन
कोशिशों पर पानी फेर दिया था.

अब
मायावती संसद से इस बिल को
पास कराना चाहती हैं, लेकिन
समाजवादी पार्टी इस बिल को
रोकने के लिए किसी हद तक जाने
की बात कहती रही है.

ऐसे
में देखना है कि राज्यसभा में
जब इस बिल को पेश किया जाता है
तो वहां नजारा क्या होता है?




http://www.youtube.com/watch?v=9CMlkB90VQw




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