यूपी फिर से बनेगा गठबंधन की प्रयोगशाला!

यूपी फिर से बनेगा गठबंधन की प्रयोगशाला!

By: | Updated: 04 Mar 2012 09:44 PM


लखनऊ: यूपी
विधानसभा चुनाव का अंतिम चरण
शनिवार को समाप्त होने के साथ
सभी दल अपनी-अपनी सरकार बनाने
के दावे कर रहे हैं, लेकिन
सरकार किसकी बनेगी, यह तो छह
मार्च को ही तय हो पाएगा.




बहरहाल, राजनीतिक
विश्लेषकों की माने तो उत्तर
प्रदेश एक बार फिर राजनीतिक
गठबंधन की प्रयोगशाला बनने
की ओर अग्रसर है.





कहते हैं कि सियासत में कोई
किसी का स्थायी दुश्मन या
दोस्त नहीं होता..सब अपने
फायदे की बात देखते हैं.चुनाव
से पहले समझौता किसी और से
होता है और बाद में वे किसी और
के पाले में खड़े होते दिखाई
देते हैं.




इस बार चुनाव से पहले केवल
कांग्रेस ने ही राष्ट्रीय
लोक दल के साथ समझौता किया है.
उसका इतिहास भी हालांकि
अवसरवादी ही रहा है.

रालोद
की अवसरवादिता के बारे में
पूछे गए सवाल के जवाब में
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष
सूर्य प्रताप शाही ने
अजीबोगरीब जवाब दिया.
उन्होंने कहा, "इनका क्या है,
कल हमारे साथ थे और जब सत्ता
गई तो सपा के साथ हो लिए. अब
कांग्रेस के साथ हैं. इनका तो
हाल वही है कि जो इनकी मांग भर
दे यह उन्हीं के हो जाएंगे."

शाही
के इस जवाब पर रालोद की
सहयोगी दल कांग्रेस की
प्रदेश अध्यक्ष रीता
बहुगुणा जोशी कहती हैं,
"भाजपा लोगों को गुमराह करने
की कोशिश कर रही है. सच्चाई यह
है कि वह 50 सीटों के भीतर सिमट
कर रह जाएगी."

इसके अलावा
दो अन्य प्रमुख दलों बीएसपी
और समाजवादी पार्टी के नेता
भी पूर्ण बहुमत की सरकार
बनाने के दावे कर रहे हैं. साथ
ही यह भी कह रहे हैं कि यदि
पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो वे
विपक्ष में बैठेंगे.

बसपा
के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र
मजबूती के साथ अपनी सरकार
बनने का दावा कर रहे हैं. वह
कहते हैं, "बसपा वर्ष 2007 के
अपने आंकड़े से भी अच्छा
प्रदर्शन करेगी और मायावती
के नेतृत्व में हम एक बार फिर
बहुमत की सरकार बनाएंगे."

सपा
के प्रदेश महासचिव अशोक
वाजपेयी भी अपनी पार्टी की
सरकार बनाने का खम ठोंक रहे
हैं और उन्हें भी विश्वास है
कि बिना किसी का समर्थन लिए
ही सपा की सरकार बन जाएगी.

वह
कहते हैं, "इस बात में कोई शक
नहीं कि सपा सबसे बड़ी पार्टी
बनने जा रही है और हमें किसी
दूसरे के समर्थन की जरूरत
नहीं पड़ेगी. हम अपने दम पर
सरकार बनाने में कामयाब
रहेंगे."




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