मुंबई ट्रेन हादसे के बीच रेल मंत्री दिल्ली से ग़ायब!

मुंबई ट्रेन हादसे के बीच रेल मंत्री दिल्ली से ग़ायब!

By: | Updated: 19 Apr 2012 06:59 AM









नई दिल्ली: रेल
मंत्री मुकुल रॉय को रेल
मंत्रालय की शपथ लिए ठीक एक
महीना पूरा हो गया. लेकिन शपथ
लेते ही उन्हें सबसे पहले रेल
दुर्घटना में मरने वालों के
लिए मुआवज़े का एलान करना
पड़ा और एक महीना पूरा होने
वाले दिन भी मुंबई लोकल में
हुए हादसे में मरने वालों के
लिए उन्हें एक बार फिर
मुआवज़े का एलान करना पड़ा.




ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि
क्या इन हादसों के वक्त रेल
मंत्री को दिल्ली में नहीं
होना चाहिए था? क्या मुकुल
रॉय भी पूर्व रेल मंत्री ममता
बेनर्जी की राह पर चल पड़े है.
क्या उन्हें भी दिल्ली नहीं
भाता और कोलकाता में ज्यादा
रहने का रोग है?




ग़ौरतलब है कि एक महीने पहले 20
मार्च को ममता बनर्जी ने
दिनेश त्रिवेदी को हटाकर रेल
मंत्री की कुर्सी मुकुल रॉय
को दी थी. वो एक इत्तेफ़ाक था
कि शपथ लेने से ठीक पहले यूपी
के हाथरस में ट्रेन हादसे में
सोलह लोगों की जान चली गई.
रेलवे का कहना था कि उस
मानवरहित फाटक से ट्रेनों की
गुजरने की संख्या काफी कम है
फिर भी रेल मंत्री ने मुआवज़े
का एलान कर दिया.




मुंबई में सिग्नल खराब होने
की वजह लोकल गाड़ियाँ देर से
चलीं. ट्रेन में ज्यादा भीड़
थी और सिग्नल से टकराकर तीन
लोगों को अपनी जान से हाथ
धोना पड़ा.




रेलवे ने अपनी गलती नहीं मानी
फिर भी 15 हजार रुपये मुआवज़े
का एलान किया और महकमे के
मंत्री ने दो लाख रुपये के
मुआवज़े का टोकन थमा दिया.
मौत की ज़िम्मेदारी तब भी
नहीं ली और अब भी नहीं ली.




खास बात ये है कि दिल्ली के
रेल भवन में बतौर रेल मंत्री
रेल मंत्रालय में मुकुल रॉय
सिर्फ पांच दिन ही आए हैं.




पहला दिन, 21 मार्च को यानी शपथ
लेने के एक दिन बाद मंत्रालय
में चार्ज लेने पहुंचे.




दूसरी बार 10 अप्रैल को रेल भवन
पहुंचे जब ममता बनर्जी
प्लानिंग कमीशन की बैठक के
लिए आई थी. मुकुल रॉय उनके साथ
आए.
तीसरी बार 11 अप्रैल को भी
रेल भवन गए जब जर्मनी की
डेलिगेशन के साथ मुकुल रॉय एक
बैठक थी.




चौथी बार 16
अप्रैल को आए. रेलवे वीक के
दौरान एमआर अवार्ड देने के
लिए मुकुल रॉय दिल्ली पहुंचे
और फिर उसी दिन कोलकाता के
लिए निकल गए.




बीच में एक दिन और दिल्ली में
थे. यानी संसद के बजट सत्र में
20 को शपथ ग्रहण करने और संसद
के सत्र चलने के अलावा बस
पांच दिन ही दिल्ली में रहे.




हालांकि इस बाबत मंत्रालय
में सभी के होठ सिले हैं और
कोई इस जानकारी पर मुहर लगाने
को तैयार नहीं यहां तक कि रेल
मंत्रालय के प्रवक्ता भी.




स्टार न्यूज़ ने प्रवक्ता
रेल मंत्रालय से जानकारी भी
मांगी. साफ है कि जो मंत्री
मंत्रालय में आने में
दिलचस्पी ही नहीं दिखाए वो
क्या मंत्रालय के काम काज में
दिलचस्पी दिखाएगा. इसलिए
विपक्ष को भी रेल मंत्री पर
हल्ला बोलने का मौका मिल गया
है.




सीपीएम नेता वासुदेव आचार्य
ने टीएमसी खाते से रेल मंत्री
की जमकर आलोचना की.




साफ है कि मंत्री अगर
मंत्रालय से ग़ायब है तो
बोर्ड के साथ उनकी ट्यूनिंग
ही नहीं बन पाएगी और पिछले दो
दिन से मुंबई में जो कुछ हुआ
उसमें मंत्री और मंत्रालय के
अधिकारियों के बीच तालमेल की
कमी एक भारी वजह रही.




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