मुजफ्फरनगर: बीजेपी विधायकों की गिरफ्तारी संभव

By: | Last Updated: Wednesday, 18 September 2013 5:56 AM
मुजफ्फरनगर: बीजेपी विधायकों की गिरफ्तारी संभव

मुजफ्फरनगर/ लखनऊ/
नई दिल्ली:
दंगा भड़काने के
आरोपी तीन बीजेपी विधायकों
की गिरफ्तारी हो सकती है.
बीजेपी विधायक संगीत सोम,
भारतेंदु और सुरेश राणा को
गिरफ्तार करने पुलिस
विधानसभा पहुंची थी लेकिन
तीनों विधायक उमा भारती के
साथ वहां से बीजेपी दफ्तर चले
गए.

मुजफ्फरनगर में कोर्ट ने
भड़काऊ भाषण देने के आरोपी
बीजेपी विधायक संगीत सोम और
भारतेंदू सिंह के खिलाफ
वारंट जारी किया है. इनके
अलावा बीएसपी सांसद कादिर
राना, विधायक नूर आलम सहित
सोलह लोगों के खिलाफ वारंट
जारी हुआ है. कोर्ट ने दो दिन
में पुलिस से रिपोर्ट देने को
कहा है.

दूसरी ओर दंगों को लेकर न्यूज
चैनलों के स्टिंग ऑपरेशन पर
आजम खान ने सफाई दी है. आजम खान
ने कहा है कि उन्होंने किसी
पुलिस वालों से फोन पर बात
नहीं की. स्टिंग ऑपरेशन में
दिखाया गया था कि आजम खान के
कहने पर हिरासत में लिए गए
लोगों को छोड़ा गया जिसके बाद
माहौल बिगड़ा.

वारंट जारी

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने भड़काऊ
भाषण देने के आरोपी बीजेपी
विधायक संगीत सोम और
भारतेंदु सिंह के खिलाफ
वारंट जारी किया है. कोर्ट ने
इनके अलावा बीएसपी सांसद
कादिर राना, बीएसपी विधायक
नूर सलीम, बीएसपी विधायक
मौलाना जमील, कांग्रेस नेता
सईदुजमान और भारतीय किसान
यूनियन के प्रमुख नरेश टिकैत
समेत सोलह लोगों के खिलाफ
वारंट जारी किया है.

कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि
वो वारंट पर दो दिनों के भीतर
कार्रवाई कर कोर्ट को अपनी
रिपोर्ट दे. बीजेपी विधायक
संगीत सोम आज विधानसभा भी
पहुंचे थे. अपने ऊपर लगे
आरोपों पर संगीत सोम ने कहा
कि वो गिरफ्तारी से नहीं डरते
लेकिन पहले आजम खान की
गिरफ्तारी होनी चाहिए.

आजम
का इंकार

मुजफ्फऱनगर
दंगे को लेकर न्यूज चैनल आज
तक के स्टिंग ऑपरेशन में अपने
ऊपर लगे आरोपों से आजम खान ने
इनकार किया है.

सफाई देते हुए आजम खान ने कहा
है कि उनकी किसी पुलिस वाले
से कोई बात नहीं हुई.

आरोप
को आजम खान ने झूठा बताया है.
आजम ने कहा है कि दंगों में
उनका नाम घसीटा जाना गलत है.

क्या है स्टिंग में

न्यूज
चैनल आज तक के स्टिंग ऑपरेशन
में जानसठ तहसील के सीओ ये
कहते हुए दिख रहे हैं कि
राजनीतिक दबाव के चलते कमजोर
एफआईआर दर्ज करवाई गई. 27 अगस्त
को डबल मर्डर और सांप्रदायिक
माहौल खराब करने के आरोप में
जिन 8 लोगों को उन्होंने पकडा
था उन्हें ऊपरी दबाव के बाद
छोड़ दिया गया.

