मोदी का इंटरव्‍यू लेने की सजा, शाहिद सिद्दिकी की छुट्टी

मोदी का इंटरव्‍यू लेने की सजा, शाहिद सिद्दिकी की छुट्टी

By: | Updated: 28 Jul 2012 12:30 AM














नई दिल्‍ली: गुजरात
दंगों पर मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू
लेना समाजवादी पार्टी के
नेता और उर्दू अखबार 'नई
दुनिया' के संपादक शाहिद
सिद्दीकी को महंगा पड़ा है.
शाहिद सिद्दीकी को पार्टी से
निकाल दिया गया है.

हैरानी
की बात यह है कि समाजवादी
पार्टी की ओर से जो बयान जारी
किया गया है उसमें ये कहा गया
है कि सिद्दीकी पार्टी में थे
ही नहीं.

इस बारे में
समाजवादी पार्टी के महासचिव
रामगोपाल यादव ने कहा है कि
शाहिद सिद्दकी भले ही खुद को
पार्टी का सदस्‍य बताएं
लेकिन वे बहुत पहले ही पार्टी
छोड़कर जा चुके हैं और उनका
समाजवादी पार्टी से कोई
लेना-देना नहीं है.

समाजवादी
पार्टी ने एक बयान जारी कर
साफ कर दिया है कि पार्टी की
ओर से सिर्फ चार लोग ही
आधिकारिक तौर पर प्रवक्‍ता
होंगे. जब इस आदेश की वजह पूछी
गई तो एबीपी न्‍यूज़ के साथ
खास बातचीत करते हुए
रामगोपाल यादव ने कहा, 'कुछ
लोग रोजाना दिल्‍ली में
चैनलों में जाकर खुद को
समाजवादी पार्टी का नेता
बताते थे. यही नहीं वे चैनलों
में आयोजित होने वाली बहसों
में भी पार्टी के प्रतिनिधि
के रूप में बात करते थे, जो
पार्टी की निति के खिलाफ होता
था. जैसे शाहिद सिद्दकी हैं,
ये पार्टी में कभी नहीं थे.'




उन्‍होंने कहा, 'शाहिद
सिद्दिकी न्‍यूक्लियर डील
के दौरान पार्टी छोड़कर
बीएसपी में चले गए थे.
उन्‍होंने बीएसपी की सीट पर
बिजनौर से चुनाव लड़ और उसके
बाद लोक दल में चले गए. इसी तरह
से कई और लोग भी थे जो टीवी
चैनलों की बहस में शामिल होते
थे, जिन्‍हें हम जानते भी
नहीं हैं. इसी वजह से हमें ये
बयान जारी करना पड़ा.'

यह
पूछे जाने पर कि क्‍या शाहिद
सिद्दिकी के खिलाफ पार्टी
कोई अनुशासनात्‍मक कार्रवाई
करेगी, 'रामगोपाल यादव ने कहा,
वह पार्टी में हैं ही नहीं.
मैं मीडिया से अपील करता हूं
कि उन्‍हें समाजवादी पार्टी
के नेता या प्रति‍निधि के रूप
में प्रदर्शित न करें." 

समाजवादी
पार्टी के महासचिव रामगोपाल
यादव भले ही कह रहे हों कि
शाहिद सिद्दीकी पार्टी में
थे ही नहीं, लेकिन सच कुछ और ही
है.

दरअसल, यूपी में
विधानसभा चुनाव से पहले आठ
जनवरी को शाहिद सिद्दीकी
समाजवादी पार्टी में शामिल
हुए थे. उस वक्त समाजवादी
पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम
खान ने पार्टी में शाहिद
सिद्दीकी के स्वागत में शेर
भी पढा था.





गौरतलब है कि शाहिद सिद्दीकी
ने मोदी का इंटरव्यू लेने के
बाद कहा था कि वो पहले
पत्रकार हैं और बाद में नेता
हैं.




राजनेताओं की प्रतिक्रिया





समाजवादी पार्टी महासचिव और
उत्तर प्रदेश के शहरी विकास
मंत्री आजम खान ने शाहिद
सिद्दीकी को पार्टी से
निकाले जाने के फैसले को सही
बताया है. आजम खान ने आज
रामपुर में कहा कि मोदी से
दोस्ती बर्दाश्त नहीं है.

शाहिद
सिद्दीकी ने समाजवादी
पार्टी के फैसले पर अब तक
प्रतिक्रिया नहीं दी है और वह
रविवार को अपना बयान दे सकते
हैं. वहीं, बीजेपी प्रवक्ता
शाहनवाज हुसैन का कहना है कि
शाहिद सिद्दीकी ने पत्रकार
धर्म निभाया.

गुजरात
बीजेपी ने इस फैसले को लेकर
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष
मुलायम सिंह यादव पर निशाना
साधा है.




कौन हैं शाहिद सिद्दिकी?




15 अगस्त 1949 को दिल्ली में
जन्मे शाहिद सिद्दीकी के
राजनीतिक सफर की शुरुआत
इंडियन नेशनल कांग्रेस के
साथ हुई थी. बाद में
उन्‍होंने समाजवादी पार्टी
का दामन थाम लिया और राज्यसभा
सांसद बन गए.




साल 2008 में शाहिद सिद्दीकी
समाजवादी पार्टी से नाता
तोड़कर बहुजन समाज पार्टी
में शामिल हो गए. लेकिन साल भर
बाद ही उन्हे बीएसपी से बाहर
कर दिया गया और उन्‍होंने
आरएलडी का दामन थाम लिया.




हरित प्रदेश के मुद्दे पर
चौधरी अजित सिंह से मतभेद
होने के बाद शाहिद ने आरएलडी
से नाता तोड़ लिया और साल 2012 के
यूपी चुनाव से पहले एक बार
फिर समाजवादी पार्टी के साथ आ
गए.
 
राजनीति के साथ ही
शाहिद सिद्दीकी पत्रकारिता
से भी जुड़े रहे और इस वक्त वो
'नई दुनिया' साप्ताहिक
पत्रिका के संपादक हैं।





http://www.youtube.com/watch?v=HDHeF9HEaV8




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