यूपी चुनाव: सातवें दौर में 62 फीसदी मतदान

यूपी चुनाव: सातवें दौर में 62 फीसदी मतदान

By: | Updated: 02 Mar 2012 08:36 PM


बरेली / लखनऊ: यूपी
में विधानसभा चुनाव के
सातवें दौर में 60 फीसदी मतदान
हुआ है. इस दौर में दस जिलों की
62 सीटों पर वोटिंग हुई.




चुनाव के दौरान मतदान
केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइन
दिखाई दी. चुनाव आयोग के
आकड़ों के मुताबिक यूपी
चुनाव के सातों दौर में कुल 62
फीसदी मतदान हुआ.




राज्य निर्वाचन आयोग के
अधिकारियों के मुताबिक
बरेली में 57 फीसदी, मुरादाबाद
में 52 फीसदी, जेपी नगर यानी
अमरोहा में 56 फीसदी, पीलीभीत
में 55.2 फीसदी,   भीमनगर में 52.5,
लखीमपुर खीरी में 55 फीसदी,
बिजनौर में 51 फीसदी, बदायूं
में 49 फीसदी, रामपुर में 51.2
फीसदी और शाहजहांपुर 51 फीसदी
मतदान हुए हैं.




सातवें चरण में पश्चिमी
उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड
क्षेत्र के 10 जिलों की 60 सीटों
पर मतदान हुए. इस चरण में कई
दिग्गजों सहित कुल 962
उम्मीदवारों की किस्मत
ईवीएम में कैद हो गई.




इस चरण में जिन 10 जिलों में
मतदान हुए, उनमें लखीमपुर
खीरी, बरेली, शाहजहांपुर,
रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर,
भीमनगर, बदायूं, पीलीभीत और
अमरोहा शामिल हैं.




शांतिपूर्ण मतदान के लिए
मतदान केंद्रों पर केंद्रीय
सुरक्षा बलों के साथ
प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी),
राज्य पुलिस और होमगार्ड के
करीब एक लाख जवानों की तैनाती
की गई थी.




कुल 18,957 मतदान केंद्र बनाए गए
और मतदान के लिए 27,589
इलेक्ट्रॉनिक वोटिग मशीन
(ईवीएम) का इस्तेमाल हुआ.




इस चरण में बिठारी चैनपुर और
बरेली कैंट (बरेली जिला)
विधानसभा निर्वाचन
क्षेत्रों से सर्वाधिक 27-27
उम्मीदवार और सबसे कम आठ
उम्मीदवार गुन्नौर (बदायूं)
से चुनाव मैदान में हैं.




इस चरण में मतदाताओं की
संख्या के अनुसार सबसे बड़ा
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
मुरादाबाद नगर, जबकि
मतदाताओं की संख्या के
अनुसार सबसे छोटा विधानसभा
क्षेत्र आंवला है.




किसमें कितना दम?




2007 के चुनाव में इन जिलों में
बीएसपी का दबदबा रहा था लेकिन
2009 के लोकसभा चुनाव में वो इसे
कायम नहीं रख पाई.

2007 के
चुनाव में 67 सीटों में बीएसपी
को 28, एसपी को 17,बीजेपी को आठ और
आरपीडी को दो सीटें मिली थीं,
जबकि कांग्रेस और बीजेएसएच
के खाते में 1-1 सीट गई थी. 

लेकिन
दो साल बाद यानी 2009 के चुनाव
में समाजवादी पार्टी ने बढ़त
बना ली. परिसीमन के बाद कुल 60
सीटों में एसपी की 22, कांग्रेस
की 15, बीजेपी की 14, आरएलडी की
पांच और बीएसपी की चार सीटों
पर बढ़त रही.

बीएसपी के
सामने 2007 के नतीजों को
दोहराने की तो एसपी के लिए 2009
में बनाई गई बढ़त कायम रखने
की चुनौती है. जबकि कांग्रेस
और बीजेपी पर भी 2009 की बढ़त
बरकरार रखने की चुनौती है.




इस चरण की अहमियत

समाजवादी पार्टी के
महासचिव आजम खान के सामने
रामपुर सीट पर साख का सवाल है
जहां से वो खुद चुनाव लड़ रहे
हैं. यहां अमर सिंह और जया
प्रदा उन्हें शिकस्त देने के
लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे
हैं.

पीलीभीत में बीजेपी
सांसद वरुण गांधी की परीक्षा
भी इसी आखिरी दौर के चुनाव
में है जहां पार्टी के
उम्मीदवारों को लेकर उनकी
साख दांव पर है. उनके अलावा
मेनका गांधी और मुख्तार
अब्बास नकवी के दमखम का
इम्तिहान भी इसी दौर में है. 


जबकि कांग्रेस की तरफ से
केंद्रीय मंत्री जितिन
प्रसाद शाहजहांपुर में साख
की लड़ाई में फंसे हुए हैं तो
बरेली में सांसद प्रवीण ऐरन
जहां से उनकी पत्नी सुप्रिया
ऐरन चुनाव लड़ रही हैं.

कांग्रेस
और आरएलडी गठबंधन की मजबूती
की परीक्षा भी इस दौर में है.
मुरादाबाद के कांठ विधान सभा
क्षेत्र से दोनों ही
पार्टियां समझौते के बावजूद
एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़
रही हैं.




अहम उम्मीदवार

आज जिन
अहम उम्मीदवारों की किस्मत
का फैसला होगा उनमें
समाजवादी पार्टी के महासचिव
आजम खान रामपुर विधानसभा सीट
से चुनाव लड़ रहे हैं.

कांग्रेस
सांसद प्रवीण ऐरन की पत्नी
सुप्रिया ऐरन बरेली कैंट सीट
से उम्मीदवार हैं.बीएसपी से
बाहर का रास्ता दिखाने पर
शाहनवाज राणा अब बिजनौर सीट
से आरएलडी उम्मीदवार के तौर
पर चुनाव लड़ रहे हैं.

बिजनौर
जिले के ही नगीना सीट से
मायावती सरकार में खादी और
ग्राम उद्योग मंत्री ओमवती
देवी मैदान में हैं. बदायूं
जिले के सहसवान सीट से
बाहुबली नेता डीपी यादव अपनी
पार्टी आरपीडी से किस्मत
आजमा रहे हैं.

मुरादाबाद
शहर सीट पर संदीप अग्रवाल एक
बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं,
लेकिन इस बार वो एसपी नहीं
बल्कि बीएसपी के उम्मीदवार
हैं. बरेली जिले की बहेड़ी
सीट से समाजवादी पार्टी के
महासचिव अताउर्रहमान
उम्मीदवार हैं.




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