सीओ के
मुताबिक 27 अगस्त को दोपहर 2.30
बजे घटना हुई.  शाम 4.30 बजे आठ
लोगों को पकड़ा गया लेकिन रात
को ही सबको छोड़ने का आदेश
दिया गया. सीओ ये भी कह रहे है
कि डीएम सुरेंद्र सिंह और
एसएसपी मंजीत सैनी ने खुद
अपनी मौजूदगी में इलाके में
सर्च ऑपरेशन चलाया था लेकिन
रात को ही उन दोनों का तबादला
कर दिया गया.

इस पूरे
विवाद में आजम खान का नाम आया
है फुगाना थाने के सेकेंड
अफसर आर एस भगौर के बयान के
बाद. भागौर जिस थाने के
सेंकेड इंचार्ज हैं उस इलाके
में दंगों में 16 लोगों की मौत
हुई है. स्टिंग ऑपरेशन में जब
पत्रकार ने पूछा कि दबाव का
मेन रोल आजम खान का रहा तो
भागौर स्टिंग ऑपरेशन में
बिल्कुल ठीक-बिल्कुल ठीक बोल
रहे हैं.

आखिर हुआ क्या
था

एबीपी न्यूज
संवाददाता पंकज झा ने अपनी
पड़ताल में पाया था कि अगर 27
तारीख को ही हत्या की घटना को
काबू में कर लिया गया होता तो
हत्या की घटना दंगे का शक्ल
नहीं लेती.

सत्ताईस अगस्त
को सवेरे ग्यारह बजे के आस
पास गांव के एक युवक शाहनवाज
को दो लड़कों ने मार दिया.
शाहनवाज पर आरोप लगा कि उसने
एक लड़की को छेड़ा था जिसपर
लड़की के भाइयों ने शाहनवाज
की हत्या कर दी. लेकिन
शाहनवाज के पिता कहते हैं कि
उसके बेटे को बेवजह बदनाम
किया गया और मारा गया.

शाहनवाज
के पिता अपने जवान बेटे की
तस्वीर सीने से लगाए बस रोते
रहते हैं. बीस दिनों पहले ही
तो वो अपने घर लौटा था. उसकी
हत्या का आरोप जिन दो भाईयों
पर लगा उन्हें भी भीड़ ने पीट
पीट कर मार डाला. देखते ही
देखते कवाल में एक ही जगह पर
तीन हत्याएं हो गईं. जिस लडकी
के साथ छेड़खानी की बात कही
जा रही है उसके पिता कहते है
कि बार-बार शिकायत के बावजूद
पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी.

शाहनवाज
की हत्या के बाद एक ही समुदाय
के जिन दो भाइयों की हत्या
हुई वो मलिकपुरा के रहने वाले
थे. एक सत्रह साल का और दूसरा
चौबीस साल का. दोनों तरफ से
जानसठ थाने में मुक़दमे भी
दर्ज हुए लेकिन यहां भी खेल
हो गया. आरोप है कि ऊपर से दवाब
के चलते एक समुदाय के कुछ
लोगों के नाम जान बूझ कर
मुक़दमे में डाल दिए गए.

मुकदमे के खेल की पोल खुलने
से बात और बिगड़ गई. अफवाहों
का बाजार गरम हो गया. बात
फ़ैली कि यूपी पुलिस कुछ ख़ास
लोगों पर मेहरबान हो रही है.
सत्ताईस अगस्त को कवाल और
मलिकपुरा के आस पास के इलाकों
में माहौल गर्म रहा.

समाजवादी पार्टी के कुछ
नेताओं के दवाब में
मुज़फ्फरनगर के उस वक्त के
डीएम सुरेन्द्र सिंह और
एसएसपी मंजिल सैनी का देर रात
तबादला हो गया. अगले दिन यानी
अट्ठाईस अगस्त को दो भाइयों
के अंतिम संस्कार से लौट रहे
लोगों ने जम कर हंगामा किया.

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