यूपी के बाहर चार राज्यों में ताकत दिखाएगी बसपा

यूपी के बाहर चार राज्यों में ताकत दिखाएगी बसपा

By: | Updated: 07 Oct 2013 12:47 AM


लखनऊ:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की
मुखिया मायावती
नवंबर-दिसंबर में पांच
राज्यों में होने वाले
विधानसभा चुनाव में भी
विरोधियों को अपनी ताकत का
एहसास कराने में जुट गई हैं.
बसपा के पदाधिकारियों की
मानें तो मिजोरम को छोड़कर
चार अन्य राज्यों में बसपा
पूरी मजबूती से विधानसभा
चुनावों में उतरेगी.





लोकसभा चुनाव से पहले चार
राज्यों में होने वाले
विधानसभा चुनाव में भी बेहतर
प्रदर्शन के लिए बसपा कोई कसर
नहीं छोड़ना चाहती. सूबे के
वरिष्ठ नेताओं को अन्य
प्रदेशों में होने वाले
विधानसभा चुनाव में लगाया जा
रहा है, ताकि वे उत्तर प्रदेश
की तरह उन राज्यों में भी
पार्टी के पक्ष में माहौल
बनाने के साथ ही अच्छे नतीजे
दे सकें.





दिल्ली सहित मध्य प्रदेश,
राजस्थान, छत्तीसगढ़ में
जनाधार बढ़ाने की तमाम
कोशिशों के बावजूद पार्टी इन
राज्यों की विधानसभा में
दहाई का अंक नहीं छू सकी है. इन
राज्यों के 2008 में हुए
विधानसभा चुनाव के दौरान
बसपा की उत्तर प्रदेश में
सरकार थी.





मुख्यमंत्री रहते बसपा
प्रमुख मायावती ने इन
राज्यों में कई सभाएं की थीं,
फिर भी मध्य प्रदेश की सात,
राजस्थान की छह तथा दिल्ली व
छत्तीसगढ़ की दो-दो सीटों पर
ही बसपा को जीत नसीब हुई थी.
बसपा को दिल्ली में तो 14 फीसदी
मत मिले थे लेकिन अन्य
राज्यों में 6-8 फीसदी मतों से
ही संतोष करना पड़ा था.

पार्टी
के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते
हैं, बसपा के हाथ से उप्र की
सत्ता भी जा चुकी है और निकट
भविष्य में लोकसभा के चुनाव
भी होने हैं, ऐसे में पार्टी
इस चुनाव को बेहद गंभीरता से
ले रही है. उन्होंने कहा कि
पार्टी अभी भले ही इन राज्यों
में से कहीं भी अपने दम पर
सरकार बनाने की स्थिति में न
हो, लेकिन चुनाव में ताकत
लगाकर उसकी कोशिश सभी
राज्यों में दहाई अंक तक
पहुंचने की है.

पार्टी
सूत्रों की मानें तो बसपा का
मानना है कि अन्य राज्यों में
बनने वाले माहौल से लोकसभा
चुनाव में भी उसे फायदा होगा
और इन राज्यों में खाता खुलने
की प्रबल संभावना रहेगी. अभी
पार्टी के 21 सांसदों में 20 तो
उप्र से ही हैं, जबकि एक सांसद
मध्य प्रदेश से है.





दिल्ली विधानसभा के चुनाव को
बसपा किस कदर अहम मान रही है
इसका अंदाजा इस बात से ही
लगाया जा सकता है कि पार्टी
के उत्तर प्रदेश इकाई के
अध्यक्ष राम अचल राजभर को
दिल्ली की जिम्मेदारी सौंपी
गई है. इसके अलावा पार्टी के
राष्ट्रीय महासचिव स्वामी
प्रसाद मौर्य, नसीमुद्दीन
सिद्दकी और महासचिव सतीश
मिश्र अन्य राज्यों में अपने
काम में जुटे हुए हैं.





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