मेरी जिंदगी में ऐसे दिन देखने को मिलेंगे, सोचा भी नहीं था: आसाराम

By: | Last Updated: Wednesday, 23 October 2013 5:24 AM

<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
<b>अहमदाबाद:
</b>आसाराम ने पिछले दो दशक के
अंदर की सबसे लंबी सड़क
यात्रा की कल रात. यात्रा भी
ऐसी, जिसके लिए न तो आसाराम
मानसिक तौर पर तैयार थे और न
ही इसके बारे में उनको भनक
लगी थी. अहमदाबाद पुलिस कल
शाम सवा चार बजे जब आसाराम को
गांधीनगर की अदालत से लेकर
बाहर निकली, तो सबको ये लगा कि
आसाराम को करीब बीस किलोमीटर
की दूरी पर मौजूद साबरमती
सेंट्रल जेल पहुंचाया जा रहा
है. गांधीनगर की अदालत का
आदेश भी यही था कि न्यायिक
हिरासत के तहत आसाराम को
अहमदाबाद की इसी जेल में रखा
जाए.
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
अहमदाबाद पुलिस ने इससे पहले
कोर्ट के सामने ये कहा था कि
सुरक्षा कारणों से वो आसाराम
को साबरमती सेंट्रल जेल की
जगह खेड़ा जिले के मुख्यालय
नडियाद की जेल में रखना चाहती
है. लेकिन अदालत ने आसाराम को
साबरमती ले जाने का ही हुक्म
दिया. ऐसे में माना ये जा रहा
था कि आसाराम साबरमती जेल में
अगले एक-दो दिन रह सकते हैं,
क्योंकि पचीस अक्टूबर तक
उन्हें जोधपुर पहुंचाने की
जिम्मेदारी थी अहमदाबाद
पुलिस की.
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
http://www.youtube.com/watch?v=otdTQzuKq10<br />
</p>
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अहमदाबाद पुलिस आसाराम को
लेकर साबरमती जेल गई भी,
लेकिन महज कुछ मिनटों के लिए.
जेल के रजिस्टर में उनकी
‘इंट्री’ डाली गई और फिर
उन्हें लेकर पुलिस वहां से
निकल गई. कहां कयास ये लगाये
जा रहे थे कि साबरमती जेल में
आसाराम की अपने खास चेले और
गुजरात पुलिस के निलंबित
डीआईजी डीजी वणजारा से
मुलाकात हो जाएगी, लेकिन हुआ
कुछ उल्टा ही. कई फर्जी
मुठभेड़ मामलों के आरोपी
वणजारा से आसाराम की मुलाकात
का कोई संयोग बने, उससे पहले
ही अहमदाबाद पुलिस आसाराम को
वहां से लेकर निकल गई. जब
साबरमती जेल से पुलिस की
गाड़ियों का काफिला आगे बढ़ा,
तो सबको ये लगा कि पहले की
योजना के मुताबिक ही आसाराम
को सुरक्षा कारणों से नडियाद
जेल ‘शिफ्ट’ किया जा रहा है.
लेकिन जब गाड़ी नडियाद के
रास्ते पर आगे बढ़ने की जगह
महेसाणा के रास्ते पर आगे
बढ़ी, तो काफिले का पीछा करते
मीडियाकर्मी हैरत में पड़
गये. इधर क्यों जा रही है
गाड़ियां, सोचने लगे
मीडियाकर्मी. किसी तरह
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से
बात हुई, तो उन्होंने संकेत
दिया कि आसाराम को सीधे ले
जाया जा रहा है जोधपुर, वो भी
सड़क मार्ग से. इससे पहले
अहमदाबाद पुलिस जब जोधपुर से
आसाराम को अहमदाबाद लेकर आई
थी, तो हवाई जहाज से वाया
मुंबई होकर. फिर अचानक सड़क
मार्ग से क्यों आसाराम को
जोधपुर लेकर जाने का फैसला
किया गया, वो भी करीब साढ़े
पांच सौ किलोमीटर लंबी
यात्रा, रात के अंधेरे में.
