राजीव गांधी के हत्यारे पेरारिवलन, नलिनी समेत सात दोषी होंगे रिहा, तमिलनाडु की डीएमके सरकार का फैसला

By: | Last Updated: Wednesday, 19 February 2014 5:45 AM

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों के बारे में तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने अहम फैसला लिया है. सरकार ने विधानसभा में एलान किया है कि नलिनी, पेरारिवलन समेत 7 दोषियों को रिहा किया जाएगा.

कल सुप्रीम कोर्ट ने सांथन, पेरारिवलन और मुरुगन की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. नलिनी समेत बाकी दोषी पहले से ही जेल में हैं. 14 साल से ज्यादा की सजा काट चुके हैं. राज्य सरकार ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए रिहाई का फैसला किया है.

 

आपको बता दें कि उम्रकैद की सजा का मतलब होता है कि दोषी को सारी ज़िंदगी जेल में रहना होगा, लेकिन राज्य सरकार चाहे तो 14 साल की सजा काट लेने के बाद दोषी को रिहा कर सकती है. तमिलनाडु की सरकार ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए राजीव गांधी के हत्यारों की रिहा करने का फैसला किया है.

 

 

 

क्या है पूरा मामला-

 

गौरतलब है कि साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या के तीनों दोषियों की फांसी की पुष्टि कर दी थी जिसके बाद संतन, मुरुगन और पेरारिवलन ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल की थी. उनकी दया याचिका साल 2011 में खारिज हो गई और उनको फांसी पर चढ़ाने की तैयारी होने लगी थी, लेकिन तब मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी. उसके बाद मामला फिर से सुप्रीम कोर्ट में आ गया. यहां पर राजीव गांधी हत्याकांड के तीनों दोषियों ने दया याचिकाओं के निबटारे में विलंब के आधार पर मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने का अनुरोध किया. उनकी दलील थी कि दया याचिकाओं के निबटाने में देरी की वजह से उन्हें काफी मानसिक वेदना सहनी पड़ी है. तीनों दोषियों ने ये तर्क भी दिया कि उनकी दया याचिकाओं के बाद दायर दया याचिका पर तो पहले फैसला हो गया लेकिन उनकी याचिकाओं को सरकार ने लटकाए रखा.

केंद्र सरकार ने की थी फांसी की मांग-

केंद्र सरकार ने तीनों दोषियों के अपराध को संगीन और आतंकवाद से जुडा बताते हुए उनके लिए फांसी की मांग की थी. मंगलवार को इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश पी सताशिम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने की. मुख्य न्यायाधीश पी सताशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की इस दलील को खारिज कर दिया कि उनकी दया याचिका पर फैसला करने में अनुचित विलंब नहीं हुआ है और फांसी की सजा का इंतजार कर रहे बंदी पीड़ा से नहीं गुजरे हैं.

इस खंडपीठ में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस के सिंह भी थे. पीठ ने कहा कि वे केंद्र के दृष्टिकोण को नहीं स्वीकार सकते और मुजरिमों- संतन, मुरूगन और पेरारिवलन की मौत की सजा उम्रकैद में बदली जाती है और अगर सरकार उनकी सजा में कोई अतिरिक्त कटौती करती है तो वह स्वीकार्य होगी. उन्होंने केंद्र से समय से राष्ट्रपति को परामर्श देने को कहा जिससे कि बिना अनुचित देरी के दया याचिकाओं पर फैसला किया जा सके.

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Web Title: राजीव गांधी के हत्यारे पेरारिवलन, नलिनी समेत सात दोषी होंगे रिहा, तमिलनाडु की डीएमके सरकार का फैसला
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