यूपी सरकार के सामने साख बचाने की चुनौती

By: | Last Updated: Tuesday, 20 May 2014 3:08 PM

लखनऊ: लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत और जद (यू) की करारी शिकस्त के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. नीतीश के इस्तीफे के बाद अब उप्र सरकार ने भी आईने में झांकना शुरू कर दिया है. समाजवादी पार्टी के सामने अब अपनी साख बचाने की चुनौती है.

 

पार्टी मुख्यालय में मंथन तेज हो गया है. चुनाव से पहले भारी-भरकम जीत का दावा करने वाले कई नेताओं और पार्टी के सलाहकारों पर भी गाज गिर सकती है. लोकसभा चुनाव में मिली हार को अखिलेश सरकार की नाकामी से जोड़कर देखा जा रहा है.

 

ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख नेता को खास तवज्जो दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं. पार्टी से जुड़े लोग नेतृत्व परिवर्तन की बात से भी इनकार नहीं कर रहे हैं.

 

 

चुनाव में सिर्फ पांच सीटें जीत कर अपनी लाज बचाने वाली सपा में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी चल रही है. प्रदेश में जितने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे और उनका रिपोर्ट कार्ड क्या रहा इन मुद्दों पर सोमवार को पार्टी की समीक्षा बैठक है.

 

सूत्रों का कहना है कि बैठक में कई बड़े दिग्गजों पर गाज गिर सकती है. पूरा संगठन भंग हो सकता है. संगठन का गठन नए सिरे से किया जा सकता है. चर्चा तो यहां तक है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बजाए पार्टी के खास एक बड़े चेहरे को तवज्जो दिए जाने की तैयारी की जा रही है.

 

माना जा रहा है कि इस शख्स को सामने लाने के बाद पार्टी का जनाधार वापस लाने में मदद मिलेगी. इस नेता के पक्ष में सपा का बड़ा धड़ा भी आ सकता है.

 

उप्र में मुलायम सिंह का परिवार ही अपनी सीटें बचा पाया. इसके अलावा आजम खां जैसे सपा के दिग्गजों को भी जनता ने नकार दिया. सपा का कोई भी मंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाया है. पार्टी की इतनी करारी हार और घटे जनाधार से सपा मुखिया मुलायम सिंह बेहद खफा हैं.

 

सूत्रों का कहना है कि वह पार्टी से जुड़े तीन लोगों के अलावा किसी भी शख्स से बात नहीं कर रहे हैं. यही नहीं चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी बातें करने वाले पार्टी के पदाधिकारी भी नेता जी से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.

 

भाजपा नेता और देश के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले ही उप्र की तस्वीर बदलने के लिए काम शुरू कर दिया है. वाराणसी का कायाकल्प करने की तैयारी के साथ ही उप्र के अन्य जिलों के लिए भी मोदी का प्लान तैयार हो रहा है.

 

गुजरात से जुड़ी एजेंसियां उप्र के कई शहरों की भौगोलिक समीक्षा कर रही हैं. पीलीभीत में कूड़े से बिजली बनाने की परियोजना लगाए जाने के बावत गुजरात की एक एजेंसी ने वहां काम शुरू कर दिया है.

 

सपा सरकार के पास अभी तीन साल का वक्त और मोदी के विकास मॉडल का तोड़ निकालना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी. अखिलेश सरकार को तीन सालों में यह साबित करना होगा कि उनका विकास मॉडल मोदी के विकास मॉडल से बेहतर है.

 

तभी सपा अपनी साख बचाने में कुछ हद तक सफल हो सकती है. सूत्रों का कहना है कि समीक्षा बैठक में मोदी वार से बचने के लिए ढाल तैयार करने पर भी सपा विचार-विमर्श करेगी.

 

सपा के कद्दावर मंत्री आजम खां अपना ही गढ़ नहीं बचा पाए. जनता ने इस बार उन्हें भी नकार दिया है. इस मुद्दे पर आजम ने जनता पर ही तंज कसते हुए कहा कि यह ज्यादा सुविधाएं देने का ही नतीजा है. सपा ने लोगों को अधिक सुविधाएं दे दीं, इसीलिए लोग वोट डालने के लिए घरों से बाहर नहीं निकले.

 

नतीजतन सपा को हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि इस बार मुस्लिम मतदाताओं ने धर्म के आधार पर वोट नहीं किया है. आजम ही नहीं मुलायम सिंह के कुनबे को छोड़कर सपा का कोई भी मंत्री इस बार चुनाव नहीं जीत सका.

 

 

भाजपा के वरिष्ठ नेता व देवरिया के सांसद कलराज मिश्र ने पार्टी की शानदार जीत के बाद सपा पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सपा बची ही नहीं. लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव का कुनबा ही अपनी सीट बचा पाया है.

 

 

इससे साफ है कि जनता ने सपा को नकार दिया है. इस हालात में अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी अपने पद से त्याग पत्र दे देना चाहिए. गौरतलब है कि भाजपा की विजय के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

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Web Title: यूपी सरकार के सामने साख बचाने की चुनौती
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