मुंबई में बेखौफ दौड़ रही है काले शीशों वाली बसें

By: | Last Updated: Friday, 4 January 2013 6:09 AM

मुंबई: दिल्ली में गैंगरेप
की वारदात के बाद मुंबई में
भी पुलिस ने महिलाओं की
सुरक्षा को लेकर तमाम ऐलान
किए, लेकिन दिल्ली जैसी
वारदात रोकने के लिये मुंबई
में अभी काफी कुछ करना बाकी
है.

मुंबई की सडकों पर अब भी
दर्जनों ऐसी बसें चलतीं हैं,
जिनपर काली फिल्में लगी
रहतीं हैं. पिछले साल मुंबई
पुलिस ने काली फिल्म वाले
वाहनों के खिलाफ बडी मुहिम भी
चलाई थी, लेकिन एबीपी न्यूज
ने अपनी पडताल में पाया है कि
निजी बसों पर इस मुहिम का कोई
असर नहीं पडा.

बीते साल अक्टूबर से लेकर
दिसंबर तक मुंबई ट्रैफिक
पुलिस ने करीब 97 हजार ऐसे
वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की,
जिनके शीशों पर काली फिल्में
लगीं हुईं थीं. जिन वाहनों पर
कार्रवाई हुई उनमें निजी
बसें भी थीं.

इस मुहिम का कितना असर हुआ है,
जब एबीपी न्यूज़ की टीम ने
इसकी पडताल की तो पाया कि
मुंबई में अब भी बडी तादाद
में काली फिल्मों से लैस बसें
सडक पर घूम रहीं हैं और इस तरह
की बसों का कितना खतरनाक
इस्तेमाल हो सकता है ये हम
दिल्ली गैंगरेप के मामले में
देख चुके हैं.

दक्षिण मुंबई के क्रास मैदान
के बाहर सडक पर वे तमाम बसें
खडी रहतीं हैं जिनका मुंबई से
गोवा और कर्नाटक जैसे
राज्यों से रोज आना जाना होता
है. ज्यादातर बसों पर नजर
डाली तो पता चला कि उनकी
खिडकियों पर काले फिल्में
लगी हुईं हैं, कोई गहरी काली
तो कोई थोडी हलकी. बाहर मौजूद
व्यक्ति को पता लगना मुश्किल
है कि बस के अंदर क्या हो रहा
है. यहां मौजूद बसों में कुछ
महाराष्ट्र में रजिस्ट्रड
थीं तो कुछ दूसरे राज्यों
में.

मध्य मुंबई के परेल इलाके में
महाराष्ट्र राज्य परिवहन
विभाग की बसों का एक प्रमुख
डिपो तो है ही, यहां से बडे
पैमाने पर निजी बसें भी
महाराष्ट्र के अलग अलग
इलाकों और दूसरे राज्यों के
लिये छूटतीं हैं. यहां भी
तमाम बसें सभी नियम कानूनों
को ठेंगा दिखाते हुए काली
फिल्मों से लैस नजर आईं.

टूरिस्ट बसों के अलावा हमें
कई ऐसी स्कूल बसें भी मिलीं
जिनपर काले शीशे लगे हुए थे.
आपने नो पार्किंग में अपनी
कार खडी की हो, शराब पीकर गाडी
चला रहे हों या फिर सिगनल तोड
कर निकल रहे हों. मुंबई में
बहुत मुमकिन है कि आप बच नहीं
पायेंगे. फिर सवाल ये है कि
इतनी मुस्तैद रहने वाली
मुंबई ट्रैफिक पुलिस की
नजरों से ये बसें कैसे बच गईं.
ये बसें भी तो उन्हीं सडकों
से गुजरतीं हैं जहां से बाकी
के वाहन. फिर इनके खिलाफ
कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक
आदेश में वाहनों पर किसी भी
तरह की फिल्म लगाने पर पूरी
तरह से पाबंदी लगा दी है. इसी
आदेश पर अमल करते हुए पिछले
साल मुंबई ट्रैफिक पुलिस और
आर.टी.ओ ने अपनी मुहिम शुरू की
थी और दोषी वाहन चालकों के
लाईसेंस जब्त किये थे और उनसे
जुर्माना वसूला था लेकिन इस
पुलिसिया कार्रवाई का निजी
बस मालिकों पर कोई फर्क नहीं
पडा. वे बेफिक्र होकर काली
फिल्में लगीं बसें मुंबई की
सडकों पर दौडा रहे हैं.

बसों में काले शीशे लगाये
जाते हैं ताकि मुसाफिरों को
धूप न लगे और बस के अंदर ठंडक
बनी रहे लेकिन सवाल जब सुविधा
और सुरक्षा में से किसी एक को
चुनने का हो तो जाहिर है जवाब
काली फिल्मों के खिलाफ ही
जायेगा.

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Web Title: मुंबई में बेखौफ दौड़ रही है काले शीशों वाली बसें
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