</p>
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अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर
शिवानंद झा ने जल्दी ही इस
सवाल का जवाब दे दिया. एबीपी
न्यूज़ से बातचीत में झा ने
कहा कि उन्हें खुफिया सूचना
मिली थी कि आसाराम के समर्थक
मुंबई होकर जोधपुर की
उड़ानों में बड़े पैमाने पर
बुकिंग करा चुके थे. ऐसे में
विमान मार्ग से आसाराम को ले
जाए जाने पर वैसे ही हालात
पैदा होते, जैसे आसाराम को
जोधपुर से अहमदाबाद लाते हुए
पैदा हुए थे. विमान के अंदर
सैकड़ों की तादाद में मौजूद
आसाराम समर्थकों ने जमकर
हंगामा किया था, खास तौर पर
मुंबई से अहमदाबाद की उड़ान
के दौरान. टेकऑफ से लेकर
लैंडिंग तक वे अपने सीट पर
नहीं बैठे थे और केबिन क्रु
से लेकर पुलिसकर्मियों तक से
जूझते रहे थे, नारा लगाते रहे
थे. ऐसे में अहमदाबाद पुलिस
धरती से करीब पैंतीस हजार फीट
की उंचाई पर फिर से वैसे
हालात का सामना नहीं करना
चाहती थी. पुलिस की ये आशंका
अनायास भी नहीं थी, जैसे ही
आसाराम के सड़क मार्ग से
जोधपुर ले जाये की खबर
सार्वजनिक हो गई, अहमदाबाद से
वाया मुंबई जोधपुर तक की दो
उड़ानों में सैकड़ों की
तादाद में टिकट रद्द हो गये,
यानी आसाराम समर्थकों के अब
विमान मार्ग से जोधपुर जाने
का कोई मतलब नहीं रह गया था.
</p>
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अहमदाबाद पुलिस के इस कदम से
आसाराम के समर्थक हतप्रभ रह
गये. कहां वो आसाराम की एक झलक
पा लेने के लिए वो गुजरात
एटीएस के दफ्तर से लेकर
गांधीनगर कोर्ट तक सैकड़ों
की तादाद में जुटे रहते थे और
कहां जब पुलिस का काफिला
आसाराम को लेकर जोधपुर के लिए
निकल गया, तो उन्हें भनक तक
नहीं लगी.
</p>
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http://www.youtube.com/watch?v=wErT4mI1-k4<br />
</p>
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<b>अहमदाबाद पुलिस की
‘सरप्राइज मूव’</b>
</p>
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अहमदाबाद पुलिस ‘सरप्राइज
मूव’ के तहत आसाराम को जोधपुर
की तरफ सड़क मार्ग से लेकर
रवाना तो हो गई, लेकिन
सावधानी में कोई कमी नहीं रखी
गई. शाम सवा पांच बजे के करीब
जब पुलिस का पूरा काफिला
साबरमती सेंट्रल जेल से
जोधपुर के लिए रवाना हुआ, तो
पुलिस कर्मी दर्जनों में
नहीं, बल्कि सैकड़ों की तादाद
में थे. अहमदाबाद के एडिशनल
पुलिस कमिश्नर और आसाराम के
खिलाफ की जा रही जांच के लिए
गठित एसआईटी के अध्यक्ष जेके
भट्ट की अगुआई में करीब सवा
सौ पुलिसकर्मी चौदह
गाड़ियों में सवार थे और इनके
बीच में थी आसाराम को ढो रही
प्रिजन वैन. तैयारी इस बात की
रखी गई थी कि अगर आसाराम के
समर्थक रास्ते में कोई
उत्पात करने की कोशिश करें,
तो उनसे निबटा जा सके.
