मुस्लिमों से जुड़ी संवैधानिक संस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा: मोदी

मुस्लिमों से जुड़ी संवैधानिक संस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा: मोदी

By: | Updated: 05 May 2014 10:23 PM

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों के बीच किसी भी तरह के भय को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि इस समुदाय के कल्याण से जुड़ी किसी भी मौजूदा संवैधानिक या वैधानिक संस्था को समाप्त करने की आशंका को खारिज कर दिया और कहा कि वह इन संस्थाओं को मजबूत करने के लिए काम करेंगे.

 

धर्मनिरपेक्षता को पश्चिम से आयातित अवधारणा बताते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिमों का वोट पाने के लिए इसका इस्तेमाल किया और अब कांग्रेस और अन्य पार्टियां इस समुदाय का उपयोग ‘वोट बैंक’ के लिए कर रहीं हैं.

 

उर्दू साप्ताहिक ‘नई दुनिया’ को दिये इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिये हैं और भारत के डीएनए में सभी धर्मों के लिए सद्भावना और सम्मान है.

 

जब मोदी से अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम जैसी संस्थाओं को बंद करने की उनके आलोचकों की आशंकाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘संवैधानिक और वैधानिक निकायों को मजबूत करने की जरूरत है, उन्हें समाप्त नहीं करना है.’’ मोदी ने कहा, ‘‘जरूरत है कि उन्हें लाभप्रद और मजबूत बनाया जाए ताकि वे सांकेतिक कदमों वाली मौजूदा प्रणाली पर चलते रहने के बजाय ठोस काम करें.’’क्या भाजपा समान नागरिक संहिता लाएगी, इस प्रश्न पर मोदी ने कहा कि इसे लागू करने का मतलब यह नहीं है कि देश के सभी नागरिकों पर हिंदू संहिता लागू की जाएगी. उन्होंने कहा, ‘‘संविधान कहता है कि सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करेगी. मेरा मानना है कि हिंदू संहिता में अनेक प्रावधान हैं जो अप्रासंगिक हैं और उन्हें सुधारने की जरूरत है. 21वीं सदी में 18वीं सदी के कानूनों को लेकर चलना गैर जरूरी है.’’ भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता को लागू करने के बिंदु को शामिल किया है.

 

मोदी ने कहा कि जातियों और धर्मों को लेकर ‘अतिवाद’ का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए किया जाता रहा है. उन्होंने धार्मिक तथा जातीय हिंसा के दोषियों के लिए ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाने पर जोर दिया.

 

उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सरकारी कार्रवाई से ज्यादा महत्वपूर्ण समाज के विभिन्न तबकों के बीच संवाद होता है.

 

मोदी ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद से किया जाता रहा है और मौजूदा राजनीति इसके इर्दगिर्द घूम रही है.

मोदी ने कहा, ‘‘इसका इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने और डराने के लिए तथा गरीबी, निरक्षरता और बेरोजगारी जैसे मुख्य मुद्दों से भटकाने के लिए किया जाता रहा है. राजनीतिक दल धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुस्लिमों को डरा रहे हैं और उन्हें वोट बैंक बना रहे हैं.’’ संविधान की प्रस्तावना में 1976 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लाये गये 42वें संविधान संशोधन के जरिये शब्द ‘धर्मनिरपेक्षता’ (सेकुलरिज्म) को शामिल किया गया था.

 

एक कार्यक्रम में मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार करने के बाद आलोचनाओं का सामना करते आ रहे गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि मुस्लिम धार्मिक प्रतीकों का उपयोग इबादत के लिए होना चाहिए न कि राजनीतिक फायदों के लिए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा विचार है कि मुस्लिम टोपी को लेकर राजनीति अब बंद होनी चाहिए क्योंकि किसी की धार्मिक आस्था को लेकर राजनीति निंदनीय है. मुस्लिमों की आस्था के प्रतीक को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए.’’ मोदी ने कहा, ‘‘न तो इसका अपमान किया जाना चाहिए, न ही इस पर कोई राजनीति होनी चाहिए.’’ जब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार से सवाल किया गया कि क्या वह मुस्लिमों के प्रति इसलिए कड़वाहट रखते हैं क्योंकि वे भाजपा को वोट नहीं देते तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे चुनावी पंडितों के इस तरह के विश्लेषण पर संदेह है. यह कहना पूरी तरह गलत है कि मुस्लिम भाजपा को वोट नहीं देते. पार्टी को मिल रहा अपार समर्थन इस बात का सबूत है कि सभी धर्म और संप्रदायों के लोग हमारे साथ हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कड़वाहट का कोई सवाल ही नहीं उठता है. विधानसभा चुनावों से साबित हो गया है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम भाजपा के साथ खड़े हैं. यह भ्रामक प्रचार बंद होना चाहिए और एक समुदाय को गुमराह करने का खेल समाप्त होना चाहिए.’’

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