यूपीए की बैठक में प्रणब मुखर्जी बने उम्मीदवार

यूपीए की बैठक में प्रणब मुखर्जी बने उम्मीदवार

By: | Updated: 15 Jun 2012 05:35 AM







नई दिल्ली: ममता बनर्जी के
तमाम विरोध के बावजूद यूपीए
ने सर्वसम्मति से
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार
के लिए वित्त मंत्री प्रणब
मुखर्जी के नाम का एलान किया.
बैठक के बाद यह घोषणा खुद
सोनिया ने की.




इस घोषणा के महज घंटे भर के
भीतर उत्तर प्रदेश के दो
विरोधी दलों समाजवादी
पार्टी  और बहुजन समाज
पार्टी ने प्रणब को समर्थन
देने की घोषणा कर डाली.




कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया
गांधी ने अपनी पार्टी और
सहयोगी दलों की एक बैठक के
बाद औपचारिक रूप से यह घोषणा
की. उन्होंने कहा कि मुखर्जी
का पांच दशकों का लम्बा और
शानदार सार्वजनिक सेवा का
रिकॉर्ड है.




सोनिया ने कहा कि राष्ट्रपति
पद के लिए उनके पक्ष में
व्यापक समर्थन है. यूपीए ने
सभी राजनीतिक दलों, सांसदों
और विधानसभाओं के सदस्यों से
भी मुखर्जी की उम्मीदवारी का
समर्थन करने की अपील की.




बैठक के बाद सोनिया ने कहा,
"सहयोगी दलों ने सहमति के साथ
यह फैसला किया है कि
राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब
मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया
जाए."




सोनिया ने आगे कहा, "प्रणब का
लंबी और प्रतिष्ठित
सार्वजनिक सेवा पिछले पांच
दशकों पर फैला हुआ है. उनके
नाम पर सहमति है. यूपीए सभी
पार्टीयों से अपील करती है कि
वह प्रणब का समर्थन करें."




राष्ट्रपति
पद के लिए यूपीए का उम्मीदवार
तय किए जाने के बाद प्रणब
मुखर्जी ने कहा कि वह सोनिया
गांधी और प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह के शुक्रगुज़ार
हैं.






प्रणब ने कहा, "मेरी पार्टी ने
राष्ट्रपति पद के लिए मुझे
उम्मीदवार चुना गया है. मैं
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया
गांधी और प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह का अभार व्यक्त
करता हूँ और इस फैसले को
स्वीकार करता हूं."




प्रणब को बधाई




जैसी ही सोनिया गांधी ने
प्रणब मुखर्जी के नाम का एलान
किया, बैठक में मौजूद यूपीए
के सदस्यों के जरिए प्रणब को
बधाई देने का सिलसिला शुरू हो
गया.




सोनिया गांधी ने सभी
पार्टियों से अपील की कि वह
प्रणब के उम्मीदवारी का
समर्थन करें.




प्रणब के
रायसीना की लड़ाई जीत लेने के
प्रबल आसार के बाद अब चर्चा
जोरों से शुरू हो गई है कि
आखिर उनके बाद वित्त मंत्री
और नेता सदन कौन होगा?






पश्चिम बंगाल की
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के
बुधवार को दिल्ली आने और
प्रणब मुखर्जी के नाम को
खारिज करने के बाद
राष्ट्रपति पद को लेकर
राजनीतिक उठापटक अपने चरम पर
पहुंच गई थी.




इस बीच शुक्रवार की शाम
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार
के लिए यूपीए की बैठक हुई
जिसमें सिर्फ और सिर्फ प्रणव
मुखर्जी के नाम पर चर्चा हुई
और बाद में उनके नाम का एलान
किया गया.




समर्थन




जम्मू और कश्मीर के
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
ने माइक्रोब्लागिग साइट
ट्विटर पर लिखा, "प्रणब दा
बधाई हो. मुझे इसमें कोई शक
नहीं है कि वह एक शानदार
राष्ट्रपति होंगे. मुझे अपनी
पार्टी नेशनल कांफ्रेंस का
समर्थन उन्हें देते हुए खुशी
हो रही है."




प्रणब की उम्मीदवारी की
घोषणा के कुछ ही देर बाद
प्रधनमंत्री मनमोहन सिंह ने
लोकसभा में विपक्ष की नेता
सुषमा स्वराज को फोन कर इसकी
जानकारी दी और उनसे समर्थन
मांगा. सूत्रों के मुताबिक
सुषमा ने कहा कि वह इस पर
विचार करेंगी.




सूत्रों ने यह भी बताया कि
प्रधानमंत्री ने जनता दल
(युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद
यादव को भी फोन किया है और
उनसे प्रणब की उम्मीदवारी का
समर्थन करने की गुजारिश की
है.




इस बीच, बीजेपी प्रवक्ता
शाहनवाज हुसैन ने कहा, "यूपीए
ने नाम की घोषणा से पहले हमसे
कोई सलाह मशविरा नहीं किया
गया. बेहतर होता आम सहमति
बनाने का प्रयास किया गया
होता. अब हम एमडीए की बैठक के
बाद अपनी रणनीति का ऐलान
करेंगे."




राष्ट्रपति चुनाव के मसले पर
इससे पहले एनडीए की एक बैठक
हुई, जिसमें उम्मीदवारों के
नामों पर चर्चा हुई.




यूपीए की बैठक




यह बैठक प्रधानमंत्री के
निवास 7 आरसीआर पर हुई जिसमें
टीएमसी को छोड़कर सभी सहयोगी
दल के प्रतिनिधि मौजूद थे.




दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक
में हिस्सा लेने के लिए 7
आरसीआर पहुंचने वालों में
सोनिया गांधी सबसे पहली थीं.
सूत्रों को मुताबिक बैठक से
पहले इस मुद्दे पर उन्हें
प्रधानमंत्री से सीधी बात की.




इस बैठक में प्रणब मुखर्जी के
साथ दूसरे वरिष्ठ कैबिनेट
मंत्री भी शामिल थे. बैठक में
डीएमके के नेता टी आर बालू,
आरएलडी के प्रमुख अजित सिंह
और एनसीपी के नेता प्रफुल
पटेल मौजूद थे.




खबरें यह भी हैं कि ममता और
मुलायम के बीच दूरियाँ बढ़ गई
है और अब एसपी प्रणब के
उम्मीदवारी का समर्थन कर रही
है. बीएसपी ने भी प्रणब के नाम
पर हामी भर दी है.




अब तक के रुझान के मुताबिक
लेफ्ट भी प्रणब के नाम पर
सहमत है, हालांकि उनकी तरफ से
इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान
नहीं आया है.




माना जा रहा है कि चौबीस जून
को प्रणब मनमोहन सरकार से
इस्तीफ़ा दे सकते हैं और
पच्चीस जून को नामांकन दाखिल
कर सकते हैं.




दिलचस्प बात यह है कि प्रणब
मुखर्जी एक बार फिर
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
के बॉस बन जाएंगे. एक जमाने
में प्रणब मुखर्जी के अंडर
में मनमोहन सिंह जूनियर
वित्त मंत्री रहे हैं.




संबंधित खबरें:





यूपीए
की बैठक में लगेगी प्रणब पर
मुहर






उम्मीदवारी
पर फैसला अभी नहीं: कलाम






मुलायम
अब भी हमारे साथ हैं: ममता




फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest India News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story ओम प्रकाश रावत होंगे नए मुख्य चुनाव आयुक्त, 23 जनवरी से संभालेंगे कामकाज