मुजफ्फरनगर सांपद्रायिक हिंसा में 12 की मौत, तैनात की गई सेना

By: | Last Updated: Saturday, 7 September 2013 9:28 PM

मुज़फ़्फरनगर:
यूपी के मुजफ्फरनगर में दो
गुटों की हिंसा के बाद तनाव
बना हुआ है. कल हुई हिंसा में
एक टीवी पत्रकार सहित 12 की मौत
हो गई है.

एहतियात के तौर पर शहर में
सेना की तैनाती की गई है और
शहर के तीन थाना क्षेत्रों
में कर्फ्यू लगा हुआ है.

दिल्ली से करीब सवा सौ
किलोमीटर दूर मुज़फ़्फरनगर
में पिछले हफ्ते छेड़खानी को
लेकर बवाल शुरु हुआ था जिसने
शनिवार को अचानक ही
सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले
लिया.

इस घटना की रिपोर्टिंग के लिए
पहुंचे टीवी पत्रकार राजेश
वर्मा की भी गोली लगने से मौत
हो गई.

पीटीआई के मुताबिक हिंसा में
अब तक 34 लोग घायल हुए हैं. शहर
में सेना की तैनाती की गई है.

इस बीच केंद्रीय
गृहमंत्रालय ने राज्य सरकार
से मुजफ्फरनगर की घटना पर
पूरी रिपोर्ट मांगी है. इस
तरह की घटना की संभावना के
बावजूद क्यों सांप्रदायिक
हिंसा को रोक पाने में नाकाम
रहा प्रशासन, इस पर भी सवाल
पूछा गया है. इसके अलावा
केंद्र ने कहा है कि यह हिंसा
फैल न पाये, इसे राज्य सरकार
सुनिश्चित करे.

रक्षा मंत्रालय में जन सूचना
के अतिरिक्त महानिदेशक ने
अपने आधिकारिक ट्वीटर पेज पर
लिखा, “शामली में सेना की दो और
कॉलम तैनात की गई हैं.” 
ग़ौरतलब है कि इससे पहले ही
सांप्रदायिक हिंसा के बीच
सेना की 8 कॉलम तैनात की जा
चुकी हैं.

मामला

हिंसा की शुरुआत 27 अगस्त को तब
हुई थी जब कवाल गांव में दो
गुटों में झगड़ा हुआ था और
तीन लोगों की मौत हुई थी. इसके
बाद शनिवार को फिर सुबह से
हिंसा की शुरुआत हुई जिसमें 12
लोगों की मौत हुई है.

पुलिस के मुताबिक एक समुदाय
के लोगों ने शनिवार को पंचायत
बुलाई थी. पंचायत खत्म होने
के बाद लोगों की भीड़ जब लौट
रही थी तब फिर से हिंसा भड़की,
जिसमें अलग अलग इलाकों में 12
लोगों की जान चली गई.

शहर के कोतवाली, नई मंडी और
सिविल लाइंस थाना इलाके में
कर्फ्यू लागू हैं.

सियासी आरोप-प्रत्यारोप

उत्तर प्रदेश की स्थिति
विस्फोटक है, लेकिन सियासी
पार्टियाँ हैं कि राजनीतिक
नफे-नुकसान के चक्कर में
एक-दूसरे पर आरोप लगाने से
बाज़ नहीं आ रही हैं.

बीएसपी नेता सुधींद्र
भदौड़िया का कहना है कि यूपी
की मौजूदा सरकार राज्य में
कानून-व्यवस्था और
सांप्रदायिक सौहार्द बरकरार
रखने में नाकाम है. हालात को
देखते हुए केंद्र को
हस्तक्षेप करना चाहिए.

हालांकि, सत्ताधारी
समाजवादी पार्टी के नेता
रामआसरे कुशवाहा का कहना है
कि मुख्यमंत्री अखिलेश ने
सख्त आदेश दिया है कि जिसकी
भी संलिप्तता है, उसके खिलाफ
कार्रवाई की जाएगी, बख्शा
नहीं जाएगा.

