' यहां सरदर्द से लेकर मलेरिया तक सबके लिए एक ही दवा'

By: | Last Updated: Wednesday, 5 March 2014 12:01 PM
‘ यहां सरदर्द से लेकर मलेरिया तक सबके लिए एक ही दवा’

बारन: राजस्थान के बारन जिले में रहने वाले 250 सहरिया जनजाति के लोग सिरदर्द से लेकर मलेरिया तक हर बीमारी में वहां उपलब्ध हरी गोली लेकर काम चला लेते हैं. उनके गांव में दवा तो नहीं मिलती, लेकिन दारू की धारा बहती है.

 

बारन के बामन देह गांव की एक सहरिया कृषकाय 60 वर्षीय कौशल्या देवी ने कहा, “पूरे जीवन में जब भी मैं बीमार पड़ी, तब मैंने यही हरी गोली ली.” इस गांव के सहरिया राज्य के सबसे गरीब समुदायों में आते हैं.

 

यह हरी गोली कुछ और नहीं, बल्कि एक दर्द निवारक डायक्लोफेनेक सोडियम है. यह हरी पत्ती में आती है और इसे दो स्थानीय किराने की दुकान से खरीदा जा सकता है.

 

गांव में प्राथमिक चिकित्सा, शिक्षा, बिजली और सड़क की कोई सुविधा नहीं है.

 

दया राम की दो साल की बेटी पिछले साल अगस्त में किसी बीमारी से मर गई. बारिश के कारण गांव के करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से कट जाने के कारण उसे वहां नहीं ले जाया जा सका.

 

क्षीणकाय भूमिहीन किसान दयाराम ने आईएएनएस से कहा, “कोई बात नहीं. दूसरा बच्चा हो जाएगा. हम ऐसे ही जीते हैं.”

 

दो कमरों वाला आंगनबाड़ी खंडहर में तब्दील हो चुका है. गांव वाले कहते हैं, यह करीब एक दशक से काम नहीं कर रहा है.

 

जब आईएएनएस पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गया, तो वहां ताला लटका पाया. एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यहां पर तैनात महिला कई महीने से यहां नहीं आई है.”

 

गांव में सिर्फ 21 वर्षीय दिनेश कुमार सहरिया ने ही स्कूली शिक्षा हासिल की है और वह भी किसी और गांव से.

 

दिनेश ने आईएएनएस से कहा, “हमारे पास जमीन है, लेकिन हम डीजल से चलने वाले पंप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं है, इसलिए सिंचाई नहीं कर सकते.”

 

ऐसे में गांव के करीब सभी पुरुष मजदूरी करने बाहर चले जाते हैं.

 

उन्होंने बताया कि शराब ने गांव के पुरुषों को नकारा बना दिया है. वे अपनी महिलाओं को काम करने के लिए मजबूर करते हैं, ताकि उनके शराब का खर्च चल सके.

 

बहरहाल एक गैर सरकारी संस्था वर्ल्ड विजन इंडिया सहरिया समुदाय की बेहतरी के लिए काम कर रहा है. इसने गांव में कई सौर प्रकाश व्यवस्था लगाई है.

 

दिनेश ने कहा, “अब कम से कम रोशनी तो है. अब बच्चों को वह परेशानी नहीं झेलनी होगी, जो मैंने झेली है.”

 

संस्था गांव में एक सौर ऊर्जा चालित सिंचाई पंप भी लगाने की कोशिश कर रही है.

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Web Title: ‘ यहां सरदर्द से लेकर मलेरिया तक सबके लिए एक ही दवा’
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