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
रास्ते में जितने भी जिले
लगते थे, उन सबके पुलिस
अधीक्षकों को भी सूचना दे दी
गई थी. यात्रा के तहत ये
काफिला गुजरात के चार जिलों-
गांधीनगर, महेसाणा, पाटण और
बनासकांठा से गुजरा तो
राजस्थान में सिरोही, पाली और
आखिरकार जोधपुर में यात्रा
खत्म हुई. हर जगह एडवांस में
स्थानीय पुलिस सड़कों पर
पेट्रोलिंग कर रही थी.
</p>
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सवाल ये उठता है कि पुलिस के
सुरक्षा इंतजाम तो एक तरफ,
खुद आसाराम का हाल क्या था.
आसाराम को साबरमती जेल ले
जाकर जब पुलिस तुरंत उन्हें
लेकर आगे बढ़ी, तो आसाराम को
भी यही लगा कि वो बगल की
नडियाद जेल में जा रहे हैं.
लेकिन घंटे भर बाद उन्हें पता
चला कि वो नडियाद न जाकर सीधे
जोधपुर ले जाये जा रहे हैं. वो
एक सितंबर से ही पुलिस लॉकअप
या न्यायिक हिरासत के तहत
जोधपुर की जेल में रहे थे,
नाबालिग युवती से यौन शोषण के
आरोप के मामले में. वहां से
चौदह अक्टूबर को वो आए थे
अहमदाबाद, उस युवती की तरफ से
दर्ज कराई गई शिकायत की जांच
के सिलसिले में, जो एक समय
उनकी शिष्या रही थी. सूरत की
युवती ने अपनी फरियाद में
आसाराम पर बलात्कार और
शारीरिक शोषण का आरोप लगाया
है.
</p>
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<b>जब आसाराम को अहसास हुआ…</b>
</p>
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जब आसाराम को असली माजरा समझ
में आया, तो उन्होंने प्रिजन
वैन में मौजूद आठ
पुलिसकर्मियों से सवाल किया
कि आखिर उन्हें क्यों सड़क
मार्ग से जोधपुर लेकर जाया जा
रहा है. खीझे हुए आसाराम ने
कहा कि अगर पुलिस हवाई जहाज
का खर्चा बर्दाश्त नहीं कर
सकती थी, तो उन्हें बताती, वो
चार्टर्ड विमान कर लेते.
दरअसल आसाराम ये कहते हुए भूल
गये कि वो रसूखदार और मालदार
संत की जगह अब पुलिस के लिए
बलात्कार के आरोपी हैं. जब
आसाराम को थोड़ी देर बाद इसका
अहसास हुआ तो मुंह से शब्द
निकले- मेरी जिंदगी में ऐसे
दिन देखने को मिलेंगे, सोचा
भी नहीं था.
</p>
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आसाराम को पिछले दो दशकों से
सड़क मार्ग के जरिये लंबी
यात्रा करने की आदत नहीं रही
है. ज्यादातर मौकों पर वो या
तो हेलिकॉप्टर या फिर ज्यादा
लंबी दूरी के लिए हवाई जहाज
से जाते रहते हैं. अगर सड़क
यात्रा कुछ किलोमीटर की करनी
भी पड़ती थी, तो उनकी शान में
मौजूद रहती थी वैभवी और
अत्यंत आरामदेह गाड़ियां.
इसकी तुलना में प्रिजन वैन की
सख्त सीट पर 74 वर्षीय आसाराम
के लिए पांच सौ किलोमीटर से
लंबी यात्रा करना हड्डियां
हिला देने वाला था.