कुशवाहा के मुताबिक,
“विरोधियों की साजिश है.
समाजवादी पार्टी अच्छा काम
कर रही है, बहुमत में है.
विपक्ष चाहता है कि विकास का
काम अवरुद्ध हो. विपक्ष की
साजिश की बू आती है. 84कोसी
परिक्रमा में भी दंगों की
साजिश थी. दंगा भड़काने के
लिए ये लोग मुज़फ़्फरनगर
पहुंचे हैं. 24 घंटे के अंदर
दंगों पर पूरी तरह से काबू
पाया जाएगा.”

लेकिन बीजेपी समाजवादी
पार्टी को ही दंगे के लिए
जिम्मेदार करार दे रही है.

बीजेपी नेता सिद्धार्थ नाथ
ने आज इलाहाबाद में कहा,
“समाजवादी पार्टी
सांप्रदायिक विचारधारा की
पार्टी है. वे ध्रुवीकरण की
राजनीति का खेल खेलती हैं और
मुज़फ़्फ़रनगर की हिंसा की
यही वजह है. इससे पहले भी 34-35
सांप्रदायिक हिंसा की
घटनाएँ हो चुकी हैं. वे वोट की
ख़ातिर ऐसी राजनीति कर रही
है. राज्य में कानून-व्यवस्था
की हालत निहायत ख़स्ता है.
हमें सोचना चाहिए कि देश के
लोग क्या चाहते हैं.”

अब तक 30 दंगे

उत्तर प्रदेश में डेढ़ साल
पहले जब एक युवा के कंधों पर
देश के सबसे बड़े राज्य के
मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी
सौंपी जा रही थी तो हर तरफ
उम्मीद का सैलाब उमड़ा पड़ा
था. आलोचकों को भी एक नई किरण
दिखाई दे रही थी.

लेकिन अब उम्मीद से ज्यादा
आशंकाएं उन्हें परेशान कर
रही हैं. ऐसा होना लाजमी है
क्योंकि बीते डेढ़ साल में
ऐसा कोई महीना नहीं गुज़रा है
जब राज्य में सांप्रदायिक
हिंसा के नाम पर खूनी खेल
नहीं खेला गया हो.

सरकार के आंकड़े ही बताते हैं
कि बीते डेढ़ साल में राज्य
के अलग अलग हिस्सों में 30 दंगे
हुए हैं और इन दंगों के दौरान
58 जानें जा चुकी हैं.

इसी साल फरवरी में यूपी
विधानसभा में सरकार ने जो
जवाब दिया था, उसमें अखिलेश
सरकार के दौरान 27 दंगों की
जानकारी दी गई थी. इसके बाद से
तीन और दंगे हुए हैं.

इन दंगों के अलावा अखिलेश
सरकार के कार्यकाल के दौरान
छिटपुट सांप्रदायिक हिंसा
की 134 घटनाएं हुईं.

इनमें मुजफ्फरनगर, मथुरा,
बरेली और गाजियाबाद के दंगे
सबसे ज्यादा भड़के. इन दंगों
में कल की घटना को मिलाकर अब
तक 58 लोगों की मौत हो चुकी है
और 750 लोग घायल हुए.

अफसोस की बात यह है कि साल 1992
में जब देश के शहर दर शहर
दंगों की लपेट में थे…
सांप्रदायिक उन्माद अपनी
चरम पर था, तब भी बाबरी
मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद
के गढ़ फैजाबाद में दंगे की
आग नहीं भड़की, लेकिन अखिलेश
के वर्तमान कार्यकाल में
पिछले साल फैजाबाद में भी
दंगे हुए.

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Web Title: मुजफ्फरनगर सांपद्रायिक हिंसा में 12 की मौत, तैनात की गई सेना
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