राजस्थान: दांव पर है गहलोत और राजे की प्रतिष्ठा

By: | Last Updated: Friday, 4 October 2013 3:03 AM

राजस्थान
में इस समय कांग्रेस की सरकार
है और अशोक गहलोत
मुख्यमंत्री हैं. पिछले
विधानसभा चुनावों में 200 में
से 96 सीटें कांग्रेस ने जीती
थीं. बीजेपी के हिस्से 78 और
बीएसपी के पास 6 सीटें आई थीं.
अशोक गहलोत ने पूरी बीएसपी को
ही कांग्रेस में मिला कर
बहुमत का जुगाड़ किया था.

राजस्थान
चुनाव में प्रमुख चेहरे:
इस
बार भी मुख्य़ मुकाबला
कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही
होगा. इसमें भी दो शख्सियतों
के बीच टक्कर होगी. कांग्रेस
की तरफ से अशोक गहलोत और
बीजेपी की तरफ से वसुंधरा
राजे सिंधिया. देखा गया है कि
हार जीत का अंतर मत प्रतिशत
के हिसाब से डेढ़ से ढाई
फीसदी के बीच रहता है, पिछले
चार बार से. यहां हर पांचवे
साल सरकार बदलती रही है. इस
बार देखना दिलचस्प रहेगा कि
चुनावी ऊंट किस करवट बैठता ह.

राजस्थान चुनाव में
प्रमुख मुद्दे:
मुख्यमंत्री
अशोक गहलोत ने इस बार चुनाव
जीतने के लिए सारे हथकंडे
अपना लिए हैं. चाहे मुफ्त दवा
के बाद मुफ्त जांच की योजना
हो या डायलिसिस तक को मुफ्त
करवाने की योजना. चाहे जयपुर
में मेट्रो को चलाना हो या
बाड़मेर में 37 हजार करोड़ की
तेल रिफाइनरी लगाने का
उदघाटन. इसके आलावा लैपटाप का
वितरण, बुजुर्गों की पेंशन को
बढ़ाना और स्कूली बच्चियों
को साइकिल से लेकर स्कूटी तक
बांटी गयी हैं.

2003 के विधान
सभा चुनावों में सरकारी
कर्मचारियों की नाराजगी का
खामियाजा चलते अशोक गहलोत को
नुकसान उठाना पड़ा था इस बार
उन्होंने खास ख्याल रखा और
चुनावी साल में उन्हे छठे
वेतन आयोग का तोहफा दिया.
लेकिन गहलोत को अपने
मंत्रीमंडल के कुछ
मंत्रियों के कारण
शर्मदिंगी उठानी पड़ी है.

महिपाल
मदेरणा और मलखान सिंह
विश्नोई भंवरी देवी
हत्याकांड में नपे तो
बाबूलाल नागर पर एक युवती ने
बलात्कार का आरोप लगाया.
भरतपुर के पास गोपालगढ़ में
पुलिस फायरिंग में दस मेव
मारे गये थे जिससे मुस्लिमों
की नाराजगी अभी तक बनी हुई है.
खास बात है कि अशोक गहलोत पर
भी अपने बेटे और दामाद को आगे
ठेके दिलवाने को लेकर आरोप भी
लगे. वसुंधरा राजे इन मुद्दों
को ही उठा रही हैं. केन्द्र
सरकार की नाकामियों, महंगाई
और भ्रष्टाचार को भी चुनावी
मुद्दा बनाया जा रहा है.

मोदी की
नजर है राजस्थान पर:
लोकसभा
चुनावों के मद्देनजर
राजस्थान का विधानसभा चुनाव
बीजेपी और कांग्रेस के लिए
महत्वपूर्ण है. देखा गया है
कि जो भी दल विधान सभा चुनाव
जीतता है वो लोकसभा में भी
परचम फहराने में कामयाब होता
है. यहां लोकसभा की 25 सीटें
हैं.

2008 के पिछले विधानसभा
चुनावों में कांग्रेस जीती
तो 2009 के लोकसभा चुनावों में
उसे 25 में से 20 सीटें मिली जबकि
बीजेपी के हिस्से सिर्फ चार
सीटें ही आई. इसी तरह 2003 के
विधानसभा चुनावों में
बीजेपी जीती थी और 2004 के
लोकसभा चुनावों में उसे 19
सीटें मिली थीं.

इस बार अगर नरेन्द्र मोदी को
अपने दम पर लोकसभा में 200 के
आसपास सीटें जीतनी हैं तो
राजस्थान में कमल का फूल
खिलाना ही पड़ेगा.

फस्ट
टाइम वोटर:
यहां 72.9 लाख वोटर
ऐसा है जो पहली बार वोट
डालेगा. ये कुल वोटरों का
करीब 17 फीसदी है. इस का वोट
कांटे वाले चुनाव में
निर्णायक साबित हो सकता है.

सर्वे
की बात:
वैसे यहां कांटे का
मुकाबला माना जा रहा है. कहा
जा रहा है कि जो दल टिकट
बांटने में जितनी कम गलतियां
करेगा वहीं चुनाव जीतेगा
लेकिन राजस्थान में हुए सभी
सर्वे बीजेपी को जिता रहे
हैं. एक सर्वे में तो बीजेपी
को 118 सीटें दी जा रही हैं.

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Web Title: राजस्थान: दांव पर है गहलोत और राजे की प्रतिष्ठा
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