</p>
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यात्रा के शुरुआती दो घंटे
में ही जब आसाराम का धैर्य
खत्म होने लगा, तो उसका स्थान
गुस्से ने ले लिया. आसाराम
गुजरात पुलिस और गुजरात
सरकार दोनों को कोसने में लग
गये. चिल्लाते हुए आसाराम
कहने लगे – दगाबाज लोग हैं ये,
मेरे साथ धोखा हो गया. कहां
आसाराम तीन महीने पहले तक
अपने भक्तों की बड़ी संख्या
और रसूख के कारण वीवीआईपी की
तरह ‘ट्रीट’ किये जाते थे और
कहां एक सामान्य आरोपी के तौर
पर प्रिजन वैन में उनको
जोधपुर भेजा जाना. आसाराम के
लिए इसे पचा पाना आसान नहीं
था.
</p>
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http://www.youtube.com/watch?v=PExPwAXSTck<br />
</p>
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प्रिजन वैन की पटरानुमा
सीटों पर जब आसाराम की
हड्डियां अकड़ने लगीं, तो
उनके भाव-भंगिमाओं की अकड़
गायब होने लगी. गुजरात से
राजस्थान बोर्डर क्रॉस
करते-करते आसाराम प्रिजन वैन
की सतह पर ही लेटने को तैयार
हो गये. उंचे स्थान पर बैठने
के आदी आसाराम को पुलिस
कर्मियों के सामने ही नीचे
लेटने में शर्म नहीं आई. कहां
आसाराम पहले अन्न-जल त्यागने
की धमकी दे रहे थे और कहां
विपरीत हालात ने उन्हें सेब
खाकर अपनी क्षुधा शांत करने
पर मजबूर कर दिया. हड्डियां
जब और हिल गईं, तो वो फटाफट एक
पतले गद्दे पर प्रिजन वैन की
फ्लोर पर ही लेट गये. थकान ऐसी
हुई कि कुछ ही देर में आसाराम
को नींद भी लग गई. हालांकि
सोते-सोते आसाराम वैन में
मौजूद एक युवा प्रोबेशनर
आईपीएस अधिकारी को पुचकारते
नजर आए, कह डाला कि तुम तो मेरी
पोती के समान हो.
</p>
<p xmlns=”http://www.w3.org/1999/xhtml”>
साढे पांच सौ किलोमीटर की
यात्रा आज तड़के तीन बजकर
पैंतीस मिनट पर तब पूरी हई, जब
अहमदाबाद पुलिस आसाराम को
लेकर जोधपुर की जेल तक आ
पहुंची. यहां पहुंचने के बाद
ही आसाराम की नींद खुली.
लेकिन प्रिजन वैन में कल शाम
चार बजे से बैठे आसाराम को
उससे मुक्ति पाने में कुल
चौदह घंटे लग गये. नियमों के
मुताबिक, सुबह छह बजे के पहले
आसाराम की जेल में इंट्री
नहीं हो सकती थी, इसलिए अगले
ढाई घंटे भी आसाराम ने प्रिजन
वैन में ही बैठकर बिताये.
सुबह छह बजे अहमदाबाद पुलिस
के अधिकारियों ने औपचारिकता
पूरी की और आसाराम की कस्टडी
जोधपुर जेल के अधिकारियों को
सौंप दी. इसी जेल से चौदह
अक्टूबर की सुबह ग्यारह बजे
लेकर निकले थे अहमदाबाद
पुलिस के अधिकारी आसाराम को.
दोनों यात्राओं में फर्क
सिर्फ इतना था कि जब जोधपुर
से आसाराम अहमदाबाद के लिए
निकले, तो ज्यादातर लोगों को
उनके हवाई मार्ग से जाने का
पता था, लेकिन अहमदाबाद से जब
उन्हें जोधपुर सड़क मार्ग से
पहुंचाने के लिए पुलिस निकली,
तो गिनती के अधिकारियों के
अलावा किसी को पता नहीं थी,
आसाराम के चेलों की कौन कहे.
जाहिर है, इस यात्रा को न तो
आसाराम भूल पाएंगे और न ही
उनके हजारों चेले, जो मन मसोस
कर रह गये, कोई तमाशा नहीं कर
पाए.<br />
</p>

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