राजीव गांधी की हत्या और उनके हत्यारों की पूरी कहानी

By: | Last Updated: Wednesday, 19 February 2014 6:30 AM
राजीव गांधी की हत्या और उनके हत्यारों की पूरी कहानी

नई दिल्ली: प्रभाकरण के इशारे पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को अंजाम दिया गया. लेकिन ये ऐसी साजिश थी जिसमें एक नहीं, दर्जनों लोग शामिल थे या कम से कम उन्होंने साजिश में किसी ना किसी तरह मदद की.

 

राजीव गांधी की मौत के साथ ही शुरू हुआ था हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा Manhunt. इस मामले में 24 मई 1991 को सीबीआई की स्पेशल टीम ने केस दर्ज किया. सबसे बड़ा सबूत बने घटनास्थल पर मिले सबूत जिसमें एक कैमरा और कैमरे में खींची गईं तस्वीरें भी थीं.

 

इन तस्वीरों को देखिए जिसमें धनु, लता और सिवरासन दिखाई दे रहे हैं.

और इस तस्वीर में नजर आ रहे हैं सुभा और नलिनी. इन तस्वीरों को खींचने वाला हरिबाबू मानवबम धनु के साथ ही मौके पर मारे गए थे. जांच में ही सामने आया कि सिवरासन ने ही पूरी साजिश रची और इसमें उसका दाहिना हाथ था मुरूगन.

 

राजीव गांधी हत्या कांड की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई की स्पेशल टीम ने जैसे-जैसे शिकंजा कसा वैसे-वैसे लिट्टे समर्थकों के साइनाइट खाकर जान देने की खबरें आईं.

 

कहा जाता है कि पूरी जांच के दौरान करीब 100 लिट्टे समर्थकों ने साइनाइड खाकर जान दी थी. खुद राजीव गांधी को मारने के अभियान का इंचार्ज सिवरासन ने भी साइनाइड खाकर जान दे दी थी. लेकिन इसके बाद भी सीबीआई कुल 26 लोगों को कानून के कटघरे में लाने में कामयाब हुई. साजिश में शरीक 26 लोगों के खिलाफ नलिनी मुरुगन , संथन और पेरारिवलन समेत 26 लोगों पर मुकदमा चला.

 

निचली अदालत ने इन सभी लोगों को फांसी की सजा सुनाई. लेकिन 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी मुरुगन, संथन और पेरारिवलन की सजा बरकरार रखी. पहले नलिनी की फांसी उम्रकैद में बदली गई और फिर मुरुगन संथन और पेरारिवलन की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया गया.