मोदी के रथ को रोकने के लिए दो 'दुश्मन' हुए 'एक'

By: | Last Updated: Tuesday, 29 April 2014 12:59 PM
मोदी के रथ को रोकने के लिए दो ‘दुश्मन’ हुए ‘एक’

नई दिल्ली. मुख्तार अंसारी की ओर से वाराणसी में कांग्रेस के उम्मीदवार अजय राय को समर्थन का एलान कर दिया गया है. अब सवाल ये है कि कि क्या दो बाहुबली मिलकर वाराणसी में मोदी के लिए मुश्किल बढ़ाएंगे.

 

बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन का एलान कर दिया. अब बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस से चुनौती दे रहे बाहुबली अजय राय को मुख्तार का समर्थन हासिल हो गया है. इसकी घोषणा मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी ने किया है.

 

नरेंद्र मोदी को हराने के लिए अफजाल अंसारी ने व्यक्तिगत दुश्मनी को किनारे रख दिया.. 2009 में बीएसपी के टिकट से मुख्तार अंसारी मैदान में थे जबकि बीएसपी से टिकट न मिलने पर समाजवादी पार्टी के टिकट पर अजय राय ने चुनाव लड़ा था. मुख्तार दूसरे नंबर पर रहे थे और सिर्फ 17 हजार वोटों से बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी से हारे थे जबकि अजय राय तीसरे नंबर पर थे लेकिन इस बार मुख्तार और अजय राय ने हाथ मिला लिया है.

 

2009 में मुरली मनोहर जोशी को 2 लाख 3 हजार 122 वोट मिले थे जबकि मुख्तार अंसारी को 1 लाख 85 हजार 911 वोट और अजय राय को 1 लाख 23 हजार 874 वोट मिले. अब अजय राय और मुख्तार हाथ मिला चुके हैं ऐसे में अगर 2009 में इन दोनों को मिले वोट को जोड़ा जाए बीजेपी से एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे.

 

वाराणसी में कुल 16 लाख मतदाता हैं जिसमें पटेल यानी कुर्मी समुदाय की संख्या करीब 2 लाख के आसपास है. 2 लाख ब्राह्मण मतदाता हैं. 2 लाख भूमिहार वोटर . 2 लाख वैश्य. एक लाख यादव और करीब एक लाख दलित वोटर हैं. ओबीसी वोटरों की संख्या भी करीब 2 लाख है. वाराणसी में मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा करीब 3 लाख के आसपास है.

 

एक लाख भूमिहार वोटरों पर अजय राय की अच्छी पकड़ बताई जा रही है और मुख्तार के समर्थन के बाद मुस्लिम वोटर अजय राय के पक्ष में जा सकते हैं.

 

दुश्मन बने दोस्त !

 

अजय राय और मुख्तार अंसारी के बीच दुश्मनी पुरानी है. साल 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा. मुख्तार इसी हत्याकांड के बाद से जेल में है. कृष्णानंद राय के रिश्तेदार अजय राय हैं. अजय राय के भाई की भी हत्या का शक अंसारी बंधुओं पर जताया गया था. तभी से मुख्तार और अजय राय के बीच दुश्मनी चल रही थी. लेकिन मोदी को हराने के लिए अब मुख्तार और अजय राय ने हाथ मिला लिया है.

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