मिशन 2014: एक नजर में पढ़ें राहुल गांधी की ताकत और कमजोरी

By: | Last Updated: Friday, 17 January 2014 6:34 AM
मिशन 2014: एक नजर में पढ़ें राहुल गांधी की ताकत और कमजोरी

नई दिल्ली. मिशन 2014 में कांग्रेस की सबसे बड़ी उम्मीद का नाम राहुल गांधी हैं. आपको बता दें कि प्रत्यक्ष भले ही ना हो लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से राहुल गांधी ही कांग्रेस की कमान संभालेंगे. अब चलिए हम आपको बताते हैं कि राहुल गांधी की कमजोरियां क्या हैं और वह कौन सी ताकत है जिसके दम पर वह चुनाव में जाएंगे.

 

 

नाम राहुल गांधी

पद  उपाध्यक्ष, कांग्रेस

मकसद 2014 में कांग्रेस को जीत दिलाना

 

ताकत

 

राहुल गांधी की सबसे बड़ी ताकत नेहरू गांधी परिवार की विरासत है. आजादी के बाद से नेहरू-गांधी परिवार ने ना सिर्फ कांग्रेस को संभाला है सबसे लंबे वक्त तक देश पर राज किया है. राजनीति में उतरे हर गांधी-नेहरू परिवार को इसका फायदा मिला है. राहुल गांधी ने अपने भाषणों में जिस तरह अपनी दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की हत्या का जिक्र किया उससे अंदाजा लगता है कि राहुल गांधी अपनी इस सबसे बड़ी ताकत को आगे भी भुनाने की कोशिश कर सकते हैं.

 

कमजोरी

 

राहुल गांधी की कमजोरी ये है कि राजनीति में दाखिल होने के करीब दस साल भी बाद भी वह वैसा करिश्माई व्यक्तित्व नहीं दिखा पाए हैं जैसा इंदिरा गांधी या राजीव गांधी में हुआ करता था. राहुल गांधी अपने भाषणों से ऐसा चमत्कार भी पैदा नहीं कर पाते हैं जो गांधी-नेहरू परिवार के सदस्य करते आए हैं.

 

ताकत

राहुल गांधी के पक्ष में सबसे बड़ी बात जाती है कि उनके साथ उनकी पार्टी खड़ी है. पार्टी के अंदर राहुल गांधी के नाम को लेकर दो मत नहीं है. पार्टी का कैडर भी राहुल गांधी के नाम पर एकजुट हो सकता है. कांग्रेस देश की सबसे बड़ी पार्टी है और राहुल की लीडरशिप में कांग्रेस मुकाबले में खड़ी हो सकती है.

 

कमजोरी

राहुल गांधी को आगे करने के लिए पार्टी के अंदर से कई साल से मांग उठ रही थी. लेकिन राहुल गांधी ने कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई. 2013 में जाकर उन्होंने पार्टी का उपाध्यक्ष बनना स्वीकार किया लेकिन सरकार में उन्होंने कोई पद नहीं लिया. सरकार के मामलों पर सीधे दखल से बचते रहे. बड़े मामलों पर राहुल अक्सर चुप रहे. पिछले कुछ दिनों में राहुल ने बड़े मुद्दों पर चुप्पी तोड़ी है लेकिन इस बीच उन पर विपक्ष जिम्मेदारी से बचने का ठप्पा लगाने में कामयाब रहा.

 

ताकत

राहुल के पक्ष में सबसे बड़ी बात जाती है कि उनके पास संसाधनों की कमी नहीं है. उनकी जीत के लिए पार्टी पैसा पानी की तरह बहा सकती है.

 

कमजोरी

राहुल गांधी के नाम के साथ बिहार-उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की हार जुड़ गई है. दोनों जगह राहुल ने आगे बढ़कर काम किया. रणनीति बनाने से लेकर उम्मीदवारों के चयन में टीम राहुल सक्रिय थी लेकिन दोनों जगह हार मिली. इसी तरह हिंदी क्षेत्र के सभी बड़े राज्यों में कांग्रेस की हालत पतली नजर आ रही है. ये कमजोरी राहुल पर भारी पड़ सकती है.

 

ताकत

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस यूपीए वन जैसा प्रदर्शन करने में भी कामयाब रहती है तो राहुल के नाम पर सहयोगी ढूंढना मुश्किल नहीं होगा. राहुल की साफ छवि, गैर-साम्प्रदायिक इमेज के चलते वह चुनाव के बाद बड़ा गठबंधन बना सकते हैं या चुनाव से पहले भी बड़े गठबंधन के साथ मैदान में उतर सकते हैं.

 

कमजोरी 

सोशल नेटवर्किंग साइट्स लोगों से जुड़ने का बड़ा जरिया बन चुका है. लेकिन राहुल और कांग्रेस सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर काफी पिछड़ी नजर आ रही है. चार राज्यों में हुए चुनावों में भी राहुल की साइबल सेना चारों खाने चित्त नजर आई. राहुल ना तो फेसबुक पर हैं ना ट्विटर पर हैं, सोशल नेटवर्किंग साइटस पर जनता से उन्होंने दूरी बनाई हुई है जिसका उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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Web Title: मिशन 2014: एक नजर में पढ़ें राहुल गांधी की ताकत और कमजोरी
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