यहां पढ़ें किस सूबे में किसकी लहर है?

By: | Last Updated: Thursday, 24 April 2014 1:13 PM

नई दिल्ली. गुरुवार को 543 सीटों में से 349 सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं . अब सिर्फ तीन चरण के चुनाव होने बाकी है .  2009 के नतीजों के मुताबिक तब 349 सीटों में से यूपीए को 165 और एनडीए को 112 सीटें मिली थी . जबकि 72 सीटें अन्य के खाते में गई थी.

 

 

इस दौर के चुनाव के साथ ही महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, असम, छत्तीसगढ़ और झारखंड में वोटिंग खत्म हो गई .

 

महाराष्ट्र में किसकी लहर ?

 

मुंबई की 6 सीटों के साथ ही राज्य की सभी 48 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई. पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार यहां समीकरण बदले हुए थे. मुंबई में जहां आम आदमी पार्टी खुद को साबित करने में जुटी रही वहीं एमएनएस ने शहर में बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारकर कांग्रेस विरोधी वोट को बंटने से रोकने की कोशिश की .

 

पिछली बार राज ठाकरे की वजह से एनडीए उम्मीदवारों को करीब दस सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था . 2009 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से यूपीए को 25 एनडीए को 20 और अन्य को 3 सीटें मिली थीं .

 

मध्य प्रदेश में किसकी लहर ?

 

10 सीटों पर वोटिंग के साथ ही मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जबरदस्त कामयाबी मिली थी .

 

2009 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से यूपीए को 12 और एनडीए को 16 सीटें मिली थीं . एक सीट अन्य के खाते में गई थी .

 

राजस्थान में किसकी लहर ?

 

पांच सीटों पर वोटिंग के बाद राजस्थान की सभी 25 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई. बीजेपी को उम्मीद है कि नतीजे विधानसभा चुनाव की तरह ही होंगे हालांकि कांग्रेस को बीजेपी के घर में फूट से अपने लिए उम्मीद की किरण दिख रही है .

 

जहां तक 2009 के लोकसभा चुनाव की बात है तो राजस्थान की 25 सीटों में यूपीए को 20 और एनडीए को 4 सीटें मिली थीं जबकि एक सीट अन्य के खाते में गई थी .

 

तमिलनाडु में किसकी लहर ?

 

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता भी प्रधानमंत्री पद की दावेदार हैं . वोट डालने के बाद जयललिता ने अपनी पार्टी की जीत का दावा भी किया . राज्य की सभी 39 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है . इस बार कांग्रेस का किसी से गठबंधन नहीं था और डीएमके भी अकेले चुनाव लड़ रही है जबकि बीजेपी छोटे दलों के साथ मोर्चा बनाकर मैदान में उतरी थी .

 

जहां तक 2009 के चुनाव की बात है तो तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन था और दोनों ने मिलकर 39 में से 27 सीटें जीती थीं जबकि एनडीए को एक भी सीट नहीं मिली थी. जयललिता के गठबंधन को 12 सीटें मिली थी.

 

झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम की सभी सीटों पर वोटिंग खत्म हो चुकी हैं . इन तीनों राज्यों को मिलाकर कुल 39 सीटें हैं .

 

2009 लोकसभा चुनाव में झारखंड की 14 सीटों में से 3 सीटें यूपीए के पास थीं जबकि 8 सीटें एनडीए के पास. 3 सीटों पर अन्य का कब्जा था .

 

2009 के चुनाव में छत्तीसगढ़ की 11 सीटों में से एनडीए के खाते में गई थी 10 सीटें जबकि यूपीए को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था .

 

असम में 2009 की 14 सीटों में से यूपीए को 8 सीटें मिली थीं जबकि एनडीए को 5 सीटें मिली थीं . एक सीट अन्य के खाते में गई थी .

 

कुल मिलाकर 2009 के चुनाव में झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम की 39 सीटों में से यूपीए को 12 सीटें मिली थी जबकि एनडीए के खाते में 23 सीटें गई थी . अन्य दलों को 4 सीटें मिली थी .

 

यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बडे राज्यों में अभी कई सीटों पर चुनाव होने हैं . अब बड़ा सवाल ये कि देश के बदले राजनीतिक माहौल मे कौन आगे बढ रहा